Middle East Tensions Escalate: Strait of Hormuz Blockade Sparks Global Crisis (मध्य पूर्व में तनाव बढ़ा: होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी से वैश्विक संकट)

पश्चिम एशिया का युद्ध: हॉर्मोज जलडमरूमध्य पर इराक का कब्ज़ा, विश्व में खलबली
Story at a Glance:
  • पाकिस्तान में वार्ता और इजराइल की चिंता
  • लेबनान का जटिल समीकरण
  • इजराइल का "ग्रेटर इजराइल" का सपना

पश्चिम एशिया में एक जटिल संकट गहराता जा रहा है, जहां सीज फायर की घोषणा के बावजूद होर्मुज की खाड़ी से जहाजों का आवागमन बाधित हो रहा है। यह स्थिति वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गई है, क्योंकि इस मार्ग से तेल, एलपीजी और उर्वरकों जैसे महत्वपूर्ण उत्पादों का निर्यात होता है।

यह अटकलें लगाई जा रही हैं कि अगर वर्तमान हालात बने रहे, तो वैश्विक बाजारों में खुशी का जो माहौल लौटा था कि अब फिर से आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बहाल होगी, वह धूमिल पड़ जाएगा। यह चिंता इस बात पर केंद्रित है कि मामला अब लेबनान तक पहुँच गया है, और ईरान के दूतावास के अनुसार, होर्मुज की खाड़ी की चाबी अब लेबनान के हाथों में है।

💡 "होर्मुज की खाड़ी की चाबी अब लेबनान के हाथों में है - क्या यह ईरान का अमेरिका पर सार्वजनिक मज़ाक है?"

यह सवाल उठता है कि क्या यह एक 'पासिट ऑन पासिट ऑन' का खेल है, या फिर ईरान अमेरिका को सार्वजनिक रूप से अपमानित करने का प्रयास कर रहा है? जब एक बार होर्मुज की खाड़ी को खोलने के नाम पर ईरान और अमेरिका युद्ध विराम के लिए सहमत हुए थे, तब लेबनान का मुद्दा इतना बड़ा हो गया है कि ईरान ने लेबनान पर युद्ध विराम के लिए अमेरिका को मजबूर करते हुए कहा है कि यदि वे इसे खुलवाना चाहते हैं, तो पहले लेबनान पर युद्ध विराम लागू करें, जिसके बाद वे होर्मुज की खाड़ी खोल देंगे।

इसका सीधा मतलब यह है कि होर्मुज की खाड़ी का रास्ता अब लेबनान होकर आता है, और ईरान ने अपनी शर्तें मनवाने के लिए अमेरिका और इजराइल को दुनिया के सामने सार्वजनिक रूप से बेनकाब करने का एक नया तरीका अपना लिया है। यह संभावना जताई जा रही है कि आने वाले समय में होर्मुज की खाड़ी को भविष्य में भी ईरान द्वारा अमेरिका को धमकाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।

पाकिस्तान में वार्ता और इजराइल की चिंता

पाकिस्तान में वार्ता और इजराइल की चिंताक्या अमेरिका आज पाकिस्तान में होने वाली वार्ता में इस मुद्दे को उठा पाएगा? यह एक महत्वपूर्ण प्रश्न है। ईरान वास्तव में क्या कर रहा है? क्या वह इस युद्ध में वाकई विजेता बनकर होर्मुज की खाड़ी के मुकाबले अपने ऊपर लगे प्रतिबंध हटवा पाएगा? पाकिस्तान में जब ईरान और अमेरिका के प्रतिनिधि मिलेंगे, तो क्या होगा? इन सभी सवालों के जवाब आज के अपडेट में दिए जाएंगे।

इसके साथ-साथ, यह भी जानकारी सामने आई है कि इजराइल ने पाकिस्तान पर भड़कते हुए कहा है कि पहले ईरान वाले "डेथ टू इजराइल" यानी "इजराइल मुर्दाबाद" कहा करते थे, लेकिन अब कुछ वैसी ही भाषा पाकिस्तानी बोल रहे हैं। यह एक गंभीर चिंता का विषय है कि पाकिस्तान इस विवाद में कैसे फंस गया है।

