AI's Dark Turn: Your Chats Are Now Military Secrets (AI का काला सच: आपकी चैट अब मिलिट्री सीक्रेट)

AI का काला सच: आपकी चैट अब मिलिट्री सीक्रेट

आजकल मैं जो भी बातें कहता हूँ, उन्हें थोड़ा गंभीरता से लेना चाहिए, क्योंकि मेरे द्वारा बताई गई भविष्यवाणियाँ अक्सर सच साबित हो रही हैं। ऐसा नहीं है कि मेरे पास कोई अलौकिक शक्ति है, पर जो हो रहा है वो हैरान करने वाला है।

 आज हम इस बारे में बात करेंगे कि आपको चैटजीपीटी का इस्तेमाल बंद क्यों कर देना चाहिए और अगर आपने चैटजीपीटी से कोई निजी बात पूछी है, तो आपका डेटा और आपकी व्यक्तिगत जानकारी शायद खतरे में है।

पूरी दुनिया में चैटजीपीटी को अनइंस्टॉल करने और बॉयकॉट करने की मुहिम चल रही है। लेकिन इस आग की आंच अभी तक भारत में नहीं पहुंची है।

 लोगों को इस बारे में जानकारी ही नहीं है, वे व्यस्त हैं। बहुत सारे यूट्यूबर मिलकर किसी फोन का प्रचार कर रहे हैं, जैसे कि वह कोई बेहतरीन मोटो का फोन हो। ऐसे में भला उन्हें इस बात से क्या फर्क पड़ता है कि आपका डेटा कहाँ चुराया जा रहा है या कहाँ जा रहा है?

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ऐसे में एक मसीहा सामने आता है। अब आप समझ ही गए होंगे कि मैं किसकी बात कर रहा हूँ। असल में, यह खबर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि चैटजीपीटी का मालिक, यानी ओपनएआई, जिसके संस्थापक सैम ऑल्टमैन हैं, उन्होंने अमेरिकी सरकार और रक्षा विभाग (पेंटागन) के साथ साझेदारी कर ली है। अब चैटजीपीटी, जो ओपनएआई का उत्पाद है, उसका इस्तेमाल सैन्य खुफिया जानकारी के लिए होगा।

यानी कि, अमेरिकी सरकार अब उस एआई का उपयोग करेगी जिसे कुछ समय पहले तक पूरी दुनिया अपने व्यक्तिगत सवालों के जवाब पाने और जीवन को बेहतर बनाने के लिए इस्तेमाल करती थी। अब यह अमेरिकी सरकार की निगरानी, ​​खुफिया जानकारी और मूल्यांकन का एक उपकरण बन गया है। क्या आप कनेक्शन देख पा रहे हैं?

💡 "आपकी व्यक्तिगत जानकारी अब अमेरिकी सरकार और अमेरिकी सेना के खुफिया तंत्र के हाथों में हो सकती है।"

तो, अगर सरकार इसका इस्तेमाल कर रही है और ओपनएआई के साथ उनकी साझेदारी हो चुकी है, तो लोगों को यह समस्या हो रही है कि अब उनका व्यक्तिगत डेटा अमेरिकी सरकार और अमेरिकी सेना या उनके रक्षा खुफिया तंत्र के पास है। यह बात हमें पता नहीं थी।

 हम तो चैटजीपीटी का इस्तेमाल इसलिए कर रहे थे क्योंकि हमें लगा कि यह एक निजी कंपनी है और यह हमारे डेटा का दुरुपयोग नहीं करेगी। हमें विश्वास था कि इसका किसी भी सेना या सरकार के साथ कभी कोई जुड़ाव या संबंध नहीं होगा।

बहुत से लोग मजाक उड़ाते थे कि "तुम क्या बात कर रहे हो, इसे इस्तेमाल मत करो, यह चीनी कंपनी है।" लेकिन एक बात समझनी चाहिए: चीन एक ऐसा देश है जहाँ कोई भी कंपनी काम कर रही है, उसे सरकार का आदेश मानना ​​पड़ेगा।

 और वहाँ की कई कंपनियों के मालिक या तो पहले सेना में काम कर चुके हैं या अभी भी सक्रिय रूप से सेना के लिए काम कर रहे हैं। इसलिए, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि वह चीनी कंपनी है या नहीं, उसका चीनी सरकार के साथ सीधा संबंध है। और यह चीज हमें अब अमेरिका में भी देखने को मिल रही है, जबकि ओपनएआई का मामला अलग था।

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अब यहाँ क्या हो रहा है? ओपनएआई का चैटजीपीटी और एंथ्रोपिक कंपनी का क्लाउड (या जो भी आप कहते हैं) आपस में कड़ी प्रतिस्पर्धा में चलते रहते हैं। हाल ही में एआई सबमिट में, उन्होंने हाथ तक नहीं मिलाए थे जब वे मंच पर आए थे। खैर, उनकी प्रतिद्वंद्विता चलती रहती है।

तो यहाँ ओपनएआई ने तो सीधा कह दिया, "ठीक है, हम अमेरिकी सरकार के साथ काम करेंगे। चैटजीपीटी का इस्तेमाल अब अमेरिकी रक्षा विभाग करेगा।" लेकिन एंथ्रोपिक ने मना कर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं होना चाहिए।

 यह एआई, जो कभी लोगों के लिए काम करती थी, उसे सेना या रक्षा या सरकार के लिए काम नहीं करना चाहिए। क्योंकि इससे तो लोगों का सारा डेटा सरकार के पास चला जाएगा।

💡 "एंथ्रोपिक जैसी कंपनियों ने AI के सैन्य उपयोग का विरोध किया है, यह कहते हुए कि यह लोगों के डेटा को खतरे में डालता है।"

इसी वजह से पूरी दुनिया में लोग चैटजीपीटी का बहिष्कार कर रहे हैं। क्या किसी ने आपको भारत में इसके बारे में बताया? नहीं बताया। तो, अगर आपने कोई व्यक्तिगत चीज पूछी है, कोई गैरकानूनी चीज पूछी है, या कुछ ऐसा पूछा है, या कोई ऐसा फोटो अपलोड कर लिया है जिसे आप सार्वजनिक नहीं करना चाहते, तो आप मुश्किल में हैं।

तो यहाँ यह दिक्कत हो गई है। अब हम क्या कर सकते हैं? भाई, हम कुछ नहीं कर सकते। डेटा चला गया तो चला गया। और जिन लोगों ने कभी डेटा अपलोड नहीं किया या कभी ऐसे व्यक्तिगत सवाल नहीं पूछे, आप भी मुश्किल में हैं। मैं भी उसी श्रेणी में आता हूँ।

TOP UPDATEक्योंकि यहाँ चैटजीपीटी को जिस डेटा पर प्रशिक्षित किया गया है, दोस्तों, वह सार्वजनिक डेटा है। जब चैटजीपीटी बना, तो वह सब सार्वजनिक डेटा पर आधारित था। यानी, मेरे फोटो भी उसमें होंगे, आपके भी होंगे। जो भी आपने सार्वजनिक रूप से अपलोड किया है, वह सारा डेटा उसके पास है।

 और उसी से उसने प्रशिक्षण प्राप्त किया है। और अब वह अमेरिकी सेना की खुफिया जानकारी को प्रशिक्षित करेगा। यह डरावना है।

ओपनएआई के अध्यक्ष, क्रेग ब्रोकमैन, जिन्होंने ट्रंप के अभियान में बहुत सारा पैसा लगाया था, वे भी इसमें शामिल हैं। क्या यह सब कुछ संदिग्ध नहीं लग रहा है?

अगली बात जो मुझे पता है, वह यह है कि लोग चैटजीपीटी को क्यों छोड़ रहे हैं। क्योंकि उनका GPT-4 जैसा कोई मॉडल था, जिसे उन्होंने शायद 2026 फरवरी में रिटायर कर दिया था, जिसमें बहुत अधिक व्यक्तिगत स्पर्श था।

 उसमें एक अपनापन था, ऐसा लगता था जैसे वह हमारा कोई दोस्त हो। लेकिन अब उन्होंने जो नए मॉडल पेश किए हैं, वे बहुत ठंडे हैं। वे बिल्कुल भी व्यक्तिगत स्पर्श नहीं देते। उनकी कोई पर्सनालिटी नहीं है, कुछ भी नहीं है।

क्योंकि अब इस कंपनी को पता चल चुका है कि वह अब सैन्य अनुबंध हासिल करेगी और वहीं से पैसा कमाएगी। सामान्य लोगों की सेवा करने वाली कंपनी के रूप में अब यह नहीं रहेगी। तो आप इसका इस्तेमाल क्यों कर रहे हैं? अब जितने लोग यह सोचते हैं कि यह अकेली कंपनी है जो शायद सैन्य खुफिया जानकारी के साथ काम करेगी, तो वे गलत हैं।

💡 "AI मॉडल अब पहले की तरह व्यक्तिगत नहीं रहे, क्योंकि वे सैन्य अनुबंधों की ओर बढ़ रहे हैं।"

यह सिर्फ ओपनएआई की कहानी नहीं है। यह एआई के भविष्य की कहानी है। जहाँ तकनीक, जो हमें सशक्त बनाने के लिए बनाई गई थी, अब निगरानी और नियंत्रण का हथियार बन सकती है। हमें सचेत रहने की जरूरत है। हमें यह समझने की जरूरत है कि हम क्या इस्तेमाल कर रहे हैं और उस तकनीक के पीछे कौन सी ताकतें काम कर रही हैं।

Rajesh Kashyap

Digital & Tech enthusiast। पिछले कई सालों से Geopolitics, Indian Finance और EV sector को closely follow कर रहा हूँ। Behind The Fold (behindthefold.in) का Founder — जहाँ हम headlines के पीछे की असली कहानी लाते हैं।

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