- पावर प्लांट डे और 48 घंटे का अल्टीमेटम
- ईरान की जवाबी धमकी और बाब-अल-मंडेब का संकट
- डिमोना न्यूक्लियर रिएक्टर और मुजतबा खमेनेई
हाल ही में Donald Trump के कुछ ऐसे बयान सामने आए हैं, जिनसे अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मच गई है। इन बयानों को देखकर ऐसा लगने लगा है कि ट्रंप जानबूझकर खुद को अनप्रिडिक्टेबल बना रहे हैं।
ट्रंप के इन फीचर्स में यह देखा गया है कि उन्होंने सार्वजनिक मंचों पर ऐसी बातें कीं जो एक पूर्व राष्ट्रपति को शोभा नहीं देतीं। उनके इन बयानों के आधार पर अब Madman Theory की चर्चा होने लगी है।
यह थ्योरी कभी रिचर्ड निक्सन के समय चर्चा में आई थी, जहां एक नेता खुद को पागल या सनकी के रूप में पेश करता है। इसका मकसद दुश्मन देशों के मन में डर पैदा करना होता है ताकि वे समझ न पाएं कि अगला कदम क्या होगा।
ट्रंप ने अपने सत्रों में अश्लील भाषा का प्रयोग किया और ईरान के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने यहां तक कहा कि यदि किसी को कुछ पूछना है तो सेक्स के बारे में भी बात कर सकते हैं।
सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस के बारे में भी उन्होंने बेहद आपत्तिजनक और अश्लील भाषा का इस्तेमाल किया। यह सब उनकी उस रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है जिसे अनहिंज्ड मैडमैन कहा जाता है।
ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया था कि वे Strait of Hormuz को खुलवाने के लिए कोई प्रयास नहीं करेंगे। उनका तर्क था कि अमेरिका के पास अपना पर्याप्त तेल है और उसे इसकी जरूरत नहीं है।
हालांकि, अब वे फिर से उसी स्ट्रेट को खुलवाने के लिए ईरान पर दबाव बना रहे हैं। यह विरोधाभास ही उनकी मैडमैन थ्योरी का हिस्सा है, जिससे दुनिया पर दबाव बनाया जा सके।
पावर प्लांट डे और 48 घंटे का अल्टीमेटम
ट्रंप ने हाल ही में ईरान के खिलाफ एक ट्वीट किया है जिसमें उन्होंने बेहद सख्त शब्दों का इस्तेमाल किया है। उन्होंने ईरानियों को 'क्रेजी' कहा और भद्दी भाषा का प्रयोग करते हुए उन्हें नरक में भेजने की धमकी दी।
द गार्जियन जैसे प्रतिष्ठित अखबारों ने भी अब ट्रंप के लिए Unhinged Madman शब्द का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। ट्रंप का यह गुस्सा ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को लेकर दिखाए जा रहे रुख के कारण है।
ट्रंप ने घोषणा की है कि आने वाला मंगलवार Power Plant Day होगा। उन्होंने साफ कहा कि इस दिन ईरान के पावर प्लांट और पुलों पर हमला किया जाएगा।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज नहीं खोला गया तो ईरान में कुछ भी नहीं बचेगा। यह घटनाक्रम 5 अप्रैल 2026 के आसपास का बताया जा रहा है जो भविष्य की एक गंभीर स्थिति की ओर इशारा करता है।
पहले ट्रंप कह रहे थे कि उन्हें हॉर्मुज से कोई लेना-देना नहीं है, लेकिन अब वे फ्रस्ट्रेशन में अश्लीलता पर उतर आए हैं। ईरान ने भी इसके जवाब में उनका मजाक उड़ाना शुरू कर दिया है।
ईरानियों ने मजे लेते हुए कहा कि "सॉरी सर, हम चाबी फ्लावर पॉट के नीचे रखकर भूल गए हैं"। इस मजाक के बीच तनाव और अधिक बढ़ गया है।
ट्रंप ने पहले 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था जो सोमवार को खत्म हो रहा था। लेकिन अब उन्होंने इस हमले के समय को 24 घंटे और आगे बढ़ाकर मंगलवार कर दिया है।
यह हमला Eastern Time के अनुसार मंगलवार रात 8 बजे होना प्रस्तावित है। भारतीय समयानुसार यह बुधवार सुबह करीब 7:30 बजे का समय होगा।
सवाल यह उठता है कि ट्रंप ने इस हमले को 24 घंटे के लिए स्थगित क्यों किया? इसके पीछे की कहानी रणनीतिक और कूटनीतिक दबाव से जुड़ी हुई है।
ट्रंप अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर लगातार अपडेट दे रहे हैं। उन्होंने 4 अप्रैल को ही धमकी दे दी थी कि यदि ईरान नहीं माना तो वे नरक मचा देंगे।
