- युद्धविराम का टूटना: आशाओं पर पानी
- ईरान की जीत या एक छलावा?
- लेबनान पर हमले: सीज फायर का उल्लंघन
लेबनान की राजधानी बैरूत में हुए विनाशकारी विस्फोटों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को झकझोर कर रख दिया है। जो तस्वीरें वहा से आ रही हैं, वे उस भयानक मंजर को बयां करती हैं जहाँ इमारतों के चीथड़े उड़ गए और कारों में बैठे लोग अपने घरों को तबाह होते देख रहे थे।
यह भयावह घटना लेबनान की राजधानी बैरूत में हुई, जहाँ बम धमाकों में 100 से अधिक लोगों के मारे जाने की खबर है। लेबनान में एक दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की गई है, और सैकड़ों लोग अभी भी मलबे में दबे हुए हैं।
युद्धविराम का टूटना: आशाओं पर पानी
जिस सीज फायर की घोषणा कल सुबह हुई थी, जिसमें यह तय हुआ था कि ईरान स्टेट ऑफ हॉर्मोज को खोल देगा ताकि अमेरिका और इजराइल आने वाले समय में उससे बातचीत कर सकें और अगले दो हफ्ते तक कोई हमला न करें, वह पूरे एक दिन भी नहीं चला।
इज़राइल ने लेबनान पर हमले किए, इस सीजफायर के टूटने की खबर के बाद, इसके जवाब में, ईरान ने स्टेट ऑफ हॉर्मोज को बंद कर दिया। राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को धमकी दी कि या तो सीज फायर की डील मान जाओ, अन्यथा वे फिर से हमला शुरू कर देंगे।
यह पूरा घटनाक्रम आश्चर्यजनक है, क्योंकि हम वहीं आकर खड़े हो गए हैं जहाँ से हमने शुरुआत की थी। सीज फायर पूरे एक दिन भी नहीं चला। आज के सत्र में हम इस विषय पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
क्या सीजफायर सचमुच टूट गया है? क्या पाकिस्तान की मध्यस्थता को किसी ने नहीं माना, या केवल इज़राइल ने इसे नज़रअंदाज किया? हम इन सभी बातों पर आगे बढ़ेंगे।
ईरान की जीत या एक छलावा?
एक विस्तृत विश्लेषण में, यह सवाल उठाया गया था कि क्या ईरान जीत गया है। अमेरिका और इजराइल, जो एक रात पहले तक ईरान को"सभ्यता खत्म कर देने" की धमकी दे रहे थे, वे ईरान के साथ एक डील पर सहमत हो गए थे।
इस डील में, ईरान की रखी गई शर्तें मान ली गई थीं, और ये शर्तें ईरान के पक्ष में थीं। इनमें ईरान को यूरेनियम एनरिचमेंट की अनुमति, प्रतिबंधों का हटाया जाना, और स्टेट ऑफ हॉर्मोज पर ईरान का नियंत्रण शामिल था।
लेबनान पर हमले: सीज फायर का उल्लंघन
इन सभी शर्तों में, लेबनान पर हमलों का न होना सबसे महत्वपूर्ण था। लेबनान, जो इजराइल के उत्तर में स्थित है, में हिजबुल्ला नामक एक समूह है जिसे इजराइल एक आतंकवादी समूह मानता है।
यह डील पाकिस्तान के प्रधानमंत्री द्वारा भी ट्वीट की गई थी, जिसमें लेबनान का स्पष्ट उल्लेख था, और जिसे खुद अमेरिका ने स्वीकार किया था।
लेकिन, सीज फायर की घोषणा के लगभग 10 घंटे बाद, 3:44 बजे, एक खबर आई कि ईरान की ऑयल रिफाइनरी पर हमला हुआ है। ईरान की रिपब्लिक न्यूज़ एजेंसी ने ट्वीट किया कि उनके लवान आइलैंड पर स्थित ऑयल फैसिलिटीज पर मिसाइल हमले हुए हैं।
इसके जवाब में, ईरान ने तुरंत यूएई और कुवैत पर हमला कर दिया। लगभग 10 घंटे के भीतर, सारे घटनाक्रम तेजी से होने लगे।
बैरूत का विनाश: 10 मिनट में 100 एयर स्ट्राइक
फिर खबर आई कि इज़राइल ने लेबनान पर हमला कर दिया है। लेबनान में, इजराइल द्वारा की गई बॉम्बिंग इतनी भीषण थी कि इसे साल भर की सबसे भीषण घटनाओं में से एक माना जा रहा है।
तस्वीरों से अंदाजा लगाया जा सकता है कि 10 मिनट में बैरूत के अंदर 100 बम गिराए गए। सीसीटीवी फुटेज इस भयानक हादसे की गवाह हैं।
बैरूत, बारबर, अलमजरा और टायरे जैसे इलाकों में हमले हुए। इजराइल ने दावा किया कि इन सभी नागरिक इलाकों में हिजबुल्ला के आतंकी छुपे थे, जिन्हें निशाना बनाया गया।
हालांकि, इजराइल का कहना था कि हिजबुल्ला नागरिकों को"ह्यूमन शील्ड" के रूप में इस्तेमाल करता है, और वे केवल"हिजबुल्ला के आतंकियों" को निशाना बना रहे थे।
अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रिया: निंदा और लाचारी
