- हाइ-एंड टेक्नोलॉजी और विजुअल का कमाल
- ब्रॉडकास्टिंग और डेटा ट्रांसमिशन का जाल
- थर्ड अंपायर और डिसीजन मेकिंग टेक्नोलॉजी
दोस्तों आईपीएल शुरू होने वाला है पर आपने कभी सोचा है कि एग्जैक्टली में जो आईपीएल का क्रिकेट मैच होता है ना वो आपके टेलीविज़न स्क्रीन और मोबाइल फोन स्क्रीन पर कैसे आता है। यह पूरी प्रक्रिया इतनी जटिल और तकनीकी रूप से उन्नत है कि आप इसकी कल्पना भी नहीं कर सकते।
सबसे पहले बात करते हैं यार आईपीएल के अंदर क्या लगता है आप लोगों को एक टाइम पे कितने कैमरास यूज़ किए जाते हैं। यहाँ पर बात की जाए तो कैमरा फ्लिट होता है 44 कैमरास का और ये कोई नॉर्मल यहाँ पे कैमरास आपको देखने को नहीं मिलते।
अगर मैं आप लोगों से बात करूं जो कैमरास होते हैं Sony कंपनी और ग्रास वैली कंपनी के होते हैं जो कि बहुत ही ज्यादा हाई एंड कैमरास होते हैं। इनका जो मैक्सिमम रेज़ोल्यूशन 4K तक जा सकता है।
इवन कुछ कैमरा 1080p के भी यूज़ किए जाते हैं। जैसे स्टंप के अंदर जो कैमरा होता है वो यहाँ तक की बात करें तो यहाँ पे 1080p के 1000 से लेके 2000 fps के स्लो मोशन कैमरास को भी यूज़ किया जाता है।
हाइ-एंड टेक्नोलॉजी और विजुअल का कमाल
आपको अल्ट्रा वाइड एंगल लेंस और टेलीफोटो ज़ूम लेंस एक ही कैमरे में देखने को मिलता है। यानी कि वेरिएबल के साथ यानी कि एक ही कैमरा आपको जो रहता है ना ग्राउंड का अल्ट्रा वाइड व्यू शॉट भी दे देगा।
और उसी कैमरे से आप ऑडियंस में बैठे लोगों का यहाँ पे आप क्लोज अप शॉट भी ले सकते हो। तो इस तरीके से यूज़ किया जाता है। लेकिन 44 कैमरा को एक साथ डायरेक्टली यहाँ पर यूज़ किया जाता है।
इसके साथ ही बात करें तो ऑब्वियसली आज के समय में एक बग्गी कैम भी देखने को मिलता है जो ग्राउंड के चारों तरफ यहाँ पे काम करता है। यह कैमरा ज़मीन के करीब रहकर खिलाड़ियों की भागदौड़ को कैप्चर करता है।
और अगर आप लोगों ने रिसेंटली अगर T20 वर्ल्ड कप देखा होगा तो उसके अंदर यहाँ पे बग्गी कैंप के अंदर Google Pixel फोन को भी यूज़ किया गया था। जिसका नॉर्मल एचडीआर क्वालिटी का वीडियो आउटपुट ये लोग निकालते थे।
उसके अंदर यह लिखते थे स्ट्रीमिंग वाया पिक्सल फोन यानी कि उससे सिर्फ वीडियो क्वालिटी को निकाला जा रहा है। जैसे कि एक नॉर्मली अगर आप किसी भी फोन को अगर आप USB से कनेक्ट करके उससे अगर आप वीडियो निकालना चाहे तो उसी तरीके से निकाला जाता है।
लेकिन उसके बाद यहाँ पे पोस्ट प्रोसेसिंग भी की जाती थी। इसके अलावा बात की जाए तो यहाँ पर आपको एक स्पाइडर कैम भी देखने को मिलता है जो यहाँ पे कनेक्टेड रहता है मल्टीपल वायर्स के थ्रू।
उसके अंदर सेंसर्स लगे रहते हैं और उसको एक ऑपरेटर हर जगह से कंट्रोल करता है तो उसका भी यूज़ किया जाता है। यह कैमरा हवा में तैरते हुए हमें वो एंगल दिखाता है जो सामान्य कैमरों से मुमकिन नहीं है।
अगर हम लोग बात करें तो नॉर्मली एचडीआर पिक्चर क्वालिटी या फिर एचएलजी क्वालिटी में इस चीज को निकाला जाता है और यहाँ से जो रॉ डाटा होता है ना वही निकाला जाता है आपका।
