Facebook's Creator Stack: A Desperate Bid for Attention? (फेसबुक क्रिएटर स्टैक: ध्यान के लिए हताश प्रयास?)

फेसबुक क्रिएटर स्टैक: ध्यान के लिए हताश प्रयास?
Story at a Glance:
  • Facebook की क्रिएटर इकोनॉमी की चुनौती
  • क्रिएटर स्टैक प्रोग्राम: क्या है ऑफर?
  • 3 महीने के बाद क्या?

आज हम बात करने वाले हैं Facebook के क्रिएटर स्टैक ऑफर या कैंपेन के बारे में। मेटा ने यह पहल उन स्थापित क्रिएटर्स के लिए शुरू की है जो पहले से ही अन्य प्लेटफॉर्म्स पर सक्रिय हैं, जैसे कि Instagram, X, या YouTube।

Facebook का यह प्रस्ताव है कि ये क्रिएटर्स अब Facebook के लिए भी वीडियो बनाएं। बदले में, उन्हें पैसे, बेहतर रीच और लॉन्च के दिन से ही मोनेटाइजेशन का अवसर मिलेगा। साथ ही, कई अन्य लाभों का वादा किया गया है, जिनमें अच्छी खासी रकम शामिल है।

पर सवाल यह उठता है कि आखिर यह सब क्या है? किसके लिए यह एक मौका है? और इसकी असलियत और भविष्य क्या है?

Facebook की क्रिएटर इकोनॉमी की चुनौती

सबसे पहले, यह समझना ज़रूरी है कि Facebook अभी तक एक सफल क्रिएटर इकोनॉमी बनाने में कामयाब नहीं हुआ है। इसका मुख्य कारण है प्लेटफॉर्म की अप्रत्याशित प्रकृति।

अगर आप Facebook पर पैसे कमाने के उद्देश्य से वीडियो बनाते हैं, तो यह बिल्कुल भी प्रेडिक्टेबल नहीं है। कभी-कभी आपके कंटेंट पर लाखों या करोड़ों व्यूज आ जाते हैं, लेकिन वही कंटेंट अगर आप दोबारा बनाते हैं, तो आपको शायद 2000 व्यूज भी न मिलें।

Facebook की क्रिएटर इकोनॉमी की चुनौती

यह प्लेटफॉर्म किसी निश्चित पैटर्न पर नहीं चलता और इसके एनालिटिक्स को गहराई से समझना मुश्किल है। नतीजतन, आप लंबे समय में यह पता नहीं लगा सकते कि प्लेटफॉर्म पर क्या चल रहा है या लोग क्या देख रहे हैं, जिससे अपनी कमाई बढ़ाना एक चुनौती बन जाता है।

यही वजह है कि Facebook कभी भी क्रिएटर्स के लिए पैसे कमाने का एक प्राथमिक प्लेटफॉर्म नहीं बन पाया, या करियर शुरू करने के लिए एक भरोसेमंद जगह नहीं बन सका।

💡 "Facebook is inherently unpredictable for creators, making consistent earnings a gamble."

क्रिएटर स्टैक प्रोग्राम: क्या है ऑफर?

इस स्थिति को बदलने के लिए, मेटा ने 'क्रिएटर स्टैक प्रोग्राम' पेश किया है। इस प्रोग्राम के तहत, जिन क्रिएटर्स के किसी अन्य प्लेटफॉर्म पर कम से कम 1 लाख फॉलोअर्स हैं, वे Facebook पर आकर वीडियो पोस्ट कर सकते हैं और इस प्रोग्राम में एनरोल कर सकते हैं।

प्रोग्राम के तहत, 1 लाख फॉलोअर्स वाले क्रिएटर्स को 3 महीने तक हर महीने $1000 (लगभग ₹90,000) की राशि दी जाएगी। इसके साथ ही, जैसे ही आप ज्वाइन करते हैं, आपको Facebook का मोनेटाइजेशन प्रोग्राम स्वतः ही मिल जाएगा।

यदि आपके किसी अन्य प्लेटफॉर्म पर 1 मिलियन (10 लाख) से अधिक फॉलोअर्स हैं, तो आपको 3 महीने तक प्रति माह $3000 (लगभग ₹2.7 लाख) मिलेंगे।

क्रिएटर स्टैक प्रोग्राम: क्या है ऑफर?

3 महीने के बाद क्या?

जब यह 3 महीने की अवधि समाप्त हो जाएगी, तब भी आप क्रिएटर प्रोग्राम में एनरोल्ड रहेंगे। आपको एक ऐसे प्लेटफॉर्म तक पहुंच मिलेगी जहां आप बेहतर एनालिटिक्स देख पाएंगे, अपने व्यूज बढ़ाने के तरीके समझ पाएंगे, और आपके कंटेंट को अधिक रीच मिलेगी, यानी उसे ज्यादा लोगों तक दिखाया जाएगा।

मेटा की मेहरबानी का कारण

अब सवाल यह है कि मेटा यह सारी मेहरबानी क्यों कर रहा है? इसके पीछे का मुख्य कारण यह है कि Facebook चाहता है कि प्लेटफॉर्म पर अधिक से अधिक लोग आएं।

आपने देखा होगा कि आजकल इंटरनेट पर Facebook ज्वाइन करने के विज्ञापन आ रहे हैं। लोगों को बताया जा रहा है कि Facebook पर आएं और दोस्त बनाएं। ऐसा क्यों हो रहा है?

