iPhone 17E: Apple का सबसे बड़ा धोखा? 65,000 में वही पुराना फोन, आप भी हो सकते हैं शिकार!

iPhone 17E: Apple का सबसे बड़ा धोखा? 65,000 में वही पुराना फोन, आप भी हो सकते हैं शिकार!

Apple ने एक बार फिर अपने fans को चौंका दिया है, लेकिन इस बार शायद खुशी से नहीं। iPhone 17E के लॉन्च ने कई सालों के इंतज़ार को खत्म किया, लेकिन क्या यह वाकई में कोई नया डिवाइस है, या सिर्फ एक पुराना repackaging? यह सवाल कई लोगों के मन में है, और इसके जवाब आपको हैरान कर सकते हैं।

कई सालों से लोग iPhone 17E का इंतज़ार कर रहे थे, लेकिन जब यह सामने आया, तो कई लोगों को निराशा हुई। यह सच है कि iPhone 16T बेस्ट सेलिंग फोन था, लेकिन क्या वह बेस्ट फोन था? इस सवाल का जवाब iPhone 17E के लॉन्च में छुपा है।

Apple ने iPhone 16T के समान डिज़ाइन, स्ट्रक्चर और फीचर्स के साथ iPhone 17E पेश किया है। ऐसा लगता है जैसे उन्होंने iPhone 14 के पुराने पुर्जों का इस्तेमाल करके एक नया फोन बना दिया हो। यह कदम Apple के लिए एक जीनियस स्कैम की तरह लग सकता है, जहाँ वे पुराने हार्डवेयर को नए नाम से बेचकर मुनाफा कमा रहे हैं।

💡 "Apple का यह कदम उनके पुराने मॉडल्स का इस्तेमाल करके एक नया फोन बनाने जैसा है, जो कुछ लोगों के लिए एक 'जीनियस स्कैम' हो सकता है।"

iPhone 17E में वही 60Hz का डिस्प्ले है, जो डायनामिक आइलैंड के साथ आता है। यह Apple के iOS का समर्थन करता है और भविष्य के iOS संस्करणों के साथ भी संगत रहेगा। साथ ही, इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का भी सपोर्ट है, जिसका मतलब है कि भविष्य में आने वाले जेनेरेटिव AI फीचर्स को भी आप इस iPhone में इस्तेमाल कर पाएंगे।

इस फोन की कीमत लगभग 65,000 रुपये से शुरू होती है, और EMI विकल्पों के साथ यह आपको लगभग 80,000 रुपये तक पड़ सकता है। अब आप सोचिए, अगर Apple iPhone 17E में एक और कैमरा जोड़ देता, तो यह मार्केट में 65,000 रुपये की रेंज में एक बेहतर विकल्प हो सकता था।

यहाँ तक कि iPhone 16T, जो इससे पुराना मॉडल है, उसमें भी एक अतिरिक्त कैमरा देखने को मिल सकता है, जो एक समझदारी भरा फैसला होता। यह तुलना सीधे तौर पर यह दिखाती है कि Apple किस दिशा में जा रहा है।

Apple ने अतीत में भी ऐसे कदम उठाए हैं। iPhone SE को भी शुरुआत में एक "स्टुपिड एडिशन" कहा गया था, लेकिन यह सबसे अच्छा परफॉर्म करने वाले फोनों में से एक साबित हुआ। iPhone SE भारत में उतना नहीं बिका जितना iPhone 15, iPhone 16, या iPhone 16 Pro बिके।

iPhone 17E कुछ लोगों ने ही खरीदा है, और यह उतना सफल नहीं रहा है। अगर आप मार्केट में Samsung या Motorola जैसे ब्रांड्स को देखेंगे, तो वे भारतीय बाजार में बहुत मजबूत हैं। Apple के कुछ प्रोडक्ट्स वहां के मार्केट में मौजूद ही नहीं हैं, जिसका सीधा असर उनकी बिक्री पर पड़ता है।

Apple के साथ एक मोबाइल फोन इकोसिस्टम मिलता है, जो iOS पर आधारित होता है। यह बहुत आकर्षक हो सकता है। यही वह सबसे बड़ी चीज़ है जो Apple को पावर देती है - वे लगातार नए उत्पाद निकालते रहेंगे, और इसीलिए इसे एक जीनियस स्कीम कहा जा सकता है।

💡 "Apple अपने पुराने मॉडल्स का इस्तेमाल करके एक नया iPhone बना रहा है, लेकिन सवाल यह है कि क्या उपभोक्ता इस 'नए' उत्पाद के लिए अधिक भुगतान करने को तैयार हैं?"

