Citroen Basalt X: 4.3 मीटर SUV में अनपेक्षित वैल्यू, लेकिन क्या यह सबसे अच्छा विकल्प है?

Citroen Basalt X: 4.3 मीटर SUV में अनपेक्षित वैल्यू, लेकिन क्या यह सबसे अच्छा विकल्प है?

जब आपको वैल्यू फॉर मनी का एहसास होता है, तो वह भी फटाफट होता है, तो मज़ा दोगुना हो जाता है। इसी सोच के साथ पेश है द सिट्रॉइन बसॉल्ट X का 5 मिनट का रिव्यू, जो निश्चित रूप से वैल्यू फॉर मनी की परिभाषा को फिर से परिभाषित करती है।

यह 4.3 मीटर की कूपे एसयूवी उन फीचर्स से भरी हुई है जो अक्सर महंगी गाड़ियों में मिलते हैं। सोचिए, 360° कैमरा, ड्राइवर और सह-यात्री दोनों के लिए वेंटिलेटेड सीट।

और वो भी वायरलेस Android Auto और Apple CarPlay के साथ 10.25 इंच की टचस्क्रीन। आपको फोन कनेक्ट करने की भी जरूरत नहीं पड़ेगी; जैसे ही आप गाड़ी में बैठेंगे, यह अपने आप कनेक्ट हो जाएगी।

इसके अलावा, स्मार्ट कीलेस एंट्री और पुश-टच स्टॉप बटन जैसी सुविधाएं इसे और भी आधुनिक बनाती हैं। एडजस्टेबल अंडर-थाई सपोर्ट जो तीन लेवल तक एडजस्ट हो सकता है, लंबी यात्राओं को आरामदायक बनाता है।

विंग-स्टाइल हेडरेस्ट खास तौर पर तब उपयोगी होते हैं जब आप लंबी ड्राइव पर सोना चाहते हैं; यह आपकी गर्दन को लुढ़कने से रोकता है और आराम से सोने में मदद करता है। बाकी आर्मरेस्ट और हेडरूम जैसी सामान्य सुविधाएं तो हैं ही।

वायरलेस चार्जर, लेदर रेड इंटीरियर, और 4.3 मीटर की लंबाई के साथ 470 लीटर की विशाल बूट स्पेस - यानी बड़े बैग्स और पूरे परिवार का सामान आसानी से आ सकता है।

सभी LED लाइट्स, DRLs, LED प्रोजेक्टर हेडलैंप और फॉग लैंप्स रात में बेहतरीन रोशनी प्रदान करते हैं। हालांकि, इंडिकेटर अभी भी बल्ब सेटअप में हैं, जो एक छोटी सी कमी है।

💡 16-इंच के अलॉय व्हील्स इसकी स्पोर्टी अपील को बढ़ाते हैं, लेकिन क्या यह पर्याप्त है?

यह एक एसयूवी है, तो निश्चित रूप से आपको इसमें स्पोर्ट्स वाली फील भी चाहिए। इसीलिए इसमें 1.2L का टर्बो पेट्रोल इंजन है जो 110 PS पावर और 205 Nm टॉर्क जेनरेट करता है।

यह इंजन निश्चित रूप से पावरफुल है। हाँ, यह थ्री-सिलेंडर इंजन है, तो थोड़ी आवाज़ हो सकती है, लेकिन आपको पावर की कोई कमी महसूस नहीं होगी। यह कभी भी अंडरपावर्ड महसूस नहीं होगी, चाहे आपको पहाड़ी रास्तों पर चढ़ना हो या ओवरटेक करना हो।

अगर आपको मैनुअल ट्रांसमिशन पसंद है, तो सिक्स-स्पीड मैनुअल का विकल्प भी उपलब्ध है, जो बेहतर रिस्पॉन्सिवनेस प्रदान करता है। आपकी सारी पावर सीधे आपके हाथों में महसूस होगी।

मैनुअल मोड में स्विच करके आप गेयर्स को मैन्युअल रूप से नियंत्रित कर सकते हैं, जिससे ड्राइविंग का अनुभव और भी बेहतर और क्विक हो जाता है।

लेकिन अगर आप एक प्रॉपर ऑटोमैटिक चाहते हैं, न कि AMT, तो ₹1,25,000 अतिरिक्त देकर आप सिक्स-स्पीड मैनुअल को सिक्स-स्पीड टॉर्क कन्वर्टर में बदलवा सकते हैं। टॉप वेरिएंट में इस अतिरिक्त कीमत पर टॉर्क कन्वर्टर मिलना, मुझे लगता है कि यह सही कीमत है, क्योंकि टॉर्क कन्वर्टर ऑटोमैटिक सिस्टम्स वास्तव में बहुत अच्छे होते हैं।

💡 20 km/l की माइलेज! क्या यह कीमत के हिसाब से एक गेम-चेंजर है?