ईरान की जवाबी धमकी और बाब-अल-मंडेब का संकट
ईरान ट्रंप की धमकियों से डरने के बजाय पलटवार करने की मुद्रा में है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह केवल हॉर्मुज ही नहीं, बल्कि Bab-el-Mandeb स्ट्रेट को भी निशाना बना सकता है।
बाब-अल-मंडेब वह समुद्री रास्ता है जो अरब सागर को लाल सागर और स्वेज कैनाल से जोड़ता है। यदि यह रास्ता बंद होता है तो वैश्विक व्यापार पूरी तरह ठप हो जाएगा।
दुनिया का लगभग 10% तेल व्यापार और करोड़ों बैरल तेल रोजाना इसी रास्ते से गुजरता है। स्वेज कैनाल के जरिए ही यूरोप और एशिया का सीधा संपर्क होता है।
ईरान ने धमकी दी है कि यदि उनके इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुँचाया गया तो वे समुद्री रास्तों को पूरी तरह ब्लॉक कर देंगे। वर्तमान में वैश्विक ट्रांजिट का 20% हिस्सा अटका हुआ है जो बढ़कर 30% हो सकता है।
ईरान के पास यमन में Houthis विद्रोहियों का समर्थन है जो इस क्षेत्र में जहाजों को निशाना बना सकते हैं। यमन के तट से गुजरने वाले जहाजों के लिए यह एक बड़ा खतरा बन गया है।
यदि स्वेज कैनाल का रास्ता बंद होता है तो जहाजों को अफ्रीका के Cape of Good Hope से होकर जाना पड़ेगा। इससे यात्रा में 9 से 10 दिन का अतिरिक्त समय लगेगा और लागत भी बढ़ जाएगी।
यह दूरी लगभग 3500 समुद्री मील अधिक होगी, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है। हूतियों ने पहले ही कह दिया है कि वे बाब-अल-मंडेब पर हमले के लिए तैयार हैं।
ट्रंप की धमकियों के बीच ईरान का यह दांव अमेरिका के पश्चिमी मित्र राष्ट्रों की चिंता बढ़ा रहा है। तेल की कीमतों में भारी उछाल आने की संभावना से पूरी दुनिया डरी हुई है।
डिमोना न्यूक्लियर रिएक्टर और मुजतबा खमेनेई
युद्ध की खबरों के बीच एक और बड़ी सुर्खी सामने आई है। ईरान के सुप्रीम लीडर के बेटे Mojtaba Khamenei को लंबे समय बाद एक कमांड सेंटर में देखा गया है।
मुजतबा खमेनेई को ईरान के अगले संभावित उत्तराधिकारी के रूप में देखा जाता है। वे कमांड सेंटर में बैठकर इज़राइल के Dimona Nuclear Reactor पर हमले की प्लानिंग करते नज़र आए।
डिमोना रिएक्टर इजरायल के नागेव डेजर्ट में स्थित है और यह इजरायल की परमाणु शक्ति का केंद्र माना जाता है। इजरायल ने आधिकारिक तौर पर कभी स्वीकार नहीं किया कि उसके पास परमाणु बम है।
हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इज़राइल के पास लगभग 200 परमाणु बम मौजूद हैं। डिमोना रिएक्टर को इज़रायल ने बेहद सुरक्षित रखा है और इसके ऊपर से उड़ने पर भी पाबंदी है।
ईरान द्वारा डिमोना को निशाना बनाने की धमकी देना युद्ध को परमाणु स्तर पर ले जाने जैसा है। मुजतबा खमेनेई का सार्वजनिक रूप से सामने आना यह दर्शाता है कि ईरान अब आर-पार की लड़ाई के मूड में है।
इजरायल ने 1952 में अपना परमाणु आयोग बनाया था और 1960 के दशक तक डिमोना को एक सक्रिय केंद्र बना दिया था। 1986 में Sunday Times ने इस परमाणु केंद्र के रहस्यों का खुलासा किया था।
मॉर्डकै वानुनु नामक एक इजरायली कर्मचारी ने ही इसकी तस्वीरें लीक की थीं। इसके बाद दुनिया को पता चला कि इजरायल गुप्त रूप से परमाणु हथियार विकसित कर रहा है।
वानुनु को बाद में इज़रायल द्वारा ब्रिटेन से अगवा किया गया और उसे 18 साल की सजा दी गई। यह साबित करता है कि इज़राइल अपने परमाणु रहस्यों को लेकर कितना गंभीर है।
IAEA की चेतावनी और ईरान की परमाणु तैयारी
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के प्रमुख राफेल ग्रोसी ने भी ईरान की तैयारियों पर चिंता जताई है। उनका मानना है कि ईरान के पास अब मिलिट्री ग्रेड यूरेनियम बनाने की क्षमता है।
ईरान ने Isfahan जैसे शहरों में अपना यूरेनियम संवर्द्धन केंद्र बना रखा है। पहले यहाँ 60% तक संवर्द्धन की बात थी, जो अब 70% या उससे अधिक हो सकती है।