ब्रॉडकास्टिंग और डेटा ट्रांसमिशन का जाल
यह रॉ डेटा डायरेक्टली फिर इनके सर्वर्स के अंदर जाता है जहाँ पे इसके अंदर पिक्चर क्वालिटी के अंदर ग्रेडिंग वगैरह की जाती है क्योंकि अगर आप लोगों को नहीं मालूम था तो आईपीएल का जो ब्रॉडकास्ट और ट्रांसमिशन होता है ना वो आपका 4K एचडीआर क्वालिटी में होता है।
यानी कि अगर हम लोग Jio या Hotstar पे बात करें तो आप उसे 4K Dolby Vision इवन Dolby Atmos ऑडियो के साथ सुन सकते हैं। और स्टार स्पोर्ट्स के अंदर बात करें तो आप इसे 4K वीडियो क्वालिटी के अंदर यहाँ पे एन्जॉय कर सकते हैं।
और अगर आप लोग सोच रहे हो कि इतनी ज्यादा टेक्नोलॉजिकल चीजें यहाँ पे कैसे इंप्लीमेंट की गई तो आपको बता देता हूं। सिर्फ 44 कैमरास ही काफी नहीं। यहाँ पे लगभग 60 माइक्रोफ़ोन्सस को भी यूज किया जाता है।
एक डॉलबी ऑडियो का रूम यहाँ पे डेडिकेटेडली कई बार स्टेडियम के अंदर या फिर एक जो पीसीआर जो प्रोडक्शन कंट्रोल रूम रहता है वहाँ पे सेटअप किया जाता है। यहाँ साउंड की बारीकियों पर काम होता है।
जहाँ पे एक आदमी अलग-अलग ऑडियो को लेता है और उनको मिक्स करके एटमॉस साउंड या फिर सराउंड साउंड का सेटअप क्रिएट करता है और यह 5.1.4 सेटअप के अंदर क्रिएट किया जाता है।
यस मल्टीपल चैनल से ऑडियो लिया जाता है। इसके अलावा मल्टीपल कमेंट्री चैनल्स होते हैं उनको भी लिया जाता है ताकि आप रियल टाइम में कमेंट्री को भी एडजस्ट कर सको और मल्टीपल लाइफ फीड को भी किया जाता है।
थर्ड अंपायर और डिसीजन मेकिंग टेक्नोलॉजी
सबसे बड़ी बात है कि ये चीज बहुत ही ज्यादा चुटकी बजाते की जाती है लेकिन देखा तो सिर्फ टेक्नोलॉजी का सिर्फ इतना ही इंटीग्रेशन नहीं हुआ है। इसके अलावा कई सारी चीजें हुई है।
सबसे पहले बात करते हैं यहाँ पे आपके हॉक आई (Hawk-Eye) और बॉल ट्रैकिंग की। यार कभी भी LBW होते या डीआरएस लिया जाता है। उसके लिए सबसे इंपॉर्टेंट चीज़ रहती है बॉल को ट्रैक करना।
एग्जैक्टली में जो बॉल का प्रोजेक्टाइल मोशन है वह कैसे किया जाता है और मल्टीपल कैमरास यहाँ पे इंप्लीमेंट किए जाते हैं बॉल की लोकेशन को ट्रैक करने के लिए। इसके पीछे भारी कैलकुलेशन होती है।
इवन रेडार जैसा सिस्टम जिसे हम लाइडर (LiDAR) जैसा कहते हैं वो भी ट्रैक करने के लिए रखा जाता है ताकि बॉल का एग्जैक्टली मोशन क्या है और स्टंप में जाके लगी है कि नहीं।
इवन, आप लोगों को बता देता हूँ, यहाँ पे आपने अल्ट्रा एज (Ultra-Edge) का भी नाम सुना होगा। यह देखने के लिए कई बार जो एलबीडब्ल्यू होता है यहाँ पे जो पैड रहता है उसके ऊपर बॉल स्टक करती है कि नहीं।
यहाँ अल्ट्रा एज जिसे हम लोग एक हाई क्वालिटी माइक्रोफोन रहते हैं जिसे स्टंप के पास एलोकेट किया जाता है और एक खास बात है कि दोनों स्टंप्स में होता है। यह आवाज़ की फ्रीक्वेंसी को पकड़ता है।
यहाँ पे एकदम से जब भी बॉल आपकी पैड या बैट से टच होती है ना तो उसकी जो ऑडियो रहता है वो एकदम से पिक कर सके क्योंकि अगर आप कभी भी लाइव क्रिकेट मैच देखने जाओ ना वो बहुत सारा शोर होता है।
एग्जैक्टली में जो आवाज रहती है उसे पता लगाना बहुत इम्पॉर्टेंट चीज रहती है तो उसका भी यूज़ किया जाता है। पर इवन कुछ मैचेस तो ऐसे भी रहते हैं जहाँ पे एक मिलिट्री ग्रेड के इंफ्रारेड कैमरा को भी यूज किया जाता है।
जिससे पता चलता कि बॉल का इम्पैक्ट आपके पैड पर आया कि बैट पर आया है और उस चीज को यहाँ पे हॉट स्पॉट कहते हैं। हॉट स्पॉट तकनीक से किसी भी तरह की धोखाधड़ी की गुंजाइश नहीं रहती।
पीसीआर रूम और इंस्टेंट रिप्ले का दबाव
औहाँ, इसी के साथ ही बात करें तो इंस्टेंट रिप्ले बहुत ही ज्यादा फास्ट होते हैं। अगर हम लोग बात करें तो यह बहुत ही हैवी डाटा रहता है और उनका जो कंट्रोल रूम रहता है ना वहाँ पे सारी चीजें बहुत ही ज्यादा इंटेंस होती है।
वहाँ पे मल्टीपल लेवल पर डायरेक्टर्स बैठते हैं और यह डिसाइड करते हैं कि एग्जैक्टली कब कौन सी चीज आपकी स्क्रीन पर दिखानी है। एक गलत बटन और करोड़ों लोगों का अनुभव खराब हो सकता है।
और हां एक एक्शन रीप्ले दिखाने में इन्हें 5 से 10 सेकंड लगता है। यानी कोई भी चीज अगर एक बार में हो गई तो 10 सेकंड के अंदर-अंदर उसका एक्शन रीप्ले की क्लिप यहाँ पे तैयार कर दी जाती है।
ये चीजें बहुत ही ज्यादा फास्ट होती हैं। और सबसे बड़ी बात है कि सारी की सारी चीजें 4K वीडियो क्वालिटी के अंदर जा रही है। डेटा का यह प्रवाह अविश्वसनीय रूप से तेज़ होता है।
और एक बात बताऊं, आप लोगों को यहाँ पे स्टेडियम से जो मैच होता है ना, सीधी ट्रांसमिशन बताऊं, कैसे रहता है? यहाँ पे दो ऑप्टिकल फाइबर की लाइनें रहती है जिसके अंदर 12 Gbps के अंदर आपके इन्फॉर्मेशन को ट्रांसमिट किया जाता है।
ताकि इनके जो मल्टीपल सर्वर्स हैं, वहाँ तक पहुँचाया जा सके। जैसे Jio, Hotstar या स्टार स्पोर्ट्स के। इवन बात की जाए तो कई फॉरेन कंपनीज़ रहती है ब्रॉडकास्ट वाली उन तक भी इस इंफॉर्मेशन को पहुंचाया जाता है।
और अगर फाइबर ऑप्टिकल लाइन में कोई प्रॉब्लम आ गई तो एक सेटेलाइट लिंक को भी स्पेशली इस्टैब्लिश किया जाता है ताकि ट्रांसमिशन करने में कोई दिक्कत नहीं है। बैकअप हमेशा तैयार रहता है।
4K, 50FPS और व्यूअरशिप का रिकॉर्ड
अगर हम लोग बात करें तो आईपीएल का मैक्सिमम ट्रांसमिशन एक्सपेक्ट किया जाता है यहाँ पे 4K एचडीआर एट 50fps पे। हालांकि इंडिया में 50 fps पे अभी नहीं देख पाते।
मेजॉरिटी जो ट्रांसमिशन रहता है वो होता है आमतौर पे 24 FPS और 50 FPS में। वहीं बात करें वेरिएबल बिटरेट और वेरिएबल रेज़ोल्यूशन में रहते हैं और ये सारी की सारी चीजें चुटकी बजाते होती हैं।
यानी कि 480p से लेकर 4K तक 4K HDR 10 भी देखने को मिलेगा, आपको यहाँ तक कि आपको 4K Dolby Vision रहेगा और इवन प्रॉपर Dolby Vision का रूम रहता है जहाँ पे रियल टाइम में कलर करेक्शन किया जाता है।
वहाँ Dolby Vision प्रोफाइल को इंटीग्रेट किया जाता है ताकि अगर कोई HDR में देखे तो ब्राइटनेस और क्लेरिटी उसकी काफी अच्छी आपको देखने को मिले। यह विज़ुअल एक्सपीरियंस को नेक्स्ट लेवल पर ले जाता है।
हालांकि एक बात कई लोगों ने यहाँ पे बताई है कि यहाँ पे जब भी लाइव मैचेस देखे जाते हैं तो कई बार क्वालिटी काफी ज्यादा वेरिएबल कर जाती है। वो सिर्फ इसलिए क्योंकि सर्वर पे कई बार ज्यादा लोड पड़ जाता है।
सर्वपर पर लोड कितना पड़ता है? आखिर में T20 वर्ल्ड कप के बारे में बात करें तो एट द पॉइंट यहाँ पे मैक्सिमम व्यूअरशिप गई थी एक टाइम पे 6.5 करोड़। यानी कि 6.5 करोड़ लोग एक साथ लाइव देख रहे थे।
हालांकि लाइव व्यूअरशिप काउंटर को लेकर भी एक बदलाव हुआ है। अब यह टोटल व्यूअरशिप को बताता है। यानी कि एक बार में कितने लोग लाइव देख रहे हैं वो कॉनकरेंट हो गई और जो लोग बीच में छोड़कर वापस आए वो भी जुड़ते हैं।
इस वजह से जो नंबर रहता है, ना मैच की शुरुआत से एंड तक बढ़ता ही रहता है, गिरता नहीं है। इससे पहले लाइव व्यूअरशिप को बताया जाता था जिस वजह से नंबर ऊपर नीचे फ्लक्चुएट यहाँ पे करते थे।
आमतौर पे जो बिटरेट रहता है वो 10 टू 15 Mbps रहता है। और हां अगर इसको अगर इनक्रीस करना पड़ेगा तो 25 टू 30 Mbps ले जाना पड़ेगा अगर इन्हें 50fps के अंदर स्मूथली ब्रॉडकास्ट करना है।
मेरी नजर में 50fps स्पोर्ट्स को देखने के लिए काफी सूटेबल फ्रेम रेट यहाँ पे रहता है। 4K में तो करते हैं लेकिन रेज़ोल्यूशन या बिटरेट के कई बार ऊपर नीचे होने से क्वालिटी थोड़ी सैक्रिफाइस हो जाती है।
भविष्य की तकनीक और क्रिकेट का इवोल्यूशन
हालांकि एक चीज जो अब क्रैक कर ली गई है, वो है डिले (Delay)। कुछ साल पहले तक ऑनलाइन मैच में कम से कम 30 सेकंड से लेकर 1 मिनट का डिले आता था। आज के समय में यह डिले 5 से 15 सेकंड का हो गया है।
मैक्सिमम से मैक्सिमम देखा जाए तो कई केसेस में बस आपको एक बॉल का डिले देखने को मिलता है। यानी कि एक बॉल जो स्टेडियम में कराई जा रही है उसका अगर आप स्क्रीन पे देखेंगे तो उसको आने में बस कुछ सेकंड्स लगते हैं।
ये सारे काम बहुत ज्यादा टेक्निकल होते हैं। प्रोडक्शन कंट्रोल रूम यानी PCR रूम के अंदर डायरेक्टर या बाकी लोग काम करते हैं। जहाँ स्टेडियम छोटे होते हैं, वहाँ अलग से PCR वेंस को सेटअप किया जाता है।
क्रिकेट मैच से जो ट्रांसमिशन निकलता है इंटरनेशनल मैचेस में उसे ICC हैंडल करती है और टूर्नामेंट्स जैसे आईपीएल में इसे BCCI हैंडल करती है और उसके बाद ये थर्ड पार्टी को फीड प्रोवाइड करते हैं।
इसके बाद अलग से ग्राफिक्स डालना, ओवरलेज़ डालना, कई सारी चीजों को इंटीग्रेट करना यहाँ पर इनके हाथ में रहता है।एनिमेशन वगैरह भी ये लोग अपने एंड से यहाँ पर डालते हैं।
क्रिकेट बॉल का साइज काफी ज्यादा छोटा होता है, इस वजह से 3D ट्रैकिंग भी यहाँ पे क्रिकेट स्टेडियम के अंदर उन्हें करनी पड़ती है। इससे कौन सा प्लेयर कहाँ है, उन्हें यह भी पता रहता है।
फास्ट बॉलर अगर 150 की स्पीड पे बॉल फेंके तो उसे ट्रैक करने के लिए ऑटोमेटेड रोबोटिक कंट्रोल सिस्टम्स का यूज़ किया जाता है। यह बॉल के मूवमेंट को ऑटोमैटिकली फॉलो करता है।
आज के समय में हम दूरदर्शन के दौर से निकलकर 4K, HDR और Dolby Vision तक पहुँच गए हैं। यह क्रिकेट फैंस के लिए एक बेहतरीन सफर रहा है और आगे भी इसमें और सुधार देखने को मिलेंगे।