इसका कारण यह है कि Facebook एक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के रूप में अब पुराना हो चुका है। वह उन दिनों की बात है जब हम बच्चे थे, 2005-2007 का समय Facebook का प्राइम टाइम था।

आजकल, जेन-जी (Gen Z) और नई पीढ़ी के लोग Facebook पर नहीं आते। वे ज्यादातर Instagram, या अन्य आधुनिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे Reddit और Discord पर सक्रिय हैं।

Facebook पर पब्लिक की उपस्थिति कम हो गई है। वे कभी-कभी अपने बड़े-बुजुर्गों को देखने के लिए आते हैं। युवा पीढ़ी वहां नहीं है। कई लोगों ने तो शायद अपना Facebook अकाउंट डिलीट भी कर दिया होगा।

सीधे शब्दों में कहें तो, Facebook पर अब वह ऑडियंस नहीं है जो पहले हुआ करती थी।

💡 "The younger generation has largely abandoned Facebook, flocking to newer, trendier platforms."

ऑडियंस को वापस लाने की रणनीति

ऑडियंस को वापस बुलाने का मेटा का तरीका यही है कि वह उनके पसंदीदा इन्फ्लुएंसर्स और क्रिएटर्स को प्लेटफॉर्म पर लाया जाए।

जब लोकप्रिय क्रिएटर्स Facebook पर आएंगे, तो उनके फैंस भी स्वाभाविक रूप से वहां आ जाएंगे। इससे एक क्रिएटर इकोनॉमी बनेगी, और अधिक लोग कंटेंट बनाएंगे, जिससे प्लेटफॉर्म पर ऑटोमेटिकली अधिक लोग जुड़ेंगे।

मेटा जानता है कि लोग वहीं जाएंगे जहां क्रिएटर्स हैं, जहां यूजर्स हैं, और जहां Instagram जैसे प्लेटफॉर्म्स का दबदबा है।

बदलता वक्त, बदलती आदतें

वह जमाना जा चुका जब लोग आपस में बात करने के लिए पूरा-पूरा दिन निकाल देते थे। हमारे बचपन में, लोग घंटों चैटिंग करते रहते थे। आजकल किसी के पास इतना वक्त नहीं है।

आजकल लोग लंबी बातचीत को एक ही बार में कॉल पर निपटा लेते हैं। उन्हें Facebook पर किसी के ऑनलाइन आने का इंतजार करने की ज़रूरत नहीं है।

समय बहुत बदल गया है। आजकल तो SMS भी कोई किसी को नहीं करता।

बदलता वक्त, बदलती आदतें

तो, मेरा क्या मानना है?

मेरा यह मानना है कि अगर आप एक क्रिएटर बनना चाहते हैं, तो अभी भी Facebook को अपना मुख्य प्लेटफॉर्म नहीं बनाना चाहिए।

हालांकि, इस प्रोग्राम में एक दिलचस्प बात यह है कि Facebook ने ऐसा कोई नियम नहीं बनाया है कि कंटेंट विशेष रूप से Facebook के लिए ही बनाया जाना चाहिए।

इसका मतलब है कि आप वही कंटेंट जिसे आप पहले से किसी अन्य प्लेटफॉर्म पर पोस्ट कर रहे हैं, उसे Facebook पर भी रीपोस्ट या रीपर्पस कर सकते हैं। आप उसे थोड़ा एडिट कर सकते हैं, उसके मॉन्टाज बना सकते हैं, या जो चाहें कर सकते हैं।

💡 "Repurposing existing content for Facebook could be a low-risk way to tap into their incentives."

हाँ, इसे आज़माना बिल्कुल बनता है, क्योंकि इससे आपको अलग से कोई पैसे नहीं देने पड़ रहे। असल में, वे आपके कंटेंट को अधिक सर्कुलेट कर रहे हैं और आपकी पॉपुलैरिटी बढ़ा रहे हैं।

आपको यह भी याद होगा कि भुवन बाम (Bhuvan Bam) जैसे कई बड़े यूट्यूबर्स अपनी शुरुआती पॉपुलैरिटी Facebook से ही प्राप्त कर चुके हैं। उनकी वीडियोज़ पहले Facebook पर वायरल हुईं, और फिर उन्हें YouTube पर प्रसिद्धि मिली।

अगर हम पैसे की बात को थोड़ी देर के लिए छोड़ भी दें, और सिर्फ पॉपुलैरिटी पर ध्यान दें, तो यह ध्यान रखना चाहिए कि सोशल मीडिया में पॉपुलैरिटी अंततः पैसे में बदल सकती है। यह मैंने पिछले 10 सालों में सीखा है।

अगर आपको पॉपुलैरिटी मिल रही है, भले ही तुरंत पैसे न मिलें, ऐसे ऑफर्स को कभी हाथ से जाने न दें, क्योंकि यह पॉपुलैरिटी भविष्य में आय का स्रोत बन सकती है।

💡 "Prioritize gaining popularity and reach, as it inevitably translates to monetary value in the long run."

तो हाँ, इसे आज़माने में कोई बुराई नहीं है। लेकिन इसके लिए अपने अन्य मुख्य प्लेटफॉर्म्स को छोड़ना या अनदेखा करना ठीक नहीं होगा, क्योंकि Facebook अभी भी प्रेडिक्टेबल नहीं है।

मैं बस यही कहना चाहता हूँ।

Rajesh Kashyap

Digital & Tech enthusiast। पिछले कई सालों से Geopolitics, Indian Finance और EV sector को closely follow कर रहा हूँ। Behind The Fold (behindthefold.in) का Founder — जहाँ हम headlines के पीछे की असली कहानी लाते हैं।

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