यदि ईरान 90% तक यूरेनियम संवर्धन कर लेता है, तो वह आसानी से परमाणु बम बना सकता है। युद्ध के माहौल में ईरान एक महीने के भीतर इस लक्ष्य को प्राप्त करने की स्थिति में है।
ईरान ने ट्रंप को चुनौती देते हुए कहा है कि उनके पास एक 'सरप्राइज' है। माना जा रहा है कि यह सरप्राइज ईरान का अपना परमाणु बम हो सकता है जिसका परीक्षण वे युद्ध के समय कर सकते हैं।
इस बीच अमेरिका में भी ट्रंप का विरोध शुरू हो गया है। लोग उनकी भाषा और व्यवहार को लेकर महायोग (Impeachment) की मांग कर रहे हैं।
सीएनएन (CNN) जैसे अमेरिकी चैनलों ने ट्रंप के बयानों को अभद्र और बच्चों के लिए सुनने लायक नहीं बताया है। ट्रंप और सीएनएन के बीच पुरानी दुश्मनी रही है, और अब यह और गहरा गई है।
ट्रंप ने सीएनएन को 'झूठा मीडिया' करार दिया है क्योंकि उसे ईरान में ग्राउंड रिपोर्टिंग की अनुमति मिली हुई है। अमेरिकी लोग भी ट्रंप की मानसिक स्थिति पर सवाल उठाने लगे हैं।
ट्रंप ने मंगलवार रात 8 बजे एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई है। इस कॉन्फ्रेंस में वे अपने भविष्य के कदमों की घोषणा कर सकते हैं जिससे युद्ध का रुख तय होगा।
पाकिस्तान और तुर्की की मध्यस्थता की कोशिश
जब ट्रंप और ईरान एक-दूसरे को खत्म करने की धमकी दे रहे हैं, तब कुछ देश बीच-बचाव में लगे हैं। Pakistan, इजिप्ट और तुर्की इस समय सक्रिय रूप से मध्यस्थता कर रहे हैं।
पाकिस्तान 'इस्लामाबाद अकॉर्ड' के जरिए 45 दिनों के सीजफायर की कोशिश में है। चर्चा है कि ट्रंप ने जो 24 घंटे का समय बढ़ाया है, वह इसी मध्यस्थता के कारण हो सकता है।
ईरान भी पाकिस्तान के माध्यम से अपनी बात अमेरिका तक पहुँचाने का प्रयास कर रहा है। हालांकि, धमकियों का दौर अभी भी थमा नहीं है और दोनों तरफ की सेनाएं अलर्ट पर हैं।
ईरान के भीतर अमेरिका और इजरायल ने हमलों की शुरुआत भी कर दी है। ईरान की मशहूर Sharif University, जिसे ईरान का एमआईटी (MIT) कहा जाता है, उसे निशाना बनाया गया है।
शरीफ यूनिवर्सिटी ने दुनिया को बेहतरीन इंजीनियर दिए हैं जो नासा और अमेरिकी कंपनियों में भी काम करते हैं। इस यूनिवर्सिटी को तोड़ना विज्ञान और शिक्षा पर एक बड़ा हमला माना जा रहा है।
कहा जा रहा है कि इसी यूनिवर्सिटी के इंजीनियरों ने वह तकनीक बनाई जिसने अमेरिका के F-15 फाइटर जेट्स को मार गिराया। इसी फ्रस्ट्रेशन में इस शैक्षणिक संस्थान को तबाह किया गया है।
यह हमला ठीक वैसा ही है जैसे प्राचीन काल में नालंदा विश्वविद्यालय को नष्ट किया गया था। अमेरिका में भी इस हमले का विरोध हो रहा है कि शिक्षा के केंद्रों को युद्ध में नहीं घसीटना चाहिए।
ट्रंप ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह दावा कर सकते हैं कि उन्होंने पायलटों को बचा लिया है और ईरान पर भारी दबाव बना दिया है। वे दुनिया को यह दिखाना चाहते हैं कि उनकी प्रेशर टैक्टिक काम कर रही है।
फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें बुधवार की सुबह पर टिकी हैं। क्या 45 दिन का सीजफायर होगा या ट्रंप अपने मंगलवार के वादे के मुताबिक ईरान में तबाही मचाएंगे, यह देखना शेष है।
ट्रंप का यह 'मैडमैन' अवतार उन्हें सत्ता में वापस लाएगा या उनके पतन का कारण बनेगा, यह समय बताएगा। लेकिन ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह झुकने वालों में से नहीं है।
ईरान की एंबेसी ने तो यहां तक कह दिया कि ट्रंप को अपना समय बदल लेना चाहिए क्योंकि 8 बजे का समय उन्हें सूट नहीं कर रहा। यह मजाक गंभीर युद्ध के बीच एक अजीबोगरीब स्थिति पैदा कर रहा है।
आने वाले कुछ घंटों में स्थिति और स्पष्ट होगी। परमाणु रिएक्टरों और पावर प्लांटों पर हमले की धमकियों ने मिडिल ईस्ट को बारूद के ढेर पर लाकर खड़ा कर दिया है।