आइए, इस पूरे मसले को विस्तार से समझते हैं। हमने आपको एक article में जानकारी दी थी कि सीजफायर खत्म हो गया है। ऐसा इसलिए कहा गया था क्योंकि एक दिन पहले ईरान ने युद्ध रोकने की शर्तों के रूप में दस शर्तें अमेरिका को सौंपी थीं। इन शर्तों में प्रमुख थीं: ईरान पर लगे सभी प्रतिबंध हटाए जाएंगे, होर्मुज की खाड़ी का नियंत्रण ईरान को दिया जाएगा, ईरान यूरेनियम संवर्धन कर पाएगा, और लेबनान पर किसी प्रकार का हमला नहीं होगा।

यह सब बातें तय होने ही वाली थीं कि दस घंटे के भीतर इजराइल ने लेबनान पर इतना बड़ा हमला किया कि वहां एक दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित कर दिया गया। अमेरिका ने इज़राइल के इस कृत्य को सही ठहराते हुए कहा कि लेबनान सीजफायर के बिंदुओं में शामिल नहीं था। इस बात पर ईरान ने होर्मुज की खाड़ी को रोक दिया।

ईरान ने कहा कि जब लेबनान पर सीज फायर नहीं माना जा रहा और एक दिन के भीतर ही रुख बदला जा रहा है, तो वे आगे नहीं बढ़ सकते। ईरान ने यह भी स्पष्ट किया कि जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने अपने ट्वीट में यह जानकारी दी थी कि लेबनान भी शर्तों में शामिल है, तो अमेरिका पीछे कैसे हट सकता है।

लेबनान का जटिल समीकरण

लेबनान का जटिल समीकरणइस पूरे मामले को समझने के लिए, हमें लेबनान की स्थिति को भी समझना होगा। इजराइल के उत्तर में स्थित लेबनान, जिसकी राजधानी बैरूत है, लगभग 60 लाख की आबादी वाला देश है। यह कभी फ्रांसीसी कॉलोनी हुआ करता था और भारत की आजादी से पाँच साल पहले स्वतंत्र हुआ। लेबनान में मुस्लिम और ईसाई समुदायों के अलावा, मुस्लिम समुदाय में भी शिया और सुन्नी के बीच विभाजन है। यहां लगभग 20 लाख सुन्नी, 20 लाख शिया और 20 लाख ईसाई रहते हैं।

फ्रांसीसी शासन के प्रभाव के कारण, यहां थोड़ी फ्रांसीसी संस्कृति भी पाई जाती है। लेबनान में सत्ता का बंटवारा इस प्रकार है: प्रधानमंत्री सुन्नी समुदाय से होता है, राष्ट्रपति ईसाई समुदाय से, और संसद का स्पीकर शिया समुदाय से। इन तीनों समुदायों के बीच शक्ति का संतुलन बनाए रखने के लिए यह व्यवस्था है।

हालांकि, शिया समुदाय के अंदर एक शक्तिशाली मिलिटेंट समूह उभरा है, जिसका नाम हिजबुल्ला है। यह समूह लेबनान की सबसे बड़ी सेना रखता है और इज़राइल के लिए एक प्रमुख चिंता का विषय है। ईरान हिजबुल्ला का समर्थन करता है।

लेबनान में एक लाख से अधिक फिलिस्तीनी शरणार्थी भी रहते हैं। ये शरणार्थी, जो पहले फिलिस्तीन से इजराइल के कब्जे के कारण विस्थापित हुए थे, अब लेबनान के दक्षिणी हिस्से में, विशेष रूप से लितानी नदी के आसपास के क्षेत्र में बसे हैं। यहां उन्होंने पीएलओ जैसे संगठन बनाए। आज, यही फिलिस्तीनी समुदाय हिजबुल्ला की शक्ति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

