- अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता परमाणु तनाव
- यूरेनियम को 'चोरी' करने की तैयारी और ट्रंप की योजना
- इशफहान शहर पर हमला और 'मदर ऑफ ऑल बम' का खौफ
दुनिया एक बहुत ही गंभीर विषय पर चिंतन कर रही है। पिछले कुछ दिनों से न्यूक्लियर हमले जैसी सुगबुगाहट तेज हो गई है।
कुवैत के नेशनल गार्ड्स ने पहले ही अपनी जनता को आश्वस्त किया है कि किसी भी संभावित हमले की स्थिति में वे सुरक्षित रहेंगे। अब इस स्थिति को और अधिक बल मिलता दिख रहा है।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता परमाणु तनाव
चर्चा है कि अमेरिका अपने सैनिकों को ईरान में उतारने की तैयारी में जुट गया है। इसके जवाब में ईरान ने यूएई (UAE) को सीधी धमकी दी है।
ईरान का कहना है कि वह यूएई के एनर्जी ठिकानों और उनके न्यूक्लियर रिएक्टर साइट्स को निशाना बना सकता है। धीरे-धीरे पश्चिमी एशिया में एक नई खलबली सुनने को मिल रही है।
इसी बीच यूनाइटेड नेशंस (UN) के एक ऑफिशियल ने अपना पद छोड़ दिया है। उन्होंने दावा किया है कि उन्हें भविष्य में होने वाले न्यूक्लियर हमले की सुगबुगाहट सुनाई दे गई है।
खबरें आ रही हैं कि ईरान पर न्यूक्लियर स्ट्राइक की तैयारी हो रही है। इस चर्चा के केंद्र में ईरान में रखा हुआ 'न्यूक्लियर एनरच्ड यूरेनियम' है।
यूरेनियम को 'चोरी' करने की तैयारी और ट्रंप की योजना
खबर है कि डोनाल्ड ट्रंप ईरान से उस एनरच्ड यूरेनियम को छीनने या 'चोरी' करने की योजना बना रहे हैं। जैसे वेनेजुएला से निकोलस मादुरो के मामले में हुआ था, वैसी ही तैयारी यहाँ दिख रही है।
अगर यह यूरेनियम किसी हमले का निशाना बन गया, तो भीषण हादसा हो सकता है। हालात ऐसे बन गए हैं कि अगर ईरान नहीं रुकता, तो अमेरिका 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' को खाली कराने के लिए कड़े कदम उठाएगा।
इन एक्सट्रीम ऑप्शन्स में 'खर्ग आइलैंड' पर कब्जा करना शामिल है। दूसरा विकल्प ईरान पर कोई बड़ा हमला प्लान करना है, जिसमें न्यूक्लियर हादसे की भी संभावना है।
इशफहान शहर पर हमला और 'मदर ऑफ ऑल बम' का खौफ
अमेरिका ईरान के इशफहान (Isfahan) शहर में रखे हुए एनरच्ड यूरेनियम को निकालने की तैयारी में है। 31 मार्च की सुबह 4:56 बजे आरटी (RT) ने एक महत्वपूर्ण जानकारी साझा की।
रूस के अनुसार, इशफहान शहर में एक बहुत बड़ा हमला हुआ है। ट्रंप ने अपने 'ट्रुथ सोशल' पर इस हमले की तस्वीर लगाकर बड़े संकेत दिए हैं।
माना जा रहा है कि अमेरिका ने बी-2 बॉम्बर (B-2 Bomber) से एक बड़ा 'बंकर बस्टर बम' चलाया है। इसे 'मदर ऑफ ऑल बम' के बाद दूसरा सबसे घातक हथियार माना जाता है।
इशफहान ईरान के बिल्कुल मध्य में स्थित है। यहाँ ईरान ने अपना सारा असलहा, मिसाइलें और एनरच्ड यूरेनियम छुपाकर रखा है।
ईरान फोरदो (Fordow), नातांज (Natanz) और इशफहान (Isfahan) में अपने न्यूक्लियर एनरचमेंट प्रोग्राम चलाता है। ये सारे काम जमीन के नीचे बनी गहरी टनल्स में होते हैं।
250 फीट गहरी सुरंगें और सेंट्रीफ्यूगल मशीनें
अमेरिका की खुफिया एजेंसियों का मानना है कि ईरान ने जमीन के नीचे 250 फीट तक गहरी सुरंगें बनाई हैं। इन्हीं सुरंगों में सेंट्रीफ्यूगल मशीनें लगाकर यूरेनियम को एनरच किया जा रहा है।
आज सुबह इशफहान से जो तस्वीरें आई हैं, वे काफी डरावनी हैं। अमेरिका लंबे समय से इस तरह के हमले की तैयारी कर रहा था ताकि इन गहरी सुरंगों को नष्ट किया जा सके।
ट्रंप चाहते हैं कि एक मिलिट्री ऑपरेशन के जरिए ईरान के यूरेनियम को वापस लाया जाए। अपडेट यह है कि ईरान के पास लगभग 400 किलोग्राम एनरच्ड यूरेनियम है।
इस यूरेनियम को लाने के लिए अमेरिका ईरान में अपने पैदल सैनिक उतार सकता है। खबर है कि 10,000 अतिरिक्त सैनिक भेजने की तैयारी चल रही है।
क्या है यूरेनियम एनरचमेंट और क्यों है यह खतरनाक?
