- ईरान पर हमले का काउंटडाउन और भारतीय समय का गणित
- इजराइल का नया टारगेट: ईरानी रेलवे और इंफ्रास्ट्रक्चर
- 155 विमानों वाला महा-ऑपरेशन: अमेरिकी सैन्य शक्ति का प्रदर्शन
डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दी गई हालिया धमकियों के मद्देनजर ईरान के लिए आज की रात एक 'काल रात' साबित होने जा रही है। ट्रंप के बयानों को आधार मानें तो यह रात ईरान को पाषाण काल (Stone Age) की याद दिलाने वाली होगी।
अमेरिकी प्रशासन का दावा है कि वे ईरान पर ऐसा हमला करने जा रहे हैं जिसे रिकवर करने में ईरान को कम से कम 15 साल का समय लगेगा। इस योजना के तहत ईरान के प्रमुख पावर प्लांट्स और सभी महत्वपूर्ण ब्रिजेस (पुलों) को नष्ट करने का लक्ष्य रखा गया है।
इजराइल ने भी स्पष्ट कर दिया है कि वह ईरान के भीतर घुसकर रेलवे ट्रैक्स और चलती ट्रेनों को निशाना बनाएगा। दुनिया के सामने खुलेआम दी गई इन धमकियों के बीच अमेरिका और इजराइल ने ईरान को अंतिम अल्टीमेटम दे दिया है।
ट्रंप का यह कदम ईरान को एक बार फिर समझौते की मेज पर लाने के उद्देश्य से उठाया गया है। अमेरिका चाहता है कि ईरान स्टेट ऑफ हॉर्मुज को अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए हमेशा के लिए खोल दे।
ईरान ने भी इन धमकियों को हल्के में नहीं लिया है और अपने स्तर पर जवाबी कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। ईरान ने अपने बिजली संयंत्रों की सुरक्षा के लिए ह्यूमन शील्ड (मानव ढाल) बनाने का निर्णय लिया है।
ईरानी प्रशासन ने अपने नागरिकों से अपील की है कि वे पावर प्लांट्स के चारों ओर इकट्ठा हो जाएं। अगर वहां हमला होता है, तो इसे दुनिया के सामने वॉर क्राइम (युद्ध अपराध) के रूप में पेश किया जा सकेगा।
ईरान पर हमले का काउंटडाउन और भारतीय समय का गणित
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने सोमवार की रात एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से दुनिया को संबोधित किया। इस संबोधन के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान बहुत प्रभावी ढंग से चल रहा है।
ट्रंप ने अपने फैसलों का बचाव करते हुए कहा कि वे वही काम कर रहे हैं जो 45 साल पहले के अमेरिकी राष्ट्रपतियों को करना चाहिए था। उन्होंने दावा किया कि अगर समय रहते फैसले लिए गए होते, तो आज नॉर्थ कोरिया के पास परमाणु बम नहीं होता।
अल्टीमेटम की समय सीमा के अनुसार, अमेरिकी समय के मुताबिक मंगलवार रात 12:00 बजे तक ईरान को शर्तें माननी होंगी। भारतीय समय के अनुसार यह समय बुधवार सुबह 5:30 बजे तक का बैठता है।
ट्रंप ने जोर देकर कहा कि अगर शर्तें नहीं मानी गईं, तो ईरान का हर प्रमुख पुल और बिजली घर जलाकर राख कर दिया जाएगा। वे ईरान को परमाणु हथियार बनाने की क्षमता से पूरी तरह वंचित करना चाहते हैं।
इस तनाव के बीच पाकिस्तान की मध्यस्थता से एक वार्ता चैनल भी सक्रिय होने की खबरें आई हैं। इसी प्रयास के कारण पहले ट्रंप के हमले की योजना को 24 घंटे का एक्सटेंशन मिला था।
दो चरणों में चलने वाली इस शांति वार्ता के बारे में ट्रंप ने स्वीकार किया है कि प्रयास जारी हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि उनकी धमकियां केवल कोरी बयानबाजी (Bluff) नहीं हैं।
इजराइल का नया टारगेट: ईरानी रेलवे और इंफ्रास्ट्रक्चर
ईरान के मामले में इजराइल ने अमेरिका पर भारी दबाव बना रखा है। इजराइल का मानना है कि ट्रंप केवल धमकियां देकर पीछे हट जाते हैं, जिससे ईरान को समय मिल जाता है।