हिजबुल्ला, जो दुनिया के सबसे शक्तिशाली मिलिटेंट समूहों में से एक माना जाता है, फिलिस्तीनियों की मदद से इजराइल पर हमले करता है। इसके जवाब में, इजराइल अक्सर इस क्षेत्र में बमबारी करता रहता है। यह एक जटिल स्थिति है जहां विस्थापित आबादी खुद को सुरक्षित रखने के लिए संघर्ष कर रही है, और इजराइल अपनी सुरक्षा के लिए जवाबी कार्रवाई कर रहा है।

इजराइल का "ग्रेटर इजराइल" का सपना

कुछ पत्रकारों का मानना है कि इजराइल का असली लक्ष्य "ग्रेटर इजराइल" का निर्माण करना है। इजराइल ने पहले भी, 1967 के युद्ध के दौरान, विस्तारवादी योजनाओं का प्रदर्शन किया था। उस समय, उसने सेनाई प्रायद्वीप पर कब्जा किया था और सऊदी अरब, कुवैत, इराक और सीरिया के कुछ हिस्सों को भी अपने नियंत्रण में लेने की योजना बनाई थी।

💡 "इजराइल का असली लक्ष्य "ग्रेटर इजराइल" का निर्माण करना है - क्या यह महत्वाकांक्षा खतरनाक स्तर पर पहुँच रही है?"

इजराइल ने हाल ही में ईरान पर जिस तरह से हमले किए हैं, उसने यह स्पष्ट कर दिया है कि उसके पास इतनी ताकत है कि वह मुस्लिम दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश, ईरान, को भी निशाना बना सकता है। ईरान, जो शिया समुदाय का गढ़ है और जिसने हमेशा इजराइल से लड़ने का सपना देखा है, अब इजराइल के हमलों का सामना कर रहा है। इजराइल ने ईरान के प्रमुख नेताओं और महत्वपूर्ण रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया है।

यह देखा जा सकता है कि इजराइल अपनी सीमाओं का विस्तार करने में सक्षम है, और दुनिया का कोई भी देश उसका प्रभावी ढंग से विरोध नहीं कर पा रहा है। ईरान, जो पहले सबसे बड़ा प्रतिरोधक था, अब कमजोर हो गया है। अब ईरान के पास केवल होर्मुज की खाड़ी पर नियंत्रण का विकल्प बचा है, जिसे वह तेल ले जाने वाले जहाजों पर हमला करने के लिए इस्तेमाल कर सकता है। यदि यह नियंत्रण भी छिन गया, तो मेडिटेरेनियन सागर से लेकर फारस की खाड़ी तक इजराइल के विस्तार को कोई नहीं रोक पाएगा।

विस्तारवादी योजनाओं के प्रमाण

इजराइल की इस महत्वाकांक्षा के प्रमाण विभिन्न क्षेत्रों में देखे जा सकते हैं। हाल के समय में, इजराइल ने वेस्ट बैंक के लगभग दो-तिहाई हिस्से पर कब्जा कर लिया है, और गाजा पट्टी के लगभग एक-तिहाई हिस्से पर भी उसका नियंत्रण है। लेबनान के नक्शे पर भी, इज़राइल ने लगभग 20% हिस्से पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया है।

इजराइल की मांग है कि लितानी नदी उसकी सीमा बन जाए। इसका मतलब है कि लितानी नदी के पार केवल लेबनान रहे, और नदी के इस पार का सारा क्षेत्र इजराइल के पास हो। इजराइल इस क्षेत्र को "बफर जोन" के रूप में देखता है, ताकि लेबनान से कोई हमला न हो सके। यह उसी तरह है जैसे चीन और भारत के बीच नेपाल को एक बफर स्टेट माना जाता है।

यह स्पष्ट है कि दुनिया में चल रही अधिकांश जंगें जमीन के लिए हैं। चाहे वह भारत-पाकिस्तान का कश्मीर को लेकर विवाद हो, चीन का अरुणाचल प्रदेश पर दावा हो, या अमेरिका का ग्रीनलैंड पर ध्यान देना हो, सभी संघर्ष जमीन पर आधारित हैं। इजराइल की भी यही मंशा लगती है।

