पश्चिमी एशिया के युद्ध के मैदान से एक ऐसी खबर निकलकर आ रही है जिसने पूरी दुनिया को सन्न कर दिया है। अमेरिका और ईरान के बीच चल रही तनातनी अब उस मोड़ पर पहुँच गई है जहाँ से वापसी का रास्ता बेहद कठिन नजर आ रहा है।
हाल ही में अमेरिका और इजराइल ने मिलकर ईरान के खिलाफ जो रणनीतिक कदम उठाए हैं, उनके परिणाम अब जमीन पर दिखने लगे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की कार्यशैली को लेकर अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में कई तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं।
अक्सर गली क्रिकेट में आपने देखा होगा कि जिसके पास बैट और बॉल होती है, वह अपने हिसाब से नियम बदलता रहता है। डोनाल्ड ट्रंप के हालिया कदम भी कुछ इसी तरह के दिखाई पड़ रहे हैं, जहाँ वे अपनी सुविधानुसार सीजफायर और हमलों का खेल खेल रहे हैं।
ईरान के साथ चल रहे इस संघर्ष में अमेरिका ने एक ऐसी कार्रवाई की है जिसने नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया है। अमेरिका ने ईरान की एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक संपत्ति, एक निर्माणाधीन पुल को पूरी तरह से तबाह कर दिया है।
इस पुल की लागत लगभग ₹3700 करोड़ आंकी गई थी, जो राजधानी तेहरान को पश्चिमी शहर कर्ज से जोड़ने वाला एक अहम हाईवे प्रोजेक्ट था। यह पुल किसी सैन्य ठिकाने का हिस्सा नहीं था, बल्कि आम जनता के इस्तेमाल के लिए बनाया जा रहा था।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस हमले के बाद बड़ी खुशी के साथ इसे सार्वजनिक किया और बताया कि वे ईरान को 'स्टोन एज' यानी पाषाण काल में पहुँचाने की तैयारी कर रहे हैं। ईरान ने इसके जवाब में बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए अमेरिका को चेतावनी जारी कर दी है।
ईरान का कहना है कि अगर अमेरिका ने उनका एक पुल तोड़ा है, तो वे पश्चिमी एशिया के देशों में स्थित आठ प्रमुख पुलों को निशाना बनाएंगे। इनमें यूएई, कुवैत और बहरेन जैसे देशों के महत्वपूर्ण ब्रिज शामिल हैं, जो अमेरिकी संरक्षण में माने जाते हैं।
इसी तनाव के बीच एक ऐसी खबर आई जिसने अमेरिकी रक्षा विभाग की नींद उड़ा दी है। विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान के एयरस्पेस में एक अमेरिकी फाइटर जेट दुर्घटनाग्रस्त होकर गिर गया है।
कुछ रिपोर्ट्स में इसे F-35 बताया जा रहा है, जबकि कुछ इसे F-15 होने का दावा कर रही हैं। हालांकि युद्ध के समय में सटीक जानकारी मिलना कठिन होता है, लेकिन अमेरिका ने खुद इस बात की पुष्टि कर दी है कि उनका एक विमान गिरा है।
वर्तमान में ईरान के भीतर ही उन पायलटों को खोजने के लिए एक व्यापक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है। अमेरिकी फाइटर जेट का ईरान की धरती पर गिरना तकनीकी और सामरिक दोनों ही दृष्टि से एक बड़ी हार मानी जा रही है।
अमेरिकी प्रशासन का लक्ष्य अब केवल सैन्य ठिकाने या परमाणु संस्थान नहीं रह गया है। वे अब उन इंफ्रास्ट्रक्चर्स को भी निशाना बना रहे हैं जो किसी भी देश की अर्थव्यवस्था और जनजीवन के लिए अनिवार्य होते हैं।
ईरान के विदेश मंत्री ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि नागरिक बुनियादी ढांचे को तोड़ना किसी युद्ध का हिस्सा नहीं, बल्कि एक आतंकी कृत्य है। जिस तरह से पुलों और अस्पतालों को निशाना बनाया जा रहा है, वह अंतरराष्ट्रीय कानूनों का खुला उल्लंघन है।
ईरान ने दुनिया को याद दिलाया है कि उनकी सभ्यता 7000 साल पुरानी है और वे पाषाण काल से भी समृद्ध रहे हैं। उन्होंने यह भी चेतावनी दी है कि अगर ईरान को आर्थिक रूप से पीछे धकेला गया, तो पूरी दुनिया के लिए तेल और गैस का संकट पैदा हो जाएगा।
ईरान ने साफ कर दिया है कि वे Strait of Hormuz से होने वाली किसी भी प्रकार की सप्लाई को रोक देंगे। इससे दुनिया भर में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है और वैश्विक अर्थव्यवस्था चरमरा सकती है।
युद्ध की इस आग में अमेरिका ने ईरान के पाश्चर इंस्टीट्यूट जैसी मेडिकल फैसिलिटी को भी नुकसान पहुँचाया है। एक अस्पताल को निशाना बनाए जाने पर WHO के महानिदेशक टेड्रोस एडेनोम ने भी अपनी गहरी चिंता व्यक्त की है।
अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों पर हमला करना युद्ध अपराध की श्रेणी में आता है, लेकिन अमेरिका वर्तमान में ईरान को झुकाने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार दिख रहा है। हालांकि, जमीन पर हकीकत कुछ अलग ही बयां कर रही है।
अमेरिका ने पहले खर्ग आइलैंड पर कब्जा करने की योजना बनाई थी और अपनी पैदल सेना भी वहां भेजने की तैयारी की थी। लेकिन ईरान की धमकियों और जवाबी कार्रवाई के डर से अमेरिका अब तक ग्राउंड ऑपरेशंस शुरू नहीं कर पाया है।
यह स्थिति दर्शाती है कि ईरान का सोशल मीडिया और सैन्य बारगेनिंग का तरीका काफी प्रभावी साबित हो रहा है। ईरान लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अमेरिका को एक आक्रामक शक्ति के रूप में चित्रित करने में सफल हो रहा है।
फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron ने भी इस मुद्दे पर अमेरिका से अलग रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि वे ईरान की सत्ता के समर्थक नहीं हैं, लेकिन उसे हटाने के लिए बमबारी करना कोई समाधान नहीं है।
यूरोपीय देशों का यह मानना है कि किसी भी देश में सत्ता परिवर्तन वहां की जनता को करना चाहिए, न कि विदेशी शक्तियों को। अमेरिका का इतिहास रहा है कि उसने जहां भी हस्तक्षेप किया, वहां केवल तबाही और अस्थिरता ही आई है।
लीबिया, सीरिया, इराक और अफगानिस्तान जैसे देशों के उदाहरण पूरी दुनिया के सामने हैं। इन अनुभवों के आधार पर अब यूरोप खुद को अमेरिकी युद्ध नीति से धीरे-धीरे अलग कर रहा है, जो अमेरिका के लिए एक बड़ा राजनयिक झटका है।
आज की सबसे बड़ी खबर विमान गिरने के बाद के घटनाक्रमों से जुड़ी है। ईरान के आसमान में अमेरिकी विमानों की आवाजाही अचानक बढ़ गई है, जिसे कई स्थानों पर देखा गया है।
वीडियो साक्ष्यों में बड़े रिफ्यूलिंग विमानों को हवा में ही हेलीकॉप्टरों में तेल भरते हुए देखा जा सकता है। यह दर्शाता है कि अमेरिका बेहद जल्दबाजी में है और वह अपने हेलीकॉप्टरों को जमीन पर उतारने का जोखिम नहीं लेना चाहता।
ये हेलीकॉप्टर ईरान की जमीन के काफी करीब तक आ रहे हैं, क्योंकि उन्हें अपने लापता पायलटों की तलाश करनी है। The Washington Post ने पुष्टि की है कि दो पायलटों को खोजने के लिए तलाश जारी है, जो ईरान के जनजातीय क्षेत्रों में कहीं गिर सकते हैं।
ईरान ने अभी तक पायलटों को अपनी हिरासत में लेने की पुष्टि नहीं की है, लेकिन उसने उन्हें पकड़ने के लिए इनाम घोषित कर दिया है। ईरान सरकार ने घोषणा की है कि जो कोई भी अमेरिकी पायलट को पकड़कर लाएगा, उसे 10 बिलियन टोमान का पुरस्कार दिया जाएगा।
ईरान के सरकारी चैनलों ने इस इनाम की घोषणा करते हुए जनजातीय लोगों से अपील की है कि वे पायलटों को ढूंढें। इस घोषणा ने अमेरिकी रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए भारी संकट पैदा कर दिया है, क्योंकि अब आम लोग भी पायलटों के दुश्मन बन सकते हैं।
सोशल मीडिया पर कई ऐसे वीडियो वायरल हो रहे हैं जिनमें दावा किया जा रहा है कि ईरान की मिसाइलों ने अमेरिकी विमान को सफलतापूर्वक ट्रैक कर निशाना बनाया। हालांकि इन वीडियो की सत्यता की पुष्टि करना अभी संभव नहीं है क्योंकि आज के दौर में एआई से ऐसी सामग्री बनाई जा सकती है।
