बैंकों के कॉल से परेशान? जानें कैसे बचाएं अपना नंबर, जब किसी और के लोन का नंबर हो आपका!

बैंकों के कॉल से परेशान? जानें कैसे बचाएं अपना नंबर, जब किसी और के लोन का नंबर हो आपका!
Story at a Glance:
  • जब अनजाने में बन जाएं किसी और के लोन के गारंटर!
  • प्रारंभिक समाधान: शांत रहें और समझाएं
  • लिखित शिकायत का महत्व

क्या कभी ऐसा हुआ है कि आपके मामा या किसी और रिश्तेदार ने बैंक से लोन लिया हो और गलती से आपका नंबर दे दिया हो? और फिर बैंक वाले आपको लगातार कॉल करके परेशान करने लगे? यह सुनने में भले ही छोटी बात लगे, लेकिन यह अनुभव किसी के लिए भी बहुत सिरदर्द साबित हो सकता है।

ऐसा ही एक मामला हाल ही में सामने आया, जहां एक सब्सक्राइबर ने कमेंट किया कि किसी परिचित ने लोन लेते समय उनका मोबाइल नंबर गलती से डाल दिया था, जिसके कारण उन्हें बैंक से लगातार रिमाइंडर कॉल आ रहे थे। सवाल यह है कि ऐसी स्थिति में क्या किया जाए? आखिर ऐसे परेशान करने वाले कॉलों से कैसे बचा जा सकता है?

जब अनजाने में बन जाएं किसी और के लोन के गारंटर!

जब आप किसी बैंक से लोन लेते हैं, तो कुछ खास प्रक्रियाएं होती हैं। डिजिटल माध्यम से लोन लेते समय, आपके मोबाइल नंबर का ओटीपी वेरिफिकेशन होता है। यह सुनिश्चित करता है कि नंबर आपका ही है।

लेकिन, ऑफलाइन प्रक्रिया में, जब आप फॉर्म भरते हैं, तो कम्युनिकेशन और रिमाइंडर के लिए एक मोबाइल नंबर मांगा जाता है। अगर इस जगह पर किसी और का नंबर डाल दिया गया, और उसका ओटीपी वेरिफिकेशन नहीं होता, तो यह समस्या खड़ी कर सकता है। ऐसे में, बैंक वाले उस नंबर पर कॉल करके ईएमआई ड्यूज या अन्य रिमाइंडर भेजते रहेंगे।

यह अनुभव मेरे साथ भी हुआ था, जब मेरे मामा जी ने बैंक से लोन लिया और गलती से मेरा नंबर दे दिया। बैंक वाले लगातार मुझे ही कॉल करके परेशान करने लगे। मैंने उन्हें समझाने की बहुत कोशिश की कि यह नंबर मेरा है, लेकिन वह व्यक्ति जिसका लोन है, उसका नहीं। पर बैंक वाले सुनने को तैयार नहीं थे।

प्रारंभिक समाधान: शांत रहें और समझाएं

पहली और सबसे ज़रूरी बात, शांत रहें। जब बैंक से कॉल आए, तो विनम्रता से समझाएं कि गलती से आपका नंबर कम्युनिकेशन के लिए दे दिया गया है। उन्हें बताएं कि यह नंबर लोन लेने वाले व्यक्ति का नहीं है और अनुरोध करें कि आपके नंबर को अपने डेटाबेस से हटा दिया जाए।

हालांकि, अक्सर ऐसा होता है कि कॉल सेंटर में काम करने वाले लोगों के पास इस तरह के बदलाव करने का अधिकार नहीं होता। वे केवल दिए गए निर्देशों का पालन करते हैं। कई बार ये कॉल ऑटोमेटेड सिस्टम या बीपीओ से भी आते हैं, जहाँ व्यक्तिगत हस्तक्षेप की संभावना कम होती है।

💡 अधिकतर मामलों में, कॉल सेंटर कर्मचारियों के पास आपके नंबर को डेटाबेस से हटाने का सीधा अधिकार नहीं होता है।

लिखित शिकायत का महत्व

अगर आपकी बात नहीं सुनी जाती है, तो अगला कदम एक लिखित शिकायत दर्ज कराना है। आप जिस बैंक से कॉल आ रहा है, उसकी नज़दीकी ब्रांच में जाकर या उनकी आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से शिकायत कर सकते हैं।

शिकायत में, स्पष्ट रूप से उल्लेख करें कि आपका मोबाइल नंबर गलती से किसी अन्य व्यक्ति के लोन खाते के लिए कम्युनिकेशन के उद्देश्य से दर्ज किया गया है। यह भी बताएं कि आप इस संबंध में किसी भी जिम्मेदारी से अवगत नहीं हैं।

अगर आपको बैंक का नाम या ब्रांच पता है, तो वहां जाकर संपर्क करना सबसे अच्छा रहेगा। अगर ऐसा संभव नहीं है, तो बैंक की आधिकारिक वेबसाइट पर 'ग्रेविएंस रिड्रेसल' या 'कंप्लेंट' सेक्शन में जाकर अपनी समस्या का विस्तृत विवरण दें।