इजराइल ने घोषणा की है कि अगले दो हफ्तों तक लेबनान पर हमला जारी रखेगा, और इसका होर्मुज की खाड़ी से कोई लेना-देना नहीं है। लेकिन ईरान ने स्पष्ट किया है कि लेबनान उनके लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि वहां हिजबुल्ला है, जिसका ईरान समर्थन करता है।

💡 "युद्ध असल में जमीन के लिए है, और इज़राइल लितानी नदी तक अपनी सीमा बढ़ाना चाहता है।"

इजराइल-पाकिस्तान तनाव और ख्वाजा आसिफ का बयान

ईरान के संसद अध्यक्ष गालिबाफ ने कहा है कि युद्ध विराम की दस शर्तों में से तीन का उल्लंघन हो रहा है, क्योंकि लेबनान पर हमला जारी है। इस बीच, इज़राइल ने एक और हरकत की है। दो दिन पहले, जब एक गैस फील्ड को उड़ाया गया था, तो बदले में कुवैत पर हमला हुआ था। ईरान ने स्पष्ट किया कि कुवैत पर हमला उन्होंने नहीं किया, बल्कि यह अमेरिका और इजराइल ने किया था ताकि ईरान को बदनाम किया जा सके।

इस बीच, पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने इजराइल के खिलाफ एक अत्यंत विवादास्पद बयान दिया। उन्होंने कहा, "इजराइल मानवता के लिए एक अभिशाप है, जबकि इस्लामाबाद में शांति वार्ता चल रही है, लेबनान में नरसंहार हो रहा है।" उन्होंने आगे कहा कि इजराइल एक बुराई है और उसने पहले गाजा में, फिर ईरान में, और अब लेबनान में निर्दोष नागरिकों को मारा है। उन्होंने यह भी कहा कि जिन लोगों ने इस "कैंसरस स्टेट" (इजराइल) को बनाया है, उन्हें नरक में भी जगह न मिले।

यह बयान तब आया जब पाकिस्तान में ईरान और अमेरिका के प्रतिनिधि वार्ता के लिए पहुंच रहे थे। इस बयान पर इज़राइल भड़क गया। इजराइल के अमेरिकी राजदूत ने कहा, "आप मध्यस्थ नहीं हैं, आप समस्या हैं। इजराइल यहां रहेगा, यह बातचीत का विषय नहीं है।" इजराइल के प्रधानमंत्री के हैंडल से भी ट्वीट आया कि पाकिस्तान के रक्षा मंत्री का यह बयान अस्वीकार्य है, खासकर ऐसे देश से जो खुद को शांति का मध्यस्थ बता रहा है।

पाकिस्तान की घबराहट और ट्वीट डिलीट

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री के इस बयान के बाद, उन्हें अपनी गलती का एहसास हुआ। जब इजराइल ने कड़ी प्रतिक्रिया दी, तो ख्वाजा आसिफ ने अपना ट्वीट डिलीट कर दिया। यह दर्शाता है कि पाकिस्तान को अपनी गलती का एहसास हुआ और वह अंतरराष्ट्रीय दबाव में आ गया।

ऐसा लगता है कि पाकिस्तान के नेताओं, जिनमें आसिम मुनीर और शहबाज शरीफ शामिल हैं, ने ख्वाजा आसिफ को फटकार लगाई होगी, यह कहते हुए कि उनके बयान से पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय छवि को नुकसान पहुंचा है।

यह घटनाक्रम दर्शाता है कि कैसे क्षेत्रीय तनाव और भू-राजनीतिक दांव-पेंच जटिल रूप ले रहे हैं। पाकिस्तान, जो मध्यस्थता करने का प्रयास कर रहा है, खुद ही इस विवाद में फंस गया है।

इस्लामाबाद में वार्ता और ईरान की मांगें

ईरान के प्रतिनिधि इस्लामाबाद पहुंच चुके हैं, और अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल भी पहुंच गया है। वार्ता में ईरान के प्रतिनिधिमंडल में विदेश मंत्री और स्पीकर शामिल हैं, जबकि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल में जेडी वैंस, जेरेड कुशनर और स्टे विटकॉफ जैसे नाम शामिल हैं।

