- कोलंबो डॉकयार्ड पीएलसी में भारत का निवेश: एक रणनीतिक चाल
- भारत की रणनीतिक जीत और भविष्य की संभावनाएं
हाल ही में भारत ने श्रीलंका में चीन को एक प्रकार से चुनौती पेश की है। चीन को चुनौती पेश करने का कहानी श्रीलंका से होकर क्यों निकलती है? उसके स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स से जोड़कर हम बता सकते हैं।
स्ट्रिंग ऑफ पल्स में चीन भारत को चारों तरफ से अपने बहुत सारे पोर्ट्स, अपने बहुत सारे इंगेजमेंट जो कि समुद्र के अराउंड हैं उनके थ्रू घेरने का लगातार प्रयास करता रहा है। फिर चाहे ग्वादार पोर्ट हो, चाहे जिबूती हो, फिर चाहे hambantota हो।
यहां से चीन इंडियन ओशन को चारों तरफ से अपनी पकड़ में कि चीन, भारत को कहां से स्ट्रेटेजिकली ग्रिप में ले सकता हैं। और इस काम के लिए चीन ने दुनिया के बहुत से देशों में तरह-तरह के कर्ज दिए हैं।
और ऐसे में ही श्रीलंका के बिल्कुल दक्षिण में स्थित hambantota पोर्ट को इसने 2021 में 100 साल के लिए लीज पर ले लिया। जब श्रीलंका इनका कर्ज नहीं चुका पाया।
दुनिया में डेड ट्रैप की पॉलिसी के थ्रू चाइना ने जिन पोर्ट्स को जिन कंट्रीज के जगहों को अपने कंट्रोल में लेना शुरू किया उनमें से श्रीलंका भारत के लिए बहुत इंपॉर्टेंट था। क्योंकि भारत के बिल्कुल दक्षिण में स्थित वो जगह जो कि भारत के लिए सामरिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण है।
स्ट्रैटेजिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण है भारत का चाहे ईस्टर्न कमांड हो, वेस्टर्न कमांड हो और साथ ही साथ चाहे जो ट्रेड रूट यहां से होकर गुजरता हो उन सबके लिए भारत की पकड़ को ये चुनौती देने जैसा था।
ऐसे में भारत अब लगातार श्रीलंका के साथ अपने इन रिश्तों को सुधारते हुए श्रीलंका में लगातार कोई ना कोई जगह अपनी पकड़ के रूप में बनाता चला जा रहा है। उन्हीं में से आज का अपडेट है।
भारत ने कोलंबो के अंदर कोलंबो शिप बिल्डिंग का जो काम करने वाली कंपनी है उसके 51% स्टेक को परचेस किया है। यह सरकारी कंपनी मजगांव शिप बिल्डिंग जो है उसके द्वारा श्रीलंका की सरकारी कंपनी में किया गया निवेश है।
तो ये गवर्नमेंट टू गवर्नमेंट इन्वेस्टमेंट है जो कि कोलंबो पोर्ट में जिस तरह से मुंबई के अंदर मजगांव में शिप बिल्डिंग का काम मजगांव शिप बिल्डिंग करती है ऐसे ही कोलंबो पोर्ट के अंदर कोलंबो का जो शिप बिल्डिंग है उसको करने वाली कंपनी के अंदर किया गया निवेश है।
ये काम करके भारत ने कोलंबो जो कि श्रीलंका का बहुत ही स्ट्रेटेजिकल जैसे भारत के लिए मुंबई इंपॉर्टेंट पॉइंट है। ऐसे श्रीलंका का इंपॉर्टेंट कोलंबो पोर्ट भारत ने वहां पर यह निवेश करके अपनी पकड़ को मजबूत किया है।
कोलंबो डॉकयार्ड पीएलसी में भारत का निवेश: एक रणनीतिक चाल
तो कोलंबो डॉकयार्ड पीएलसी के अंदर भारत का निवेश किस तरह से मायने रखेगा? क्या यह निवेश का तरीका है? भारत की कंपनियां इसकी वजह से क्या लाभ लेंगी? भविष्य में क्या और फायदे होंगे?
