- एलपीजी सिलेंडर की बढ़ती किल्लत: युद्ध का अप्रत्यक्ष प्रभाव?
- इनकम टैक्स विभाग की रेड: 7000 करोड़ के फेक बिलिंग रैकेट का खुलासा
- डिजिटल फॉरेंसिक और एनालिटिक्स की भूमिका
भारत में रेस्टोरेंट उद्योग पर मंडरा रहे खतरों की नई परतें सामने आ रही हैं। मुंबई जैसे शहरों में जहां 20% तक होटल बंद होने की कगार पर हैं और यह आंकड़ा 50% तक पहुंचने की आशंका है, वहीं इसके पीछे एलपीजी सिलेंडर की किल्लत के अलावा एक और गंभीर कारण सामने आ रहा है: इनकम टैक्स विभाग की ताबड़तोड़ छापेमारी।
एलपीजी सिलेंडर की बढ़ती किल्लत: युद्ध का अप्रत्यक्ष प्रभाव?
एलपीजी सिलेंडर की कमी को रेस्टोरेंट बंद होने का प्राथमिक कारण बताया जा रहा है। लेकिन इसके पीछे का सच कहीं अधिक जटिल है। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद से मध्य पूर्व में उत्पन्न अस्थिरता का असर अब सीधे तौर पर भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ रहा है। ईरान द्वारा स्टेट ऑफ होर्मुज पर लगाए गए प्रतिबंधों और कतर से भारत आने वाली एलएनजी (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) की आपूर्ति में बाधा के चलते कमर्शियल गैस सिलेंडरों की उपलब्धता पर गंभीर संकट आ गया है।
इसका सीधा असर यह हुआ है कि घरेलू उपयोग के एलपीजी सिलेंडरों की मांग बढ़ी है, जबकि कमर्शियल सिलेंडरों की आपूर्ति बाधित हो गई है। इस वजह से गैस की कीमतें भी आसमान छू रही हैं, जिससे रेस्टोरेंट संचालकों के लिए लागत निकालना मुश्किल हो गया है। मुंबई मिरर की एक रिपोर्ट के अनुसार, "रेस्टोरेंट गैस आपूर्ति में कटौती के कारण घबराए हुए हैं।"
यह संकट केवल मुंबई तक ही सीमित नहीं है। बेंगलुरु, चेन्नई, राजस्थान, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, पंजाब, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना जैसे विभिन्न राज्यों के शहरों में भी कमर्शियल एलपीजी गैस सिलेंडरों की आपूर्ति बाधित होने की खबरें आ रही हैं। एसोसिएशन ऑफ होटल एंड रेस्टोरेंट इन इंडिया (Ahar) ने सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप करने और गैस आपूर्ति सुनिश्चित करने की अपील की है।
इनकम टैक्स विभाग की रेड: 7000 करोड़ के फेक बिलिंग रैकेट का खुलासा
जहां एक ओर गैस संकट रेस्टोरेंट उद्योग पर भारी पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर इनकम टैक्स विभाग की कार्रवाई ने इस उद्योग में हड़कंप मचा दिया है। विभाग को 7000 करोड़ रुपये के एक बड़े फेक बिलिंग रैकेट का पता चला है, जिसके चलते देश भर के होटलों और रेस्टोरेंट्स पर छापेमारी की जा रही है।
यह खुलासा हैदराबाद की बिरयानी से शुरू हुआ, जब एक रेस्टोरेंट पर हुई छापेमारी में पाया गया कि मालिक टैक्स बचाने के लिए बिलों में हेरफेर कर रहा था। जांच में पता चला कि "पेट पूजा" नामक एक एप्लीकेशन का इस्तेमाल करके रेस्टोरेंट मालिक अपनी कैश बिक्री की एंट्री को डिलीट कर दे रहे थे, जिससे सरकार को लाखों-करोड़ों रुपये के टैक्स का चूना लग रहा था।
