दोस्तों कुछ तो बड़ा होने वाला है। नहीं, भाई, वो नहीं जो आप सोच रहे हैं, पर उससे भी ज्यादा कुछ अलग और बड़ी चीज हो सकती है।
यहां पर एक बहुत बड़ा अपडेट निकलकर आ रहा है कि ऑस्ट्रेलिया और यूके (UK) में अगर आप iPhone की कुछ पर्टिकुलर ऐप्स डाउनलोड करना चाहते हैं तो अब आपको एज वेरिफिकेशन (Age Verification) करना होगा। अगर आपकी उम्र 18 साल से नीचे है, तो आप कोई भी ऐसी एप्लीकेशन नहीं डाल सकते जो आपके लिए नहीं बनी है।
हैरानी की बात तो यह है कि उस हार्डवेयर के लिए भी आपको रोका जा रहा है जिसके लिए आपने पहले ही पूरे पैसे दे रखे हैं। अब आप सोच रहे होंगे कि भाई इसका इंडिया से क्या मतलब है और हमें इससे क्या फर्क पड़ता है?
अरे मेरे दोस्त, जो इंडिया का डिजिटल डाटा प्रोटेक्शन एक्ट (Digital Data Protection Act) है, वो अभी कुछ ही दिनों में आने वाला है। उसमें यह बात बिल्कुल क्लियरली लिखी गई है कि अगर आप 18 साल से नीचे हो तो आपको विशेष नियमों का पालन करना होगा।
वहां साफ लिखा है कि ऐसी कोई भी चीज जो 18 साल से ऊपर के लोगों के लिए बनी है, उसे इस्तेमाल करने के लिए आपको अपने पेरेंट्स का कंसेंट (Parental Consent) चाहिए होगा। अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर ये कंसेंट या अनुमति दी कैसे जाएगी और इसे वेरीफाई कैसे किया जाएगा?
अगर हम बाहर के देशों की बात करें जैसे अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और यूके, तो वहां पर फिलहाल दो तरीके इस्तेमाल किए जा रहे हैं। पहला तरीका यह है कि आप अपने क्रेडिट कार्ड (Credit Card) के जरिए अपनी उम्र को वेरीफाई करवाएं।
दूसरा तरीका यह है कि आपको कोई सरकारी डॉक्यूमेंट (ID Proof) वहां पर अपलोड करना होगा या लगाना होगा। चलो ठीक है, सुनने में यह ठीक लगता है ,लेकिन असल प्रॉब्लम पता है—इसमें क्या है?
सबसे बड़ी समस्या यह है कि हर किसी के पास क्रेडिट कार्ड नहीं है। तो ऐसी स्थिति में एक आम इंसान अपनी उम्र को कैसे वेरीफाई करेगा कि वह 18 साल से ऊपर का है?
अब मान लीजिए कोई इंसान ऑस्ट्रेलिया या यूके में है और वह सच में 18 साल से ऊपर का है, लेकिन उसके पास क्रेडिट कार्ड नहीं है। तो भाई वह चाहकर भी यह वेरीफाई नहीं कर सकता कि वह बालिग है।
इसका नतीजा यह होगा कि जिस iPhone के लिए उसने भारी-भरकम पैसे दिए हैं, उसमें वह ऐप नहीं डाल पाएगा जो 18 साल से ऊपर के लिए बनी है। इसमें सबसे डराने वाली बात यह है कि वह ऐप कोई फाइनेंशियल ऐप (Financial App) भी हो सकती है।
जरूरी नहीं कि वह सिर्फ गेम हो, वह कोई बहुत ज्यादा यूज़फुल ऐप भी हो सकती है जिसे आप रोजमर्रा की जिंदगी में इस्तेमाल करते हो। अब अगर आपके पास वेरिफिकेशन का जरिया नहीं है, तो आप उसे यूज ही नहीं कर सकते।
यही वजह है कि इस नए सिस्टम को बहुत ज्यादा क्रिटिसाइज किया जा रहा है और दुनिया भर में इस पर बहस छिड़ गई है। अब बात करते हैं भारत की, तो इंडिया में यह नियम 100% आ जाएगा क्योंकि हमारा डाटा प्रोटेक्शन कानून इसी तरफ इशारा कर रहा है।
भारत में जो नियम आने वाला है और एप्पल की जो यह एज वेरीफाई करने की तकनीक है, ये दोनों आपस में काफी ज्यादा मैच कर रही हैं। सरकार का तर्क यह है कि इसे इसलिए बनाया गया है ताकि 18 साल से नीचे के बच्चों को गलत कंटेंट से बचाया जा सके।
अब आप कहेंगे कि चलो ठीक है, हम तो एप्पल (Apple) इस्तेमाल ही नहीं करते तो हमें क्या डर? लेकिन क्या आपको वाकई नहीं दिख रहा है कि भविष्य में क्या होने वाला है?