इजराइल ने अब स्वतंत्र रूप से ईरान के इंफ्रास्ट्रक्चर को तबाह करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इजराइली सेना ने आधिकारिक चेतावनी जारी की है कि ईरानी नागरिक आज ट्रेनों से यात्रा करने से बचें।
इजराइल का सीधा लक्ष्य ईरान की रेलवे ट्रैक्स और परिवहन व्यवस्था को पंगु बनाना है। यह कदम ईरान को आर्थिक और रणनीतिक रूप से पूरी तरह से तोड़ने के प्रयास का हिस्सा है।
ट्रंप ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि वे ईरान को न्यूक्लियर वेपन हासिल करने का कोई मौका नहीं देंगे। उन्होंने कहा कि ईरान को कई मौके दिए गए, लेकिन अब उम्मीदें खत्म होती जा रही हैं।
ईरान ने स्टेट ऑफ हॉर्मुज के माध्यम से व्यापार करने वाले जहाजों पर 2 मिलियन डॉलर प्रति जहाज का शुल्क लगाने की धमकी दी है। ईरान का कहना है कि अमेरिका द्वारा किए गए नुकसान की भरपाई इसी पैसे से की जाएगी।
ट्रंप ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में अमेरिकी सेना द्वारा किए गए एक बड़े रेस्क्यू ऑपरेशन का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि कैसे अमेरिकी सेना ने अपने दो पायलटों को ईरान के कब्जे वाले क्षेत्र से सुरक्षित निकाला।
155 विमानों वाला महा-ऑपरेशन: अमेरिकी सैन्य शक्ति का प्रदर्शन
अमेरिकी सेना ने अपने एक वेपन सिस्टम ऑफिसर (WSO) को बचाने के लिए अभूतपूर्व सैन्य अभियान चलाया। इस रेस्क्यू ऑपरेशन में कुल 155 विमानों ने हिस्सा लिया, जो एक वैश्विक रिकॉर्ड की तरह है।
इस बेड़े में 4 बॉम्बर, 64 फाइटर जेट, 48 रिफ्यूलिंग टैंक और 13 रेस्क्यू विमान शामिल थे। ट्रंप ने गर्व से कहा कि अमेरिका ने अपने सैनिकों को कभी पीछे नहीं छोड़ा है और यह ऑपरेशन इसका प्रमाण है।
पिछले 37 दिनों के दौरान अमेरिका ने ईरान के ऊपर 10,000 से अधिक उड़ानें भरी हैं। इन उड़ानों के जरिए ईरान के 13,000 से अधिक ठिकानों पर हमले किए जाने का दावा किया गया है।
ऑपरेशन के दौरान अमेरिका का एक F-15 फाइटर जेट गिर गया था, जिसके बाद पायलटों को बचाने की चुनौती पैदा हुई। ट्रंप ने खुलासा किया कि पायलटों को बचाने के लिए दो अलग-अलग ऑपरेशन चलाए गए थे।
ईरान की सेना और IRGC के कमांडो को भ्रमित करने के लिए एक फर्जी लोकेशन पर विमानों के चक्कर कटवाए गए। जबकि असली रेस्क्यू ऑपरेशन दूसरी जगह चल रहा था, जहां से सैनिकों को निकाला गया।
ट्रंप ने मीडिया की भी आलोचना की जिसने यह खबर लीक कर दी थी कि एक सैनिक अभी भी फंसा हुआ है। ट्रंप के अनुसार, इस जानकारी के सार्वजनिक होने से रेस्क्यू ऑपरेशन में भारी कठिनाइयां आई थीं।
नाटो पर हमला और सहयोगियों से नाराजगी
ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने सहयोगियों के प्रति कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने साउथ कोरिया, जापान और ऑस्ट्रेलिया की आलोचना की क्योंकि उन्होंने इस जंग में अमेरिका का साथ देने से मना कर दिया।
ट्रंप ने याद दिलाया कि साउथ कोरिया और जापान की रक्षा के लिए हजारों अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। इसके बावजूद, हॉर्मुज संकट में इन देशों ने अमेरिका की शर्तों पर सैन्य सहयोग नहीं दिया।
नाटो (NATO) को एक बार फिर ट्रंप ने 'कागज का शेर' (Paper Tiger) करार दिया है। उन्होंने नाटो के वर्तमान अध्यक्ष मार्क रूट से मिलने से पहले ही अपनी नाराजगी जाहिर कर दी।
जर्मनी का जिक्र करते हुए ट्रंप ने कहा कि जिस देश का पुनर्निर्माण अमेरिका ने किया, आज वही साथ खड़ा नहीं है। ट्रंप ने इसे अमेरिका का अपमान बताते हुए भविष्य में कड़े कदम उठाने के संकेत दिए हैं।
ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप की पुरानी इच्छा एक बार फिर सामने आई है। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट संकेत दिए कि वे अभी भी ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण चाहते हैं।
पोलैंड के विदेश मंत्री ने ट्रंप के बयानों पर संक्षिप्त प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्होंने सब 'नोट' कर लिया है। वैश्विक स्तर पर ट्रंप खुद को अलग-थलग महसूस कर रहे हैं, जिसका गुस्सा वे ईरान पर निकाल सकते हैं।
ईरान की 10 सूत्रीय शर्तें और 'ह्यूमन शील्ड' रणनीति
ईरान ने भी झुकने के बजाय अमेरिका को अपना एक 10 सूत्रीय प्रपोजल भेजा है। इसमें ईरान ने मांग की है कि भविष्य में उन पर कभी हमला न होने की गारंटी दी जाए।
ईरान की शर्तों में लेबनान पर इजराइली हमलों को रोकना और ईरान पर लगे सभी प्रतिबंधों को हटाना शामिल हैं। इसके अलावा, हॉर्मुज से गुजरने वाले हर जहाज से भारी वसूली की बात भी कही गई है।
ईरानी प्रशासन ने अपने नागरिकों से न्यूक्लियर फैसिलिटीज और बिजलीघरों को घेरने को कहा है। उनका मानना है कि इंसानी ढाल होने पर अमेरिका बमबारी करने से पहले सौ बार सोचेगा।
ईरान के सरकारी मीडिया में इस समय देशभक्ति के संदेशों की बाढ़ आई हुई है। नागरिकों को यह समझाया जा रहा है कि उनके खड़े होने से ही देश की संपत्तियों की रक्षा संभव है।
दूसरी तरफ, इजरायल ने ईरान के खुफिया प्रमुख माजी खदेमी को मार गिराने का दावा किया है। इजराइली खुफिया एजेंसी मोसाद ने ईरान के रेवोल्यूशनरी गार्ड के भीतर सेंधमारी तेज कर दी है।
खाड़ी देशों में भी इस तनाव का असर दिख रहा है। सऊदी अरब और बहरीन को जोड़ने वाले किंग फहाद कॉजवे पर ट्रैफिक कम कर दिया गया है, क्योंकि ईरान इसे निशाना बना सकता है।
आर्थिक तबाही और वैश्विक प्रभाव
ट्रंप की रणनीति ईरान में बिजली सप्लाई पूरी तरह ठप करने की है। उनका मानना है कि बिना बिजली के ईरान के भीतर जनता का आक्रोश बढ़ेगा और वे अपने ही नेताओं के खिलाफ हो जाएंगे।
ईरान ने स्पष्ट किया है कि वे ओमान के साथ मिलकर स्टेट ऑफ हॉर्मुज के नए नियम बनाएंगे। अगर अमेरिका हमला करता है, तो ईरान खाड़ी देशों के तेल संयंत्रों को भी निशाना बनाने की धमकी दे चुका है।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भी इस मुद्दे पर आपातकालीन बैठकें बुलाई गई हैं। हालांकि, ट्रंप का रवैया देखते हुए किसी भी कूटनीतिक समाधान की उम्मीद कम ही नजर आ रही है।
डोनाल्ड ट्रंप के रक्षा मंत्री पीटर हेगसे ने भी पुष्टि की है कि ईरान पर हमलों की पूरी तैयारी है। सैन्य अधिकारियों को अगले आदेश तक हाई अलर्ट पर रहने को कहा गया है।
आज की रात ईरान के लिए वाकई निर्णायक साबित होने वाली है। क्या ईरान ट्रंप के दबाव में आकर घुटने टेकेगा या फिर यह क्षेत्र एक बड़े विनाशकारी युद्ध की ओर बढ़ जाएगा?
पूरी दुनिया की नजरें अब भारतीय समयानुसार बुधवार सुबह 5:30 बजे की समय सीमा पर टिकी हैं। आने वाले कुछ घंटे पश्चिम एशिया का भविष्य तय करेंगे।
ट्रंप के बयानों में जिस तरह की आक्रामकता देखी जा रही है, उससे कूटनीति के रास्ते लगभग बंद नजर आ रहे हैं। इजराइल द्वारा सीधे ईरान की रेलवे को निशाना बनाना इस बात का संकेत है कि युद्ध अब इंफ्रास्ट्रक्चर के स्तर पर आ गया है।
अंततः, अगर ट्रंप अपनी धमकियों पर अमल करते हैं, तो ईरान का भविष्य दशकों पीछे जा सकता है। लेकिन ईरान की 'ह्यूमन शील्ड' और 'हॉर्मुज टैक्स' वाली चालें अमेरिका के लिए भी मुश्किलें पैदा कर सकती हैं।