यह एप्लीकेशन रेस्टोरेंट्स को क्लाउड-आधारित मैनेजमेंट और बिलिंग सॉफ्टवेयर प्रदान करती थी। इस सॉफ्टवेयर की मदद से, रेस्टोरेंट मालिक आसानी से अपनी बिक्री के आंकड़े बदल सकते थे या डिलीट कर सकते थे, खासकर ऑफलाइन (कैश) लेनदेन के मामलों में। इस प्रकार, उन्होंने न केवल इनकम टैक्स बल्कि जीएसटी का भी भुगतान करने से परहेज किया।
डिजिटल फॉरेंसिक और एनालिटिक्स की भूमिका
इनकम टैक्स विभाग ने इस बड़े पैमाने पर होने वाली टैक्स चोरी का पता लगाने के लिए डिजिटल फॉरेंसिक और एनालिटिक्स लैब का इस्तेमाल किया। 60 से अधिक विभिन्न एप्लीकेशनों के ट्रांजेक्शन डेटा का विश्लेषण किया गया, जिसमें पाया गया कि देश भर के लगभग 1.77 लाख रेस्टोरेंट्स इस गोरखधंधे में लिप्त थे।
रिपोर्टों के अनुसार, इन रेस्टोरेंट्स ने लगभग 13,000 करोड़ रुपये के बिल डिलीट किए और 19,400 करोड़ रुपये के बिलों में संशोधन किया। कर्नाटक, तेलंगाना और तमिलनाडु जैसे राज्य इस तरह की टैक्स चोरी में सबसे आगे रहे। रेस्टोरेंट मालिकों ने चालाकी से ऑनलाइन लेनदेन के बजाय ऑफलाइन (कैश) लेनदेन के आंकड़ों में हेरफेर किया, यह सोचकर कि ऐसे मामलों में उनका पकड़ा जाना मुश्किल होगा।
सरकार की कार्रवाई और भविष्य की योजनाएं
इस गंभीर स्थिति को देखते हुए, सरकार ने **एसेंशियल कमोडिटी एक्ट 1955** लागू कर दिया है। इसके तहत, आवश्यक वस्तुओं की कालाबाजारी या जमाखोरी को दंडनीय अपराध माना जाएगा। सरकार ने एलपीजी, पीएनजी और सीएनजी की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए प्राथमिकताएं तय की हैं।
खाद कारखानों को 70%, अन्य उद्योगों को 80% और छोटे व्यवसायों व होटलों को 80% गैस आपूर्ति की जाएगी। इसके अलावा, घरेलू एलपीजी सिलेंडरों के लिए "इंटर बुकिंग पीरियड" को बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया है, जिसका अर्थ है कि अब आप 48 घंटे के बजाय 25 दिन बाद ही दूसरा सिलेंडर मंगवा पाएंगे। यह कदम रेस्टोरेंट्स के लिए एक और झटका है, क्योंकि वे अब घरेलू सिलेंडरों पर भी पहले की तरह निर्भर नहीं रह पाएंगे।
इनकम टैक्स विभाग ने देश भर में 62 शहरों में 46 बड़े रेस्टोरेंट्स पर छापेमारी की है, ताकि कर चोरी के इस खेल को रोका जा सके। यह कवायद राष्ट्रीय स्तर पर की जा रही है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई भी नागरिक या व्यवसाय सरकार को टैक्स देने से बच न सके।
आगे क्या?
मध्य पूर्व में युद्ध के हालात और टैक्स चोरी के खुलासे का दोहरा असर भारतीय रेस्टोरेंट उद्योग पर पड़ रहा है। एक तरफ गैस की किल्लत और बढ़ती कीमतें, तो दूसरी तरफ इनकम टैक्स विभाग की सख्त कार्रवाई। यह समय रेस्टोरेंट संचालकों के लिए न केवल चुनौतीपूर्ण है, बल्कि आम नागरिकों के लिए भी एक सबक है कि समय पर टैक्स चुकाना उनकी जिम्मेदारी है।
जैसे-जैसे हालात सामान्य होंगे, उम्मीद है कि सरकार और उद्योग मिलकर इन समस्याओं का समाधान निकालेंगे। लेकिन तब तक, रेस्टोरेंट पर निर्भर रहने वाले या बाहर खाना खाने के शौकीन लोगों को कुछ समय के लिए धैर्य रखना पड़ सकता है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ये दोनों बड़े मुद्दे, ऊर्जा संकट और टैक्स चोरी, भारतीय अर्थव्यवस्था पर कितना और क्या प्रभाव डालते हैं।