यह इंजन फ्यूल एफिशिएंट भी है। हाईवे पर हमें 20 km/l की माइलेज मिली, जो ड्राइविंग की आदतों के आधार पर 18 से 21 km/l के बीच आसानी से मिल जाती है।

शहरों में भी, यह आसानी से 12-13 km/l की माइलेज दे देती है। सबसे खराब स्थिति में भी, यानी भारी ट्रैफिक में भी, इसकी माइलेज 10 km/l से नीचे नहीं जाती, हमेशा इससे ऊपर ही रहती है।

स्टीयरिंग भी सुपर स्मूथ है, जिससे शहरों में गाड़ी चलाना बहुत आसान हो जाता है। हाईवे पर स्थिरता के लिए, यह थोड़ा भारी हो जाता है, जो एक अच्छा बैलेंस है।

सस्पेंशन भी सॉफ्ट और स्टिफ के बीच एक अच्छा संतुलन प्रदान करते हैं। यह आपको स्थिरता के साथ-साथ आरामदायक राइड भी देते हैं। ज्यादा झटके महसूस नहीं होते, लेकिन स्थिरता पूरी रहती है।

स्टीयरिंग और सस्पेंशन में यह बैलेंस सिट्रॉइन C3 एयरक्रॉस और अन्य मॉडलों में भी देखा गया है।

अब बात करते हैं इसकी कुछ समस्याओं की। सबसे पहली समस्या है शोरूम नेटवर्क। अभी बहुत ज्यादा शोरूम्स उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन धीरे-धीरे विस्तार हो रहा है, जो कि सही भी है।

अगर शुरुआत में ही बहुत सारे शोरूम्स खोल दिए जाएं और गाड़ियां कम बिकें, तो डीलर्स के लिए यह अनफेयर होगा। इसीलिए, यह एक स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया है।

दूसरी समस्या है मार्केटिंग। मुझे लगता है कि यह गाड़ी अभी उतनी दिख नहीं रही है। "जो दिखता है, वो बिकता है" - इस कहावत के अनुसार, इस गाड़ी को और अधिक प्रचारित करने की आवश्यकता है।

💡 क्या इस 4.3 मीटर SUV को 4 मीटर सेगमेंट में पेश करना एक स्मार्ट मूव है?

तीसरा महत्वपूर्ण बिंदु है प्लेसमेंट। 4.3 मीटर की सबसे सस्ती गाड़ी होने के बजाय, इसे 4 मीटर एसयूवी सेगमेंट के साथ तुलना करके पेश किया जाना चाहिए।

ऐसा इसलिए है क्योंकि इस कीमत पर आपको फीचर्स बहुत ज्यादा मिलते हैं। जब हम इसकी तुलना 4.3 मीटर की अन्य एसयूवी से करते हैं, तो यह सिर्फ "सबसे सस्ती 4.3 मीटर एसयूवी" बनकर रह जाती है।

तुलना 4 मीटर एसयूवी के साथ करके यह दिखाया जाना चाहिए कि आपको 4 मीटर एसयूवी की कीमत में एक 4.3 मीटर की गाड़ी मिल रही है, वो भी इतने सारे फीचर्स के साथ।

भारतीय बाजार मूल्य-संवेदनशील है, लोग केवल सस्ती गाड़ी नहीं चाहते, बल्कि वैल्यू फॉर मनी चाहते हैं। इसलिए, इसे 4 मीटर कैटेगरी के साथ मार्केट करना बेहतर होगा।

इस तरह से, यह अन्य गाड़ियों से सस्ती नहीं, बल्कि उनसे बेहतर कहलाएगी। अगर इसकी प्लेसमेंट सही तरीके से की जाए और इसकी तुलना वेन्यू, सोनेट, XUV 3XO जैसी गाड़ियों से की जाए, तो यह ज्यादा बेहतर प्रदर्शन कर पाएगी।

जब कोई 4.3 मीटर की एसयूवी के बारे में सोचता है, तो उसका बजट आमतौर पर ज्यादा होता है, और वह सबसे सस्ती 4.3 मीटर की गाड़ी नहीं ढूंढता।

तो, यह गाड़ी सस्ती क्यों है? एक तो, सिट्रॉइन एक नई कंपनी है और शुरुआत में ज्यादा महंगी गाड़ियां नहीं लाना चाहती। दूसरा, इसमें कुछ फीचर्स नहीं हैं जो आमतौर पर 4.3 मीटर एसयूवी में मिलते हैं।

जैसे कि ऑटोमैटिक टेलगेट, इलेक्ट्रिक ड्राइवर सीट, डीजल इंजन, रियर डिस्क ब्रेक और सनरूफ। हां, इसमें 360° कैमरा है, लेकिन उसकी क्वालिटी औसत ही है।

लेकिन इन फीचर्स की कमी को गाड़ी की किफायती कीमत से संतुलित किया जा सकता है। अगर यह महंगी होती और इसमें ये फीचर्स नहीं होते, तो इसे ओवरप्राइस्ड कहा जा सकता था।

पर वैल्यू फॉर मनी की परिभाषा तो सिट्रॉइन बसॉल्ट X ने निश्चित रूप से सेट की है।

💡 फीचर्स की कमी को कीमत से ढका जा सकता है, लेकिन क्या यह ब्रांड की प्रतिष्ठा बनाने के लिए पर्याप्त है?

क्या समझ आया? गाड़ी शानदार है। शोरूम नेटवर्क को बढ़ाने और ग्राहकों का विश्वास जीतने की जरूरत है। सिट्रॉइन ब्रांड को अभी काफी मेहनत करनी है।

बसॉल्ट X में मुझे कोई बड़ी खामी नजर नहीं आई। जो फीचर्स इसमें नहीं हैं, उनकी कमी इसलिए नहीं खलती क्योंकि इसकी कीमत कम है।

यह निश्चित रूप से वैल्यू फॉर मनी की पेशकश करती है, लेकिन ब्रांड को अपनी जगह बनाने के लिए अभी लंबा सफर तय करना है।

Rajesh Kashyap

Digital & Tech enthusiast। पिछले कई सालों से Geopolitics, Indian Finance और EV sector को closