दुनिया में शांति की उम्मीदें एक बार फिर से जगती नजर आ रही हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump के ताजा बयानों ने वैश्विक कूटनीति में हलचल पैदा कर दी है।
ट्रंप के अनुसार, America and Iran के बीच जल्द ही एक ऐतिहासिक पीस डील साइन हो सकती है। इस डील की सबसे बड़ी हेडलाइन यह है कि ईरान अपना Enriched Uranium अमेरिका को सौंपने पर सहमत हो गया है।
इसके साथ ही ट्रंप की मध्यस्थता से Israel और Lebanon के बीच भी 10 दिनों का सीजफायर अनाउंस कर दिया गया है। यह खबर पूरी दुनिया के लिए बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि विश्व वर्तमान में शांति की राह देख रहा है।
अगर ट्रंप के दावों को सही माना जाए, तो ईरान अपने सालों की मेहनत से तैयार किए गए यूरेनियम को अब अमेरिका के हवाले कर देगा। पिछले हफ्ते Islamabad Talks के दौरान यह बात निकलकर आई थी कि पाकिस्तान ने अपना यूरेनियम सौंपने से इनकार कर दिया था।
ईरान और अमेरिका की वार्ता में JD Vance और ईरान के विदेश मंत्री शामिल हुए थे। उस समय ईरान अपना यूरेनियम एनरिचमेंट प्रोग्राम नहीं रोकना चाहता था, जबकि अमेरिका अगले 20 साल का बैन चाहता था।
अब इस रस्साकसी के बीच ट्रंप का दावा है कि ईरान अपने Enrichment Program को रोकने पर सहमत हो गया है। यूरेनियम एनरिचमेंट की यह प्रक्रिया बहुत जटिल और गोपनीय होती है।
ईरान ने जमीन के नीचे बहुत गहराई में बड़ी टनल्स के भीतर अपना Enrichment Facility बना रखा है। इस प्रक्रिया में पिच ब्लैंड से Uranium-235 की मात्रा को बढ़ाकर उसकी शुद्धता को 90% तक ले जाया जाता है।
90% तक शुद्ध किया गया यूरेनियम सीधे तौर पर Nuclear Bomb बनाने के लायक होता है। यह एक अत्यंत क्लासिफाइड और कीमती उत्पाद है, जिसे देने के लिए ईरान का तैयार होना एक बहुत बड़ी अमेरिकी उपलब्धि मानी जा रही है।
इस खबर को हल्का नहीं माना जा सकता क्योंकि यह पूरे पश्चिम एशिया के समीकरणों को बदल कर रख सकती है। पिछली इस्लामाबाद वार्ता के दौरान इज़राइल सहमत नहीं था और उसने लेबनान पर हमला कर दिया था।
इस बार ट्रंप ने राष्ट्रपति के रूप में आने से पहले ही इजराइल और लेबनान को बातचीत की मेज पर बैठा दिया है। चर्चा है कि ट्रंप इज़राइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu और लेबनान के राष्ट्रपति के बीच हैंडशेक कराने जा रहे हैं।
इजराइल और लेबनान के बीच बातचीत इसलिए भी जरूरी है क्योंकि ईरान चाहता था कि लेबनान पर हमले रुकें। ट्रंप ने ईरान की इस शर्त को Ceasefire Program के जरिए पूरा करने का रास्ता निकाल लिया है।
इसके बदले में ट्रंप चाहते थे कि ईरान अपना परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह से रोक दे। सूचना मिल रही है कि ईरान इन सभी शर्तों को मानने के लिए अब तैयार हो गया है।
क्या इन दोनों देशों के बीच की पुरानी दुश्मनी अब खत्म हो जाएगी? क्या ईरान उस विनाशकारी दौर से बाहर निकल पाएगा जिसे वह पिछले कई वर्षों से झेल रहा है?