ईरान ने अपनी दस सूत्रीय मांगों में से कई महत्वपूर्ण बिंदु रखे हैं। इनमें होर्मुज की खाड़ी से निकलने वाले तेल पर प्रति बैरल एक डॉलर का टोल, और अपने ऊपर लगे सभी प्रतिबंधों को हटाना शामिल है। ईरान चाहता है कि न केवल उस पर लगे प्राथमिक प्रतिबंध हटें, बल्कि उससे व्यापार करने वाले देशों पर लगे द्वितीयक प्रतिबंध भी हटाए जाएं।

ईरान यह भी चाहता है कि अमेरिका पश्चिमी एशिया के देशों पर हमले बंद कर दे, और यह सुनिश्चित करे कि उसके हित सुरक्षित रहें। यह देखना होगा कि इन वार्ताओं में क्या होता है।

अमेरिका के लिए होर्मुज की खाड़ी क्यों महत्वपूर्ण है?

अमेरिका के लिए होर्मुज की खाड़ी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह वैश्विक तेल आपूर्ति का एक प्रमुख मार्ग है। यदि यह मार्ग बंद हो जाता है, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसका गंभीर प्रभाव पड़ेगा। अमेरिका ईरान के इस कदम को अपनी शक्ति को चुनौती के रूप में देखता है।

डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में ट्वीट किया था कि यदि टैंकरों से टोल वसूला जा रहा है, तो इसे रोका जाना चाहिए। व्हाइट हाउस ने भी इस पर अपनी सहमति जताई थी। ईरान की दूतावास ने मज़ाकिया अंदाज़ में कहा है कि "बैगर्स कांट बी चूज़र्स" (भिखारी चुन नहीं सकते), जिसका मतलब है कि अमेरिका की जरूरत है, और वह अपनी शर्तें नहीं रख सकता।

ट्रंप को लगता है कि ईरान में उन्हें मिली जीत को लेकर कुछ अमेरिकी समाचार चैनल, जैसे सीएनएन और न्यूयॉर्क पोस्ट, उनकी छवि खराब कर रहे हैं। उन्होंने वॉल स्ट्रीट जर्नल पर भी यह आरोप लगाया कि उसने कहा कि उन्होंने ईरान में "असमय जीत" की घोषणा कर दी।

ट्रंप यह साबित करना चाहते हैं कि वे ईरान को परमाणु बम रखने से रोकेंगे और होर्मुज की खाड़ी से तेल का प्रवाह फिर से शुरू करवाएंगे। यह उनके लिए एक प्रतिष्ठा का मामला बन गया है, खासकर मध्यावधि चुनावों को देखते हुए।

💡 "अगर होर्मुज की खाड़ी का रास्ता खुलता है, तो ईरान को हर साल अरबों डॉलर का लाभ होगा, या तो सीधे या प्रतिबंध हटने से।"

यह संभव है कि ट्रंप की टीम ईरान के साथ बातचीत में कुछ रियायतें दे, जैसे कि प्रतिबंधों को हटाना, ताकि होर्मुज की खाड़ी खुल सके। यह एक जटिल सौदेबाजी की प्रक्रिया होगी, जिसमें दोनों पक्ष अपनी मांगों को आगे बढ़ाएंगे।

यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह वार्ता कहां तक ​​पहुंचती है और इसका वैश्विक सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ता है। इस बीच, ईरान का सोशल मीडिया ट्रंप का मज़ाक उड़ा रहा है, जो दर्शाता है कि ईरान भी अपनी स्थिति को मज़बूत करने में जुटा हुआ है।

Rajesh Kashyap

Digital & Tech enthusiast। पिछले कई सालों से Geopolitics, Indian Finance और EV sector को closely follow कर रहा हूँ। Behind The Fold (behindthefold.in) का Founder — जहाँ हम headlines के पीछे की असली कहानी लाते हैं।

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