भारत का दक्षिण भाग जो है वहां पर श्रीलंका स्थित है और श्रीलंका के अंदर दक्षिण में हमंबनटोटा और उसके पश्चिम की तरफ कोलंबो पोर्ट स्थित है।
इसी श्रीलंका के हमंबनटोटा पोर्ट पर 2021 में चाइना ने पूरी तरह से 100 साल का कवर कर लिया था और भारत के लिए वो एक प्रकार की भूल साबित हुआ था।
लेकिन चाइना वालों ने इसको कर्ज में देकर इस तरह पकड़ा कि हमनटोटा इन्होंने ले लिया। हमें शुरुआत में तो यह लगा कि इन्होंने एक पोर्ट लिया है। लेकिन चीनियों ने यहां पर आकर के फिर अपने खुफिया जहाज भेजने शुरू किए जो कि स्पाई जहाज थे जिन्हें भेज के यहां से भारत के ऊपर नजर रखना शुरू किया।
तो भारत विरोधी एक्टिविटीज जब बढ़ने लगी तो भारत ने श्रीलंका को अपना विरोध व्यक्त किया कि भाई अगर चाइना का आप इस तरह से इस्तेमाल करने चाइना को इस्तेमाल अगर करने देंगे तो भारत और श्रीलंका अच्छे मित्र नहीं रह पाएंगे।
भारत कोई भी अगर सेटेलाइट परीक्षण करे, मिसाइल परीक्षण करे, सबकी जानकारी चाइना वाले यहां पर जहाज खड़ा करके निकालते रहे। भारत ने इन चीजों का विरोध किया और श्रीलंका के साथ भारत के संबंधों को हमने उस दिशा में घोला कि भाई नहीं अब आने वाले समय में हमें चाइनीस लोगों को तो श्रीलंका में रोकना ही पड़ेगा और चीन को जब जरूरत पड़ेगी तो हम खड़े होंगे।
और इसी काम को करने के लिए जो मजगांव डॉक है जो कि शिप बिल्डिंग लिमिटेड है उसने पहली बार कोई बड़ा इंटरनेशनल इन्वेस्टमेंट किया है कोलंबो डॉकयार्ड पीएलसी में जिसका उन्होंने 21 51% हिस्सा खरीद लिया।
यह असल में पिछले साल की डील है। अब ये पूरी तरह से हो चुकी है। इसमें कुल खर्च 26.8 मिलियन डॉलर का था। 249.5 करोड़ रुपए का था जो भारत के द्वारा इस्तेमाल किया गया है।
और यहां पर हम मजगांव डॉकयार्ड, सॉरी कोलंबो डॉकयार्ड, का संचालन और नियंत्रण अपने हाथ में लेंगे। यह बात पिछले साल काफी ज्यादा सुर्खियों में रही थी।
अभी 9 अप्रैल 2026 को जब ये दोबारा सुर्खियों में आई तब यहां निकल कर आई कि यहां पर हम लोगों ने एक्विजिशन का काम पूरा कर दिया है और बोर्ड रिकंस्टीट्यूट हुआ है।
बोर्ड रिकंस्टीट्यूट हुआ है मतलब अब हमारा काम जब वहां शुरू हो चुका है तो वहां पर भारत की तरफ से अपने लोग नियुक्त किए गए हैं क्योंकि 51% हिस्सेदारी हम उसके अंदर ले चुके हैं। तो हम लोग यह काम जो कर रहे हैं वो मजगांव हमारी जो कंपनी है मजगांव डॉक उसके थ्रू कर रहे हैं।
मजगांव डॉप शिप बिल्डिंग लिमिटेड के थ्रू जो भारत की नवरत्न कंपनी है। नवरत्न कंपनी भारत सरकार की, जिसमें 80% से अधिक हिस्सेदारी है, उसका निवेश है ये।
तो ऐसे में भारत मैरिटाइम अमृतकाल विज़न 2047 को ध्यान में रखते हुए इस काम को करने गया है। और कहा जाए तो कोलंबो पोर्ट के लिए भी यह अपने आप में 52 साल का एक बहुत बड़ा कॉन्ट्रैक्ट है। इससे बड़ा कॉन्ट्रैक्ट इन्होंने लंबे समय से नहीं किया है।
