एक समय था जब Apple को Nokia जैसी कंपनी समझा जा रहा था, जिसका भविष्य उज्ज्वल नहीं था। यह सोचा गया था कि कंपनी धीरे-धीरे विफल हो जाएगी क्योंकि वह पर्याप्त नवाचार नहीं कर रही थी।
हाल की रिपोर्टों और लीक्स से पता चलता है कि Microsoft, Google और Meta जैसी सभी प्रमुख कंपनियाँ अपने AI उत्पाद लॉन्च कर रही हैं। Microsoft का Co-Pilot, Google का Gemini, और Meta के Llama AI और Meta AI बाजार में आ चुके हैं।
लेकिन Apple, जिसके पास आज के समय में सबसे ज़्यादा नकदी और बैंक बैलेंस है, AI क्षेत्र में पिछड़ती हुई नज़र आ रही थी। इसके पीछे का मुख्य कारण यह है कि Apple को मुख्य रूप से एक हार्डवेयर कंपनी माना जाता है।
Apple अपने सबसे ज़्यादा पैसे iPhone बेचकर कमाती है, जिस पर उनका लाभ मार्जिन बहुत अधिक है। इसके विपरीत, Google जैसे कंपनियाँ अपने सॉफ्टवेयर पर ज़्यादा निर्भर करती हैं। GPT के आने के बाद Google Search को खतरा महसूस हुआ, इसलिए उन्होंने Gemini को Google Search में एकीकृत करने और अपने अन्य उत्पादों में भी इसे शामिल करने का निर्णय लिया।
Google का Pixel Phone भले ही एक हार्डवेयर उत्पाद हो, लेकिन असली कमाई उन्हें अपनी सेवाओं से होती है। Microsoft ने भी अपने AI उत्पादों को इसी तरह पेश किया है। Meta, जो मुख्य रूप से एक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म है, ने Instagram और WhatsApp जैसे अपने प्लेटफार्मों में AI को एकीकृत किया है।
हाल की रिपोर्टों के अनुसार, Apple का पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) अन्य प्रमुख तकनीकी कंपनियों जैसे Meta, Amazon, Google और Microsoft की तुलना में सबसे कम है। ये कंपनियाँ AI में भारी निवेश कर रही हैं, जिससे AI का बुलबुला बना हुआ है।
Apple ने यह निर्णय लिया कि Apple Intelligence किसी भी Apple हार्डवेयर में, डिवाइस के अंदर ही चलेगा। वे यह नहीं चाहते कि उपयोगकर्ता की जानकारी कहीं बाहर जाए, क्योंकि Apple हमेशा से अपनी गोपनीयता (privacy) पर जोर देता रहा है।
यह धारणा बनाई गई है कि Android में उतनी गोपनीयता नहीं है जितनी Apple में है। इसी वजह से, जब Apple Intelligence लॉन्च हुआ, तो वह पुराने iPhones पर नहीं चल रहा था। इसे चलाने के लिए iPhone 15 Pro या Apple Silicon वाले MacBooks की आवश्यकता थी।
Apple Silicon वाले MacBooks पर भी उतना ध्यान नहीं दिया गया था, न ही उनके फीचर्स को अच्छी तरह से प्रस्तुत किया गया था। कई लोगों ने इसकी आलोचना भी की कि Apple AI को संभालने के लिए पर्याप्त तैयारी नहीं कर रहा है।
AI के क्षेत्र में इतनी प्रगति के बावजूद, Apple Intelligence से जुड़ी कोई बड़ी खबर सामने नहीं आई थी। ऐसा लग रहा था कि जब दुनिया AI पर इतना काम कर रही है, तो Apple पीछे क्यों छूट रहा है।
इसके पीछे एक बड़ा कारण यह भी था कि Apple जैसी बड़ी कंपनी के लिए अपना AI मॉडल बनाना, जैसे कि Llama, एक बहुत बड़ा और जटिल काम है। इसमें बहुत अधिक संसाधन और डेटा की आवश्यकता होती है, और इसकी कोई गारंटी नहीं थी कि यह सफल होगा।
अगर Apple एक ऐसा AI मॉडल लेकर आता जो OpenAI के GPT या Google के Gemini जैसा सुपीरियर नहीं होता, तो उनकी आलोचना होती कि वे उस स्तर का उत्पाद क्यों नहीं बना पा रहे हैं।
लेकिन हाल ही में, एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। Apple और Google, जो सालों से एक-दूसरे के प्रतिद्वंद्वी रहे हैं, एक साथ आ रहे हैं। Apple Intelligence में Google के Gemini को एकीकृत किया जाएगा।