अगर आप इंटरनेट पर कुछ ऐसी चीज देखते हो जो 18 साल से ऊपर के लोगों के लिए है और आप अभी 18 के नहीं हुए हो, तो आपके लिए मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। या फिर मान लीजिए आप 18 के हो चुके हैं लेकिन किसी तरीके से आप यह प्रूफ नहीं कर सकते कि आपकी उम्र क्या है।
ऐसी स्थिति में आप वो कंटेंट या वो सर्विस नहीं देख पाएंगे और वह आपके लिए कंप्लीटली बैन (Complete Ban) हो जाएगी। इससे हमारे देश में काफी ज्यादा हाहाकार मचने की संभावना है, क्योंकि यह सीधे तौर पर आपकी डिजिटल लाइफ को कंट्रोल करेगा।
खासकर उन लोगों की अंदरूनी और निजी जिंदगी में बहुत बड़ी दिक्कत आएगी जो शायद 18 साल से ऊपर के हैं लेकिन उनके पास डिजिटल प्रूफ देने का कोई रास्ता नहीं है। अब सवाल यह है कि आखिर इंडिया में यह चीज कैसे वेरीफाई होगी?
देखो भाई, इस उम्र को वेरीफाई करने के लिए अलग-अलग कंपनियों के अपने-अपने अलग तरीके होने वाले हैं। उदाहरण के लिए चैट जीपीटी (ChatGPT) जैसी कंपनी को ही ले लीजिए, जो सीधे तौर पर अमेरिकी सरकार के साथ मिलकर काम कर रही है।
खबरें आ रही हैं कि वह भी अब इंटरनली एज वेरीफाई कराने के लिए बोल रही है ताकि यूजर्स की पहचान पुख्ता की जा सके। कंपनियां आपसे कहेंगी कि भाई अब तुम्हारा टाइम आ गया है, थोड़ा सा बता दो कि तुम कितने साल के हो।
वो आपसे कहेंगे कि अपना बायोमेट्रिक्स (Biometrics) दे दो या अपना कोई और निजी डाटा उनके साथ शेयर कर दो। ऐसी कंपनी जो अमेरिकी सरकार के साथ जुड़ी है, उसे अपना इतना सेंसिटिव डाटा देना वाकई डराने वाला है।
सच कहूँ तो मैं आज सोकर उठा और जैसे ही यह न्यूज़ देखी, मेरा दिमाग पूरी तरह से खराब हो गया। मेरा आज काम करने का बिल्कुल मन नहीं था, लेकिन मैं फिर भी आ गया क्योंकि मुझे लगा कि यह खबर आप तक पहुंचाना बहुत जरूरी है।
सबसे बड़ा झटका तो उन लोगों को लगेगा जो इंटरनेट पर एडल्ट कंटेंट देखते हैं, क्योंकि एडल्ट कंटेंट पूरी तरह बैन हो जाएगा इंडिया में अगर आप अपनी उम्र साबित नहीं कर पाए। आप चाहकर भी उसे नहीं देख पाओगे जब तक आप अपनी एज वेरीफाई नहीं करोगे।
हो सकता है कि भारत में इसके लिए डिजिलॉकर (Digilocker) से आधार का वेरिफिकेशन अनिवार्य कर दिया जाए। हालांकि अभी तक भारत में ऐसा कोई लिखित नियम नहीं आया है, लेकिन मैं आपको बता रहा हूं कि यह 100% आने वाला है।
इससे आगे चलकर बहुत बड़ी आफत आने वाली है, और यह सिर्फ फोन में ऐप डालने तक सीमित नहीं रहेगा। यह बात iPhone से शुरू होकर बहुत आगे तक जाएगी और पूरे इंटरनेट इकोसिस्टम को बदल कर रख देगी।
जब चैट जीपीटी जैसी दिग्गज कंपनियां बायोमेट्रिक्स मांगना शुरू करेंगी, तो क्या हम अपना रेटिना स्कैन (Retina Scan), अपना फेस और अपने फिंगरप्रिंट उन्हें सौंप देंगे? क्या हम अपनी प्राइवेसी को पूरी तरह से सरकार और इन कंपनियों के हाथ में दे देंगे?
मेरा तो यह सोचकर ही दिमाग खराब है कि क्या वाकई हम इसी दिशा में जा रहे हैं? अगर ऐसा होता है तो आगे चलकर प्राइवेसी नाम की कोई चीज नहीं बचेगी और हर चीज पर पहरा होगा।
यही एक बहुत बड़ा अपडेट था जो मैं आप लोगों को देना चाहता था, चाहे मैं इस वक्त केला ही क्यों न खा रहा हूं, पर यह खबर गंभीर है। आगे अगर इंडिया में इसको लेकर कोई और नया अपडेट या कोई नियम आता है, तो मैं आपको जरूर बताऊंगा।
अभी के लिए बस इतना समझ लीजिए कि आपकी डिजिटल आजादी पर एक बहुत बड़ा खतरा मंडरा रहा है। अपनी उम्र साबित करने के लिए तैयार रहिए, वरना आपकी पसंदीदा एप्स और कंटेंट आपसे हमेशा के लिए दूर हो सकते हैं।
यह डाटा प्रोटेक्शन एक्ट भारत के डिजिटल भविष्य को पूरी तरह से बदलकर रख देगा। हमें यह देखना होगा कि सरकार इसे लागू करने के लिए आम जनता को कितनी सहूलियत देती है या फिर यह सिर्फ एक और मुश्किल बनकर उभरेगा।