Apple के पास पुराने iPhone 14 के स्ट्रक्चर, डिस्प्ले और अन्य पुर्जे पड़े हैं। तो क्यों न उनमें से थोड़ा बदलाव करके एक नया iPhone बना दिया जाए? एक ऐसी चिप जो लोगों को यह कहने पर मजबूर कर दे कि यह कुछ नया है।

अगर Apple को पता है कि कोई उत्पाद बिकेगा, तो वह उसे जरूर बनाएगा। लेकिन वे इसकी कीमत ज्यादा नहीं बढ़ा पाएंगे। इसीलिए उन्होंने 256GB की स्टोरेज को एक बड़े अपग्रेड के रूप में पेश करने की कोशिश की है।

Apple की फिलॉसफी सीधी है: उपयोगकर्ताओं को ऊपर वाले संस्करणों पर शिफ्ट करना। Apple का प्लान है कि जो लोग एंट्री-लेवल iPhone लेना चाहते हैं, उनके लिए किसी न किसी तरह से एक नया iPhone उपलब्ध हो।

Apple अपने प्रोडक्ट्स को इस तरह से डिज़ाइन करता है कि वे लंबे समय तक चलें और iOS का सॉफ्टवेयर अपडेट प्राप्त करते रहें। यही कारण है कि Apple के लिए यह महत्वपूर्ण है कि उपयोगकर्ता उनके इकोसिस्टम में बने रहें।

Apple का सॉफ्टवेयर अनुभव वैश्विक स्तर पर बहुत मजबूत है। Apple का मुकाबला एंड्रॉइड से उतना नहीं है, जितना खुद से है। एक उपभोक्ता के रूप में, हमें इस उत्पाद को नजरअंदाज करके अन्य विकल्पों पर जाना चाहिए।

अगर Apple की बिक्री लंबी अवधि में प्रभावित होती है, तो उन्हें अपनी प्राइसिंग पर पुनर्विचार करना होगा। Apple जानता है कि लोग उनके बारे में बहुत बात करते हैं, और उन्हें आलोचना का सामना करना पड़ता है।

इसके बावजूद, iPhone विश्व स्तर पर नंबर एक बिकने वाला फोन है। लेकिन समस्या तब आती है जब एक नया मॉडल वैसा ही प्रदर्शन नहीं कर पाता है। Apple को लगता है कि वे बस एक नया नंबर जोड़कर और उसी iPhone को रीपैक करके बिक्री बढ़ा सकते हैं।

Google Pixel 10 का उदाहरण भी ऐसा ही है। Pixel 10 और iPhone 17E दोनों ही एंट्री-लेवल फोन हैं। अगर आप उनकी तुलना करें, तो दोनों ही अपने-अपने सेगमेंट में अच्छे हैं।

💡 "यह सिर्फ iPhone 17E की बात नहीं है, Google Pixel 10 भी इसी ट्रेंड का हिस्सा है - पुराने को नए नाम से बेचना।"

Apple और Google अपने पिक्सल को अपने तरीके से चलाते हैं, और Google अपने पिक्सल से बहुत ज्यादा पैसा नहीं कमाता। लेकिन iPhone Apple के लिए एक प्रमुख बिक्री स्तंभ है।

Apple को पता है कि वे किसी भी कीमत पर पुराना मॉडल बेच सकते हैं, क्योंकि उनका iOS सॉफ्टवेयर ही काफी है। अगर किसी को iMessage चलाना है या Apple के इकोसिस्टम में आना है, तो उनके लिए यह सबसे अच्छा मॉडल है।

भले ही iPhone SE को पतला और स्लिम डिज़ाइन के लिए सराहा गया था, लेकिन यह मार्केट में सफल नहीं हुआ। Apple बाजार से फीडबैक लेता है और तय करता है कि कौन सा उत्पाद चल रहा है और कौन सा नहीं।

जो उत्पाद बिकते हैं, जैसे iPhone 17, 17 Pro, या Pro Max, उन पर Apple अपना ध्यान केंद्रित करता है। हो सकता है कि अगले साल iPhone 18E आए, और यह Apple की "जीनियस" रणनीति का हिस्सा हो।

Apple स्मार्ट तरीके से पैसा कमाता है। इसका मतलब है कि वे हर उस चीज़ का उपयोग करते हैं जो उनके पास है। जब कोई प्रॉपर प्रोडक्ट नहीं होता, तो कंज्यूमर को लगता है कि उन्हें एक ओवरप्राइस्ड उत्पाद बेचा जा रहा है।

💡 "क्या Apple का यह कदम उपभोक्ताओं के साथ धोखा है? 65,000 रुपये में वही पुराना अनुभव, जबकि बाज़ार में बेहतर विकल्प मौजूद हैं।"

iPhone 17E के बारे में यह कहा जा सकता है कि यह एक ऐसा उत्पाद है जो Apple के लिए पैसा कमाएगा, लेकिन यह उपभोक्ताओं के लिए कितना फायदेमंद है, यह एक बड़ा सवाल है।

Rajesh Kashyap

Digital & Tech enthusiast। पिछले कई सालों से Geopolitics, Indian Finance और EV sector को closely follow कर रहा हूँ। Behind The Fold (behindthefold.in) का Founder — जहाँ हम headlines के पीछे की असली कहानी लाते हैं।

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