- टॉपर्स का रहस्यमयी गायब होना: आखिर सच क्या है?
- AIR 1 की संदिग्ध कहानी: 15 नंबर से 90 तक का सफर
- एआई (AI) और परीक्षा हॉल की धांधली
क्या कभी आपने ऐसे किसी एग्जाम के बारे में सुना है, जिस एग्जाम के टॉपर गायब हो जाए? सवाल सीधा IIT Guwahati से है कि आखिर इस बार की परीक्षा में ऐसा क्या हुआ कि परिणाम आने के बाद जश्न के बजाय सन्नाटा पसरा हुआ है।
इंजीनियरिंग के सबसे प्रतिष्ठित एग्जाम GATE के साथ इस बार कुछ ऐसा हुआ है जो संदेह के घेरे में है। आमतौर पर जब रिजल्ट आता है, तो टॉपर्स किसी ना किसी कोचिंग संस्थान से या सोशल मीडिया पर अपनी सफलता की कहानी साझा करते हुए मिल ही जाते हैं।
लेकिन इस बार कहानी कुछ और ही कहती है। कहानी के पीछे के तर्क और आंकड़े यह इशारा कर रहे हैं कि शायद परीक्षा की पारदर्शिता के साथ बड़ा समझौता हुआ है। GATE 2024 के परिणामों में जिस तरह की विसंगतियां देखी गई हैं, उसने लाखों छात्रों के भविष्य पर सवालिया निशान लगा दिया है।
टॉपर्स का रहस्यमयी गायब होना: आखिर सच क्या है?
इंजीनियरिंग के अंदर अगर कंप्यूटर साइंस, सिविल, इलेक्ट्रिकल और मैकेनिकल जैसी प्रमुख ब्रांचेस को देखा जाए, तो इनमें लाखों छात्र आवेदन करते हैं। ये छात्र PSU में नौकरी पाने या IIT में मास्टर्स और पीएचडी के लिए दिन-रात मेहनत करते हैं।
अंकित गोयल, जो खुद दो बार गेट के टॉपर रह चुके हैं, बताते हैं कि गेट के अंदर जो सबसे बड़े संस्थान हैं, उनके पास हर साल टॉप 10 के रैंकर्स ऑलमोस्ट हर ब्रांच के होते हैं। लेकिन इस बार सबसे बड़ी ब्रांचेस के Top 10 Rankers गायब थे।
हैरानी की बात यह है कि हर साल कोचिंग संस्थान एक टूल चलाते हैं जिसे Rank Predictor कहा जाता है। वहां बच्चा अपने नंबर भरकर अपनी संभावित रैंक देख सकता है। लेकिन इस बार के टॉपर्स ने वहां भी अपना डाटा साझा नहीं किया।
अगर कोई बच्चा 100 में से 80 से ज्यादा नंबर ला रहा है, तो उसके अंदर अपनी रैंक जानने की जिज्ञासा होना स्वाभाविक है। लेकिन इन संदिग्ध टॉपर्स ने खुद को पूरी तरह से लो-प्रोफाइल रखा, जो कि पहली बार देखने को मिल रहा है।
इसके साथ ही, परीक्षा के दौरान Raipur में एक बड़ा रैकेट पकड़ा गया था। वहां बच्चे अपने पैरों के अंदर माइक्रोफोन और कान में स्किन कलर के Bluetooth Headset लगा कर गए थे। यह रैकेट हरियाणा से रायपुर पहुंचा था ताकि बच्चों को चीटिंग करवाई जा सके।
AIR 1 की संदिग्ध कहानी: 15 नंबर से 90 तक का सफर
एक ऐसा ही मामला सामने आया जहां एक छात्र ने All India Rank 1 (AIR 1) का दावा किया। शुरुआत में किसी को संदेह नहीं हुआ क्योंकि उस छात्र ने आईआईटी के स्कोर कार्ड का स्क्रीनशॉट भेजा था और वह एक प्रतिष्ठित एनआईटी का छात्र भी था।
लेकिन जब उस छात्र का इंटरव्यू लिया गया, तो कई चौंकाने वाली बातें सामने आईं। वह छात्र इंटरव्यू देने से कतरा रहा था और कई बहाने बना रहा था। जब उससे गहराई से सवाल पूछे गए, तो वह काफी इमोशनल हो गया और अपनी गरीबी और परिवार की बीमारी का हवाला देने लगा।
संदेह तब और गहरा गया जब उसके पुराने रिकॉर्ड्स की जांच की गई। पता चला कि वह छात्र दिल्ली के राजेंद्र नगर में रहकर तैयारी कर रहा था, लेकिन उसने अपना एग्जाम सेंटर Mumbai के एक बाहरी इलाके में चुना।
जब उससे पूछा गया कि उसने दिल्ली या अपने गृह नगर हैदराबाद के बजाय मुंबई को क्यों चुना, तो उसका जवाब था कि वह दोस्तों के साथ घूमने गया था। एक ऐसा छात्र जिसके पिता बहुत बीमार थे और जिसके पास पैसों की तंगी थी, वह घूमने के लिए मुंबई कैसे जा सकता है?
सबसे बड़ी बात यह थी कि जब उसकी Test Series का डाटा चेक किया गया, तो पता चला कि वह 100 में से मात्र 15 से 20 नंबर ला रहा था। 20 नंबर से सीधे 90 नंबर की छलांग लगाना लगभग नामुमकिन सा लगता है।
एआई (AI) और परीक्षा हॉल की धांधली
छात्रों ने जब रैंकर्स के रिस्पॉन्स शीट की मांग की, तो एक और अजीब पैटर्न देखने को मिला। जो सवाल बहुत कठिन थे, जिन्हें हल करना लगभग असंभव माना जा रहा था, वे सवाल इन तथाकथित टॉपर्स के बिल्कुल सही थे।
वहीं दूसरी ओर, जिन आसान सवालों को 90% छात्रों ने सही किए थे, वे इनके गलत थे। जब उन कठिन सवालों को AI (जैसे ChatGPT) से हल कराया गया, तो एआई ने भी वही गलत उत्तर दिया जो ये छात्र लगाकर आए थे।
इससे यह संदेह पैदा होता है कि क्या परीक्षा के दौरान किसी AI tool या बाहरी मदद का उपयोग किया गया था? IIT Guwahati द्वारा आयोजित इस परीक्षा की पारदर्शिता पर अब गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
कई केंद्रों से ऐसी खबरें भी आईं कि वहां CCTV cameras कागज से ढके हुए थे। कुछ जगहों पर छात्रों की ठीक से चेकिंग भी नहीं की गई और एक छात्र तो दो घंटे तक मोबाइल फोन लेकर अंदर बैठा रहा और बाद में खुद ही बाहर रखकर आया।
IIT Guwahati से जवाब की मांग: क्या होगा आगे?
गेट परीक्षा के लिए छात्र 2000 रुपये जैसी भारी-भरकम फीस देते हैं। इतनी फीस लेने के बाद भी अगर सुरक्षा के इंतजाम पुख्ता नहीं हैं, तो यह सीधे तौर पर संस्थान की विफलता है। छात्रों और शिक्षकों का समुदाय अब RTI के माध्यम से जवाब मांग रहा है।
पहली मांग यह है कि Top 100 छात्रों के नाम और उनके परीक्षा केंद्रों का विवरण सार्वजनिक किया जाए। अगर एक ही सेंटर से कई टॉपर्स निकल रहे हैं, तो यह जांच का विषय है।
दूसरी मांग यह है कि आईआईटी यह जांच करे कि किसी छात्र ने एक विशेष सवाल पर कितना समय बिताया। अगर कोई कठिन न्यूमेरिकल सवाल मात्र 10-20 सेकंड में हल कर लिया गया है, तो साफ है कि वह हल नहीं किया गया बल्कि कहीं से टीपा गया है।
तीसरी जांच का आधार छात्रों को दिया जाने वाला Rough Pad होना चाहिए। गेट एक ऐसी परीक्षा है जिसमें बिना रफ वर्क के न्यूमेरिकल हल करना नामुमकिन है। अगर रफ पैड खाली हैं और उत्तर सही हैं, तो यह धोखाधड़ी का सबसे बड़ा सबूत होगा।
ईमानदार छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़
इस धांधली का सबसे बुरा असर उन छात्रों पर पड़ रहा है जिन्होंने सालों तक कड़ी मेहनत की है। जो छात्र जेन्युइनली रैंक लाए हैं, उन्हें भी अब शक की निगाह से देखा जा रहा है। PSU की नौकरियां और IIT में एडमिशन की राह अब कठिन होती जा रही हैं
सरकारी नौकरियों में कई बार उम्र की सीमा पार हो जाती है, ऐसे में एक साल का बर्बाद होना किसी छात्र के करियर को पूरी तरह खत्म कर सकता है। गेट जैसे उच्च स्तरीय एग्जाम में अगर ऐसा होता है, तो छोटे एग्जाम्स के छात्रों का विश्वास पूरी तरह टूट जाएगा।
यह मामला अब केवल एक परीक्षा का नहीं रह गया है, बल्कि यह देश की शिक्षा व्यवस्था और भर्ती प्रक्रिया की अखंडता का सवाल है। IIT Guwahati और संबंधित अधिकारियों को इस पर तुरंत संज्ञान लेना चाहिए और एक निष्पक्ष जांच करानी चाहिए।
छात्रों का कहना है कि वे तब तक चैन से नहीं बैठेंगे जब तक इस पूरे मामले की सच्चाई सामने नहीं आ जाती। यह लड़ाई उन हजारों छात्रों के लिए है जो एक फेयर और पारदर्शी सिस्टम की उम्मीद करते हैं।
भविष्य में अगर इस मामले पर कोई नया अपडेट या IIT की तरफ से कोई आधिकारिक बयान आता है, तो उस पर नजर बनी रहेगी। फिलहाल, गेट परीक्षा का यह विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है और इसने इंजीनियरिंग जगत में एक बड़ा तूफान खड़ा कर दिया है।