अमेरिका का मुख्य उद्देश्य है कि ईरान परमाणु बम न बना पाए। कहा जाता है कि एक फुटबॉल के आकार का न्यूक्लियर बम 10 लाख की आबादी को खत्म करने के लिए काफी है।
यूरेनियम एक रेडियोएक्टिव पदार्थ है जिससे अल्फा, बीटा और गामा विकिरणें निकलती हैं। पीरियोडिक टेबल में इसका एटॉमिक नंबर 92 है।
यूरेनियम मुख्य रूप से यूरेनियम-238 (U-238) के रूप में पाया जाता है। लेकिन परमाणु बम बनाने के लिए यूरेनियम-235 (U-235) की जरूरत होती है।
खदानों से इसे 'पिच ब्लैंड' के रूप में निकाला जाता है। 100 किलो यूरेनियम में U-235 की मात्रा 1% से भी कम होती है।
वेपन ग्रेड यूरेनियम और 90% शुद्धता का गणित
यूरेनियम एनरचमेंट के लिए बड़ी-बड़ी सेंट्रीफ्यूगल मशीनों का उपयोग किया जाता है। जब यूरेनियम की शुद्धता 90% से अधिक हो जाती है, तो वह 'वेपन ग्रेड' बन जाता है।
वर्तमान में ईरान के पास मौजूद यूरेनियम की प्योरिटी 60% बताई जा रही है। अगर यह 90% पार कर गई, तो परमाणु बम बनाना आसान हो जाएगा।
न्यूक्लियर पावर प्लांट के लिए केवल 3-5% एनरच्ड यूरेनियम की जरूरत होती है। 20% तक इसे हाई लेवल एनरच्ड यूरेनियम माना जाता है, लेकिन यह हथियार बनाने के लिए काफी नहीं है।
ईरान 2018 में अमेरिका के परमाणु समझौते से बाहर आने के बाद से तेजी से स्टॉक बढ़ा रहा है। ईरान के पूर्व राष्ट्रपति अहमदीनेजाद की तस्वीरें भी इन मशीनों के साथ देखी गई थीं।
जून 2025 की स्ट्राइक और मलबे में दबा यूरेनियम
ट्रंप ने पहले भी दावा किया था कि उन्होंने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को नष्ट कर दिया है। जून 2025 में बी-2 बॉम्बर्स के जरिए भारी हमला किया गया था।
उस समय 13,600 किलोग्राम के बमों का इस्तेमाल हुआ था जो 200 फीट की गहराई तक जा सकते थे। लेकिन हालिया खबरों के अनुसार, ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम पूरी तरह खत्म नहीं हुआ था।
ईरान का दावा है कि 400 किलोग्राम यूरेनियम उस मलबे में दब गया है जो अमेरिकी हमले के बाद बना था। इस वजह से ईरान न तो बम बना पा रहा है और न ही यूरेनियम बाहर निकाल पा रहा है।
अब अमेरिका की योजना इसी मलबे से वह 400-460 किलोग्राम यूरेनियम ढूंढकर निकालने की है। इसके लिए 30 अप्रैल तक सेना उतारे जाने की संभावना जताई जा रही है।
संयुक्त राष्ट्र में इस्तीफा और परमाणु तबाही का डर
ईरान ने धमकी दी है कि अगर अमेरिकी सैनिक उसकी जमीन पर आए, तो वह भीषण पलटवार करेगा। रूस ने भी अमेरिका के इस प्लान का विरोध किया है।
सबसे चौंकाने वाली खबर यूएन के अधिकारी मोहम्मद सफा का इस्तीफा है। उन्होंने आरोप लगाया है कि यूएन के कुछ वरिष्ठ अधिकारी एक शक्तिशाली लॉबी के लिए काम कर रहे हैं।
मोहम्मद सफा ने कहा कि वे उस जगह का हिस्सा नहीं बन सकते जहाँ परमाणु हमले की तैयारी हो रही हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि दुनिया इस समय न्यूक्लियर रिस्क के उच्चतम स्तर पर है।
WHO के अधिकारियों ने भी चेतावनी दी है कि यह तनाव एक परमाणु तबाही की ओर बढ़ रहा है। पश्चिम एशिया की 1 करोड़ से ज्यादा आबादी पर इसका सीधा खतरा मंडरा रहा है।
ट्रंप की 'मैडम थ्योरी' और अनिश्चित भविष्य
ट्रंप के बयानों और कार्रवाई में विरोधाभास दिख रहा है। एक तरफ सीजफायर की बात होती है, तो दूसरी तरफ सुबह-सुबह बमबारी कर दी जाती है।
इसी अविश्वास के कारण 'मैडम थ्योरी' की चर्चा हो रही है कि वे कहते कुछ हैं और करते कुछ और हैं। फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें 30 अप्रैल की डेडलाइन और ईरान के अगले कदम पर टिकी हैं।
ईरान को सबक सिखाने की अमेरिका की यह प्लानिंग क्या सफल होगी? क्या 400 किलोग्राम यूरेनियम को सुरक्षित निकाला जा सकेगा या यह एक बड़ी रेडियोएक्टिव दुर्घटना में बदल जाएगा?
युद्ध की यह सुगबुगाहट अब केवल धमकियों तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीन पर धमाकों के रूप में दिखने लगी है। आने वाले दिन पूरी दुनिया के लिए बहुत ही नाजुक होने वाले हैं।