जब सुबह यह खबर फैली, तो लगभग 254 लोग इस घटना में मारे गए थे और 1165 लोग घायल हुए थे। लेबनान ने इसे अपने देश की सबसे बड़ी घटनाओं में से एक मानते हुए राष्ट्रीय शोक घोषित कर दिया।
ईरान ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इजराइल ने अमेरिका को"बंधक" बना लिया है और वह नहीं चाहता कि ईरान के साथ कोई समझौता हो।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ट्वीट करके सीज फायर के उल्लंघन की निंदा की और सभी पक्षों से संयम बरतने का आग्रह किया।
संयुक्त राष्ट्र ने इस घटना पर प्रतिक्रिया दी, लेकिन उसकी प्रतिक्रिया केवल"खबर बताने" तक सीमित रही। उसने केवल यह कहा कि"आम नागरिकों पर इन हमलों का असर पड़ रहा है।"
फ्रांस के राष्ट्रपति ने लेबनान के राष्ट्रपति के साथ बातचीत की और लेबनान के साथ"पूरी एकजुटता" व्यक्त की। उन्होंने इज़राइल के हमलों की"कड़ी निंदा" की और कहा कि सीजफायर के प्रयासों को लागू रहना चाहिए था।
यूरोप ने इन शर्तों को स्वीकार किया था कि लेबनान पर हमले नहीं होंगे, लेकिन इज़राइल ने नहीं माना। इजराइल का यह रवैया अमेरिका की लाचारी बन गया।
अमेरिका की लाचारी और इजराइल का स्टैंड
यहां तक कि जिन देशों को अमेरिका का समर्थक माना जाता था, उन्होंने भी इस सीज फायर के उल्लंघन की निंदा की। ऑस्ट्रेलिया और यूके ने भी कहा कि लेबनान को भी सीजफायर में शामिल होना चाहिए था।
ऐसा लगता है कि अमेरिका अब इजराइल के सामने पूरी तरह"लाचार और मजबूर" हो चुका है। इजराइल का स्टैंड साफ था:"हमने हिजबुल्ला को टारगेट किया और हम करते रहेंगे। हमें कोई नहीं रोक सकता।"
पिछली बार जब गाजा में हमले हो रहे थे, तब बाइडन इजराइल के सामने"लाचार" थे। इस बार, डोनाल्ड ट्रम्प भी"पीछे पछाड़ दिए गए" थे, और उनके"सभी प्रयास विफल" होते दिख रहे थे।
इजराइल ने अपने स्तर पर लेबनान को जिस तरह से"टारगेट" किया, वह 10 सूत्रीय मांगों को मानने के 10 घंटे बाद ही हो गया। इजराइल के प्रधानमंत्री ने"सार्वजनिक रूप से" कहा कि"हमने दुश्मन को बहुत नुकसान पहुंचाया है" और"हमारा हाथ अभी भी"ट्रिगर" पर ही है।"
स्टेट ऑफ हॉर्मोज पर ईरान का नियंत्रण और अमेरिका का खंडन
डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि"लेबनान सीजफायर में काउंट नहीं किया गया था।" इसके जवाब में, ईरान ने तत्काल प्रभाव से स्टेट ऑफ हॉर्मोज को"रोक दिया"।
ईरान के स्टेट मीडिया ने कहा कि"ईरान ने स्टेट ऑफ हॉर्मोज को"बंद" कर दिया है।"
जब पत्रकारों ने अमेरिकी प्रेस सेक्रेटरी लेविट से इस बारे में सवाल किया, तो वे"स्पीचलेस" दिखाई दीं। उनके जवाबों में"कोई भी"कन्विंसिंग पावर"दिखाई" नहीं दे रही थी।
अमेरिका के उपराष्ट्रपति जे डी वेंस ने एक"नया नैरेटिव" दिया। उन्होंने कहा कि ईरान की तरफ से 10 सूत्रीय मांगे"चैट जीपीटी से बनाई हुई" लग रही थीं, और जो"असली प्रपोजल" उनके पास आया, उसमें"लेबनान का जिक्र नहीं था।"
कौन है गुनहगार?
यह सवाल"खोजे जाने" की बात है कि"आखिरकार गुनहगार कौन है?"
डोनाल्ड ट्रम्प ने"न्यूयॉर्क टाइम्स" और"सीएनएन" को"फेक न्यूज़ चैनल" बताते हुए कहा कि उन्होंने"फेक 10 पॉइंट प्लान" लागू कर दिया था।
ट्रम्प ने अपने 10"पॉइंट्स" में से"लेबनान वाला" हटा दिया और"यूनाइटेड नेशन सिक्योरिटी काउंसिल" से"रेटीफाई" करने की बात कही।
लेकिन, अगर अमेरिका इस"10 पॉइंट प्लान" को मान भी लेता, तो भी"नौ पॉइंट" ऐसे थे जिनमें"अमेरिका बुरी तरह हारता हुआ" दिखता है।
कुल मिलाकर,"हटना तय नहीं हुआ" और"इजराइल का रुकना तय नहीं हुआ"। आज सुबह फिर से इजराइल द्वारा लेबनान के अंदर"बम दागे गए"।
यह"स्पष्ट" है कि इज़राइल "अनकंट्रोलेबल" है और अमेरिका की"कोई सुनवाई नहीं हो रही है।"
पाकिस्तान के"प्रयास""बिना इज़राइल" के"संभव नहीं" हैं। भले ही पाकिस्तान ने"मध्यस्थता" की हो, लेकिन जब तक"इजराइल को"ना" कहने के लिए"नहीं" बुलाया जाएगा,"इसका कोई महत्व" नहीं निकलेगा।
भविष्य में सीरिया फ़ायरर हो भी पाएगा या यह"बिल्कुल अफगानिस्तान की तरह""तालिबान की तरह" ईरान बन जाएगा? यह"खोज जाने" की बात है।