यह सुनकर थोड़ा आश्चर्यजनक लग सकता है, लेकिन यह सौदा Apple के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। Google अपना मॉडल प्रदान करेगा, जो Apple के सर्वर पर चलेगा, और कुछ फीचर्स iPhone पर भी चलेंगे।
यह भी दावा किया जा रहा है कि भविष्य के iOS संस्करणों में यह एक उन्नत AI असिस्टेंट के रूप में काम करेगा, जो Siri का उपयोग करके सीधे आपके iPhone पर काम कर सकेगा।
Google भी धीरे-धीरे अपने Android सिस्टम को AI से सशक्त कर रहा है, जिससे AI अब केवल सतही तौर पर काम नहीं करेगा, बल्कि यह ऑपरेटिंग सिस्टम के डीप लेवल तक पहुंचेगा। इससे Android और iOS के बीच की दूरी कम हो जाएगी।
ऐसा लगता है कि iOS और Android के बीच की प्रतिद्वंद्विता अब पुरानी होती जा रही है। Apple पहले से ही उन डिवाइस पर ध्यान केंद्रित कर रहा था जिनमें AI प्रोसेसिंग के लिए पर्याप्त क्षमता थी, जैसे कि iPhone 15 Pro।
और अब, iPhone 16 सीरीज़ में, हमें Google Gemini द्वारा संचालित एक नया और बेहतर AI असिस्टेंट मिलेगा, जो अंततः Siri को ChatGPT और Google Gemini से मुकाबला करने में मदद करेगा।
हालांकि बैकएंड में Gemini चलेगा, Apple हार्डवेयर की दौड़ में पीछे नहीं रहना चाहता। Apple आज भी हार्डवेयर बेचना चाहती है, और उन्हें पता है कि iPhone की बिक्री अपने चरम पर पहुँच चुकी है।
Apple जानता है कि iPhone को जितनी ग्रोथ मिल सकती थी, वह मिल चुकी है। अब उनकी नज़रें भारत जैसे उभरते बाजारों पर हैं।
Apple अब AI से ज़्यादा अपने हार्डवेयर व्यवसाय पर ध्यान केंद्रित करना चाहता है और अपने इकोसिस्टम में AI को एकीकृत करके नए उत्पाद लॉन्च करना चाहता है।
यह इकोसिस्टम में AirPods, Apple Watch, MacBook और iPads जैसी मौजूदा चीजों को एकीकृत करने की ओर इशारा करता है।
Apple का अगला बड़ा कदम AI-संचालित ग्लास हो सकता है, जो Vision Pro से बिल्कुल अलग होगा। यह VR या AR ग्लास नहीं होगा, बल्कि एक ऑगमेंटेड ऑडियो ग्लास होगा, जो Meta के ग्लास जैसा लेकिन उससे बेहतर और स्टाइलिश होगा।
अगर Apple अपने इकोसिस्टम में AI ग्लास को एकीकृत करता है, तो यह एक बहुत बड़ी श्रेणी बन सकती है। AI ग्लास Apple को लाइफस्टाइल श्रेणी में ले जाएगा, जहाँ लोग इसे स्टाइल स्टेटमेंट के रूप में देखेंगे।
Apple इन AI ग्लास को इस तरह से डिजाइन करेगा कि वे एक फैशन स्टेटमेंट बन जाएं, और लोग उन्हें दिखाना पसंद करें।
हालांकि, Apple का मुख्य ध्यान फिलहाल AI हार्डवेयर पर नहीं है। उन्हें लगता था कि Metaverse और VR के आने से Vision Pro एक अच्छा उत्पाद बन सकता है, लेकिन इसकी अत्यधिक कीमत के कारण यह उतना सफल नहीं हुआ।
इसके अलावा, Apple AI-संचालित Airpods, Air Camera और LiDAR सेंसर पर भी काम कर रहा है। ये डिवाइस Siri के साथ एकीकृत होंगे, जिससे आप सीधे Siri से बात कर पाएंगे और बाहरी दुनिया के बारे में जानकारी प्राप्त कर पाएंगे।
भविष्य में AI-संचालित रोबोट्स पर भी चर्चा चल रही है, जिसके बारे में आधिकारिक लीक्स भी सामने आए हैं। Apple ऐसे कई उपकरणों पर काम कर रहा है।
इसका मुख्य कारण यह है कि Apple जानता है कि वह मौजूदा iPhone उपयोगकर्ताओं और Apple उपयोगकर्ताओं को लक्षित करके बहुत अधिक लाभ कमा सकता है।
आने वाले चार से पांच सालों में, iOS बनाम Android की जंग पुरानी होती चली जाएगी। AI के गहरे एकीकरण के साथ, यह दौड़ बहुत व्यापक हो जाएगी।
Apple के हार्डवेयर उत्पादों पर लाभ मार्जिन बहुत अधिक है। भले ही रैम की कीमतों में थोड़ी वृद्धि हो, Apple इसे छह महीने से एक साल तक नियंत्रित कर सकता है।
Apple की रणनीति से अगले चार-पांच सालों में यह स्पष्ट हो जाएगा कि कंपनी बाजार में कैसे जीवित रहेगी और इसका हार्डवेयर भविष्य किस दिशा में जाएगा।