तो ये अपने आप में एक बहुत बड़ी चीज है कि अब कोलंबो का जो शिप बिल्डिंग काम है वो भारत के अंडर कंट्रोल में होगा। यानी कि भारत की एक कंपनी (मचगांव शिप बिल्डिंग) उसको पूरी तरह से लीड करेगी।
कौन है मचगांव डॉक शिप बिल्डिंग? तो ये भारत सरकार की रक्षा मंत्रालय के अधीन की एक पीएसयू है। यानी कि डिफेंस में काम करने वाला पब्लिक सेक्टर अंडरटेिंग है जिसका काम भारत के लिए पनडुब्बियां, डिस्ट्रयर्स, जहाज बनाना ये सब है।
तो एक बार मतलब भारत की कई सारी पनडुब्बियां इसने बनाकर भारत को दी हैं। मतलब पानी के अंदर चलने वाली जो जहाज हैं वो और पानी के ऊपर तैरने वाले जो जहाज हैं वो बड़ी मात्रा में इसने भारत को बना करके अब तक उपलब्ध कराए हैं।
फिलहाल 11 पनडुब्बियों और 10 युद्धपोतों बनाने की एक साथ क्षमता यह रखता है।
जहाज रिपेयर, जहाज का पुनर्निर्माण, कुछ जहाजों को तोड़ना, उनसे मतलब उनके जो निकले हुए मेटल्स हैं, उनको निकालना। ये सब काम इस तरह के डॉकयार्ड्स के अंदर होते हैं।
तो आप यहां पर जहाजों को सर्विस इस तरह से समझिए जैसे बस का एक सर्विस स्टेशन होता है। तो ये कोलंबो पोर्ट का सर्विस स्टेशन है जिसको कोलंबो शिपयार्ड करता है। अब वो भारत की कंपनी करेगी।
अडानी की तरफ से यहां पर 2021 में इन्वेस्टमेंट किया जा चुका है। लेकिन अब हमने सर्विस सेंटर को समझिए कि एक प्रकार का वहां पर इन्वेस्टमेंट कर दिया है।
ये काफी पुराना कमर्शियल यारार्ड है जिसमें चार ग्रेविंग डॉकयार्ड हैं। 12,25,000 डेढ़ वेट टन तक के जहाजों को संभालने की इसमें क्षमता है। यानी कि यहां पर जहाज तुड़ाई का कार्यक्रम भी हो सकता है।
इसके अधिग्रह की प्रक्रिया को हमने लंबे समय से पूरा किया और इसकी इंटरेस्टिंग बात है कि भारत ने श्रीलंका के कहने पर ये किया। हम आगे से नहीं गए कि हमें ये जगह चाहिए। हमने उनको उन्होंने हमें डिमांड करी।
असल में इस जगह पर पहले से एक जापानी कंपनी काम कर रही थी जिसका नाम था ओनोमीथी डॉकयार्ड। वो 1993 से काम कर रही थी, लेकिन वो घाटे में चली गई। श्रीलंका सरकार को विदेशी निवेश चाहिए था।
तो उन्होंने भारत से आग्रह किया कि साहब ऐसे ऐसे एक जगह है अगर आप चाहे तो इन्वेस्टमेंट कर सकते हैं। तब जाकर भारत 2025 में यहां इन्वेस्टमेंट के लिए पहुंचा था। ये भारत का कोई अधिग्रह नहीं है।
भारत की मित्रता के साथ-साथ भारत ने मतलब अधिग्रह तो ऑब्वियसली 51% हिस्सा हमारे पास आ गया। लेकिन हमने कोई प्रेशराइज नहीं किया उन्हें। उनकी जरूरत थी। हम लोग पहुंचे।
इस बात को विक्रम मस्त्री जी ने हाल ही में अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी रखा कि हमने इसे एक तरह से पार्टनरशिप के रूप में आगे बढ़ाया है।
तो अब उम्मीद है कि आपको कोलंबो पोर्ट का महत्व समझ में आ गया होगा क्योंकि 60% जहां से ट्रांस शिपमेंट कार्गो जाते हो वहां का सर्विस सेंटर आपके पास है और भी चाहे श्रीलंका के पास पोर्ट्स हैं जैसे हमनटोटा पोर्ट है, गाले पोर्ट है, ऑलवेयर है, त्रिम त्रिनकोमाली है।