लेकिन यदि यह विमान वास्तव में F-35 है, तो यह अमेरिका के लिए एक बहुत बड़ा रक्षा संकट होगा। F-35 को दुनिया का सबसे उन्नत और 'अनबीटेबल' विमान माना जाता है, और इसका गिरना इसकी वैश्विक साख को मिट्टी में मिला देगा।
ईरान की मीडिया ने विमान के मलबे और इजेक्ट हुई सीटों की तस्वीरें भी साझा की हैं, जिन्हें वे अपनी बड़ी जीत बता रहे हैं। वे इसे एक 'साइकोलॉजिकल वारफेयर' के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं ताकि अमेरिकी सैनिकों का मनोबल तोड़ा जा सके।
हैरान करने वाली बात यह है कि ईरान के आम नागरिक भी इस संघर्ष में शामिल होते दिख रहे हैं। एक वायरल वीडियो में एक व्यक्ति को रेस्क्यू के लिए आए अमेरिकी हेलीकॉप्टर पर अपनी साधारण बंदूक से निशाना साधते देखा जा सकता है।
युद्ध की इस भीषण स्थिति के बीच अमेरिका के भीतर भी भारी उथल-पुथल मची हुई है। राष्ट्रपति ट्रंप अपने सैन्य और खुफिया अधिकारियों से खुश नहीं नजर आ रहे हैं और उन्होंने कई बड़े फेरबदल किए हैं।
अमेरिका के रक्षा मंत्री पीटर हेगसेथ ने सेना के शीर्ष अधिकारियों को पद से हटाना शुरू कर दिया है। आर्मी चीफ जनरल Randy George, जिन्हें 2027 में रिटायर होना था, उन्हें समय से पहले ही हटा दिया गया है।
माना जा रहा है कि इन अधिकारियों ने ईरान के भीतर ग्राउंड ऑपरेशंस और यूरेनियम ठिकानों पर सीधे हमले से इनकार किया था। ट्रंप सरकार अब अधिक आक्रामक अधिकारियों को पदों पर बिठाने की योजना बना रही है जो उनके आदेशों का पालन बिना किसी संकोच के करें।
इसके अलावा FBI चीफ काश पटेल और नेशनल इंटेलिजेंस चीफ तुलसी गवाड़ को लेकर भी अमेरिकी गलियारों में चर्चा तेज है। ईरान ने इस पर तंज कसते हुए कहा है कि अमेरिका ईरान की सत्ता बदलने आया था, लेकिन वहां तो उनके अपने अधिकारी ही बदले जा रहे हैं।
इस पूरे युद्ध का असर अब भारत समेत दुनिया के अन्य देशों पर भी पड़ने लगा है। भारत के एक नाविक की इस संघर्ष के दौरान मौत हो गई है, जिससे भारत ने अपनी चिंताएं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जाहिर की हैं।
दुनिया के 60 से अधिक देशों ने यूके के साथ मिलकर एक बैठक की है ताकि इस बढ़ते संकट का कोई समाधान निकाला जा सके। अमेरिका के लिए यह युद्ध केवल एक सैन्य अभ्यास हो सकता है, लेकिन दुनिया के लिए यह सर्वाइवल का सवाल बनता जा रहा है।
ईरान ने उन आठ पुलों की सूची भी जारी कर दी है जिन्हें वे तबाह करने की योजना बना रहे हैं। इनमें कुवैत के Sheikh Jaber Al-Ahmad Al-Sabah Causeway और यूएई के कई महत्वपूर्ण ब्रिज शामिल हैं।
सऊदी अरब और बहरेन को जोड़ने वाला King Fahd Causeway भी ईरान की इस 'हिट लिस्ट' में शामिल है। यह स्थिति दिखाती है कि अब ईंट का जवाब पत्थर से दिया जा रहा है और कोई भी पीछे हटने को तैयार नहीं है।
डोनाल्ड ट्रंप का मानना है कि थोड़ा और समय मिलने पर वे हॉर्मज को खुलवा देंगे, लेकिन ईरान की तैयारी कुछ और ही इशारा कर रही है। आने वाले दिन इस बात का फैसला करेंगे कि यह संघर्ष विश्व युद्ध की ओर बढ़ेगा या कूटनीति की जीत होगी।
पूरे पश्चिम एशिया में इस समय डर और अनिश्चितता का माहौल है, जहाँ हर पल नई खबर समीकरण बदल रही है। अमेरिका और ईरान के बीच की यह जंग अब केवल दो देशों की नहीं, बल्कि वैश्विक व्यवस्था की चुनौती बन चुकी है।
यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या अमेरिका अपने पायलटों को सुरक्षित निकाल पाता है या ईरान उन्हें पकड़कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी शक्ति का प्रदर्शन करता है। फिलहाल, पूरी दुनिया की निगाहें तेहरान और वाशिंगटन की अगली चाल पर टिकी हुई हैं।