ऑनलाइन शिकायत का प्रभावी तरीका

आजकल लगभग सभी बैंकों की अपनी वेबसाइट पर नेट बैंकिंग या ऑनलाइन पोर्टल की सुविधा होती है। आप इन पोर्टलों के माध्यम से भी अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। अपनी शिकायत में, लोन लेने वाले व्यक्ति का नाम (यदि ज्ञात हो), लोन का विवरण (यदि पता हो), बैंक का नाम, ब्रांच का नाम और आपके मोबाइल नंबर का गलत उपयोग जैसी सभी प्रासंगिक जानकारी शामिल करें।

ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने के बाद, आपको एक शिकायत संदर्भ संख्या (Acknowledgement Number) मिलेगी। इसे सुरक्षित रखें, क्योंकि यह भविष्य में आपके लिए सहायक हो सकती है।

💡 लिखित शिकायत दर्ज कराना, खासकर बैंक की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से, एक मजबूत कदम है जो कार्रवाई को प्रेरित कर सकता है।

डीएनडी (Do Not Disturb) ऐप का उपयोग

यदि बैंक की शिकायत के बाद भी कॉल आना बंद नहीं होता है, तो आप भारत सरकार के Do Not Disturb (DND) एप्लिकेशन का सहारा ले सकते हैं। इस ऐप को अपने मोबाइल पर इंस्टॉल करें और अपने नंबर से ओटीपी वेरिफिकेशन कराएं।

जब भी आपको किसी ऐसे नंबर से परेशान करने वाला कॉल या मैसेज आए, तो तुरंत उस नंबर को DND ऐप के माध्यम से रिपोर्ट करें। आप 'फाइनेंशियल हरासमेंट' या 'स्पैम' जैसे विकल्पों को चुनकर अपनी रिपोर्ट दर्ज करा सकते हैं।

डीएनडी ऐप कैसे काम करता है?

जब आप DND ऐप के माध्यम से किसी नंबर को रिपोर्ट करते हैं, तो यह टेलीकॉम ऑपरेटर (जैसे Airtel, Jio) को सूचित करता है। ऑपरेटर उस नंबर या बल्क एसएमएस आईडी को एक चेतावनी जारी करता है। यदि बार-बार ऐसी गतिविधियां होती हैं, तो उस नंबर या आईडी को ब्लॉक भी किया जा सकता है।

यह प्रक्रिया यह सुनिश्चित करती है कि आपके नंबर पर आने वाले अनचाहे और परेशान करने वाले कॉलों पर कार्रवाई हो। टेलीकॉम ऑपरेटर से एकनॉलेजमेंट मिलने के बाद, कार्रवाई की संभावना बढ़ जाती है।

💡 DND ऐप का उपयोग करके, आप अनचाहे कॉलों को ब्लॉक करने और परेशान करने वाली संस्थाओं के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने में सक्षम होते हैं।

अंतिम उपाय: आरबीआई (RBI) से संपर्क

यदि उपरोक्त सभी उपाय विफल हो जाते हैं और बैंक या टेलीकॉलर आपको लगातार परेशान करते रहते हैं, तो अंतिम विकल्प भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से संपर्क करना है।

जब आपको कोई कॉल आए, तो धैर्यपूर्वक पूरी जानकारी लें: लोन की राशि, ईएमआई की राशि, किस खाते में जमा करना है, आदि। भले ही यह आपका लोन न हो, लेकिन पूरी जानकारी जुटाना आवश्यक है।

इस सारी जानकारी के साथ, आरबीआई को एक औपचारिक पत्र लिखें। पत्र में, अपनी पिछली शिकायतों (बैंक में ऑनलाइन/ऑफलाइन) का उल्लेख करें और यह भी बताएं कि टेलीकॉम ऑपरेटर के माध्यम से की गई रिपोर्ट के बावजूद कोई समाधान नहीं मिला है।

यह दर्शाता है कि आपने समस्या को हल करने के लिए सभी प्रासंगिक माध्यमों का उपयोग किया है। आरबीआई इस मामले को गंभीरता से लेता है और बैंकों पर उचित कार्रवाई के लिए दबाव बना सकता है।

जब आप यह सब कदम उठाते हैं, तो बैंक या संबंधित संस्था को यह अहसास हो जाता है कि आप इस मामले में गंभीर हैं और आगे की कार्रवाई कर सकते हैं। इसके बाद, वे आपको परेशान करना बंद कर देते हैं और माफी भी मांग सकते हैं, क्योंकि वे नहीं चाहेंगे कि मामला आरबीआई तक पहुंचे या उनके ऊपर कोई कार्रवाई हो।

Rajesh Kashyap

Digital & Tech enthusiast। पिछले कई सालों से Geopolitics, Indian Finance और EV sector को closely follow कर रहा हूँ। Behind The Fold (behindthefold.in) का Founder — जहाँ हम headlines के पीछे की असली कहानी लाते हैं।

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