त्रिनकोमाली भी काफी स्ट्रेटेजिकल इंपॉर्टेंट है। और उसके ऊपर भी हाल ही में बात चल रही है। जहां तक बात हो भारत और चीन की तो जब से हमंबनटोटा चाइना ने कर कवर किया है भारत कोलंबो में अपनी पहचान बनाने के लिए लगातार मेहनत कर रहा था।
क्योंकि चीन अगर बहुत तेजी से यहां फैलता गया तो श्रीलंका भारत के लिए काफी चिंता का विषय बन जाएगा। भारत खुद मानता है कि वर्ष 2000 के दशक में हमने हमटोटा प्रोजेक्ट को जाने दिया था।
अगर हम वहां पर सही समय पर एक्टिव हुए होते श्रीलंका को लोन देने में तो हो सकता है ये जगह हमारे पास होती। चाइना के पास नहीं होती। बट ठीक है। अब यह जगह चाइना के पास हमनटोटा पोर्ट तो है जो उसने मात्र 1.12 बिलियन डॉलर के अंदर ही 100 साल की लीज पर ले लिया है।
अब 100 साल के लिए वो जगह है। भारत की पकड़ बहुत मजबूत थी लेकिन वो हल्की लीज हुई। उसके बाद में हमने फिर ध्यान देना शुरू किया और यही काम है कि 2021 में हमने जो कोलंबो पोर्ट का वेस्टर्न टर्मिनल है उसका विकास भी अपने हाथ में लिया।
कोलंबो पोर्ट पर भी चीन का इन्वेस्टमेंट हो रहा है। जहां पर जहाज आकर रुकते हैं, ट्रांसशिपमेंट होते हैं, वहां पर भी चीनी निवेश है। लेकिन फिर हमारी कंपनी अडानी की तरफ से यहां पर यह काम किया गया और हमने यहां पर मतलब अगर आप देखें तो यहां पे काफी सारे पोर्ट कंटेनर पोर्ट्स बने हुए हैं।
उनमें से एक पोर्ट पर वेस्ट वाले क्षेत्र पर भारत की कंपनी का कंट्रोल फिलहाल बना हुआ है। तो उम्मीद है कि आप लोगों को यह बात समझ में आई होगी।
भारत की रणनीतिक जीत और भविष्य की संभावनाएं
अब बात करते हैं मजगांव डॉग का ये जो काम है यह भारत के लिए महत्वपूर्ण कैसे है? ये सामरिक रूप से तो महत्वपूर्ण है ही, स्ट्रेटेजिकल रूप से हमारी कंपनियों के स्टॉक में ये बहुत पॉजिटिव पॉइंट निकालता है।
एज एन इन्वेस्टर जब भी आप देखते हैं कि आप कोई ऐसी जगह रीच कर रहे हैं जो भविष्य में आपको और ग्रो कराएगी तो वो इन्वेस्टर को पॉजिटिव सेंटीमेंट देती है और वो पॉजिटिव सेंटीमेंट इन दिनों डिफेंस के स्टॉक्स में चल ही रहा है।
मजगांव डॉक आज भी उठा हुआ था और जब से ये वॉर चल रहा है, आप उसके स्टॉक्स को उठा हुआ देख ही रहे हैं। रोज आपको यहां पर परसेंटेज बढ़ा हुआ दिखाई दे रहा है। 1 महीने के अंदर 12.64% इसका स्टॉक बढ़ा है।
तो स्टॉक ऑलरेडी अच्छा परफॉर्म कर रहा है और इस सूचना ने उसके अंदर एक पॉजिटिविटी ऐड की है। ठीक है? भारत की यह कंपनी जो कि नवरत्न कंपनी है। ये भारत के बाहर पहली बार काम करने गई है और ऐसे में और अपॉर्चुनिटीज मिलेंगी।
काम बढ़ेगा तो इसके साथ-साथ सकारात्मकता और जुड़ती चली जाएगी। तो ये था इस कंपनी का पूरा ओवरव्यू। लेकिन इन सबसे ऊपर सेल और बाय करना आपका अपना निर्णय है। मैंने आपको एक न्यूज़ बताया। न्यूज़ के वजह से होने वाले प्रभाव बताएं। आप अपनी रिसर्च स्वयं करें और निवेश करें।