इन सवालों के साथ-साथ इस पूरी कहानी में Pakistan की भूमिका भी बहुत दिलचस्प होकर उभरी है। पाकिस्तान इस पूरी पिक्चर के पीछे एक बड़ी कड़ी के रूप में काम कर रहा है।
ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि अगर सब कुछ उनकी योजना के अनुसार रहा, तो वह पाकिस्तान के दौरे पर भी जा सकते हैं। इसका मतलब है कि आने वाले समय में ब्लॉकड और युद्ध जैसी स्थितियाँ समाप्त हो सकती हैं।
अमेरिका का स्पष्ट मानना है कि ईरान जैसे ही अपना Enriched Uranium सौंपेगा, दुनिया में ऑयल सप्लाई सामान्य हो जाएगी। ट्रंप ने पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि ईरान अब न्यूक्लियर वेपन नहीं रखेगा।
ईरान के भीतर Fordow, Natanz, and Isfahan जैसी जगहों पर बड़ी न्यूक्लियर फैसिलिटीज मौजूद हैं। विशेष रूप से इस्फहान को ईरान की Missile Capital कहा जाता है जहां अंडरग्राउंड मिसाइलों का जखीरा है।
हाल ही में इसी क्षेत्र में अमेरिकी पायलट्स के गिरने की खबरें भी आई थीं। दावा किया गया था कि अमेरिकी फोर्सेस ईरान के यूरेनियम को निकालने या नष्ट करने के मिशन पर थीं।
ईरान के डेपुटी स्पीकर ने भी ऑन कैमरा यह स्वीकार किया था कि अमेरिका की तैयारी बहुत बड़ी थी। इसी दबाव के बाद अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान में बातचीत का सिलसिला शुरू हुआ।
अमेरिका और इजराइल को सबसे बड़ा डर यह है कि यदि ईरान ने परमाणु बम बना लिया तो वह इसका इस्तेमाल उन पर करेगा। इसलिए वे ईरान को हर हाल में परमाणु शक्ति बनने से रोकना चाहते हैं।
इस बीच Russia ने भी एक प्रस्ताव दिया था कि ईरान अपना यूरेनियम रूस के पास एक न्यूट्रल पार्टी के तौर पर रख दे। हालांकि अमेरिका ने इस रूसी प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया।
अमेरिका चाहता है कि ईरान का पूरा यूरेनियम सीधे अमेरिका को ही सौंपा जाए। उसे डर है कि रूस भविष्य में फिर से वह यूरेनियम ईरान को वापस कर सकता है।
यह पूरी स्थिति Iraq War की याद दिलाती है, जहां सद्दाम हुसैन पर हथियारों के झूठे आरोप लगे थे। लेकिन ईरान के मामले में यूरेनियम की मौजूदगी एक सच्चाई है जिसे ईरान खुद भी स्वीकार करता है।
ट्रंप ने बताया कि ईरान के ऊपर अत्यधिक दबाव बनाने के लिए उसके 158 जहाजों को पानी में डुबो दिया गया। अमेरिकी नौसेना ने ईरान की नौसेना को लगभग खत्म कर दिया है ताकि वह व्यापार न कर सके।
अमेरिका ने ईरान के ऊपर एक सख्त Naval Blockade लगा रखा है। ट्रंप का प्लान ईरान के Kharg Island पर कब्जा करने का भी था, जहां से ईरान अपना 90% तेल एक्सपोर्ट करता है।
ईरान को आर्थिक रूप से कमजोर करने के लिए उसके सभी प्रमुख बंदरगाहों जैसे Bandar Abbas और Bushehr की निगरानी बढ़ा दी गई है। करीब 10,000 अमेरिकी सेलर्स को कोस्ट लाइन पर तैनात किया गया है।
अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर USS Abraham Lincoln इस समय अरेबियन सी में तैनात है। इस पर F-35 और F-16 जैसे आधुनिक फाइटर जेट्स किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार खड़े हैं।
हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी नौसेना ने ईरान के कई तेल जहाजों को वापस लौटने पर मजबूर कर दिया है। उन्हें चेतावनी दी जा रही है कि लाइन क्रॉस करने पर उन पर हमला किया जा सकता है।
इस भारी दबाव के बीच Pakistan की भूमिका एक मध्यस्थ या दलाल के रूप में सामने आई है। पाकिस्तान के जनरल Asim Munir और प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif लगातार सक्रिय हैं।
ट्रंप ने पाकिस्तानी नेतृत्व की तारीफ करते हुए कहा कि वे बहुत अच्छा काम कर रहे हैं। पाकिस्तान ने Islamabad Talks के जरिए ईरान और अमेरिका को करीब लाने की कोशिश की है।
आसिम मुनीर ने हाल ही में ईरान की यात्रा की और वहां अमेरिकी संदेश पहुंचाया। वहीं शहबाज शरीफ Saudi Arabia पहुंचे ताकि ईरान डील के बदले आर्थिक मदद सुनिश्चित की जा सके।
सूचना है कि सऊदी अरब पाकिस्तान को $5 Billion का कर्ज देने के लिए तैयार हो गया है। यह पाकिस्तान के लिए एक बड़ी राहत है, जो उसे इस कूटनीतिक मध्यस्थता के बदले मिल रही है।
पाकिस्तान के नेता कतर और तुर्की की भी यात्रा कर रहे हैं ताकि पूरे रीजन में ईरान को लेकर एक सहमति बन सके। पाकिस्तान यह साबित करना चाहता है कि वह अमेरिका के लिए अभी भी बहुत उपयोगी है।
हालांकि ईरान की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक पुख्ता बयान नहीं आया है। ईरान का मीडिया अभी भी इन दावों पर चुप्पी साधे हुए है या कुछ रिपोर्ट्स में इनका खंडन कर रहा है।
लेकिन Israel का 10-दिन के सीजफायर के लिए तैयार होना एक बड़ा संकेत है। Benjamin Netanyahu के लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन के साथ व्हाइट हाउस में बैठना ऐतिहासिक होगा।
ट्रंप इस पूरी प्रक्रिया को अपनी व्यक्तिगत जीत के रूप में देख रहे हैं। उनका मानना है कि उनका 'मैक्सिमम प्रेशर' कैंपेन काम कर गया है और ईरान घुटनों पर है।
अगर यह डील सफल होती है, तो Strait of Hormuz का रास्ता पूरी तरह खुल जाएगा और वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें गिर सकती हैं। इससे वैश्विक मंदी का खतरा भी काफी हद तक टल सकता है।
शांति वार्ता फिलहाल अपने चरम पर है और दुनिया की नजरें 21 अप्रैल की डेडलाइन पर टिकी हैं। क्या ईरान वास्तव में अपने परमाणु सपनों को त्याग देगा, यह आने वाला वक्त ही बताएगा।
फिलहाल लेबनान की जनता इस 10 दिन के सीजफायर की खुशी में अपने घरों को लौटती दिख रही है। यह शांति की दिशा में एक छोटा लेकिन सकारात्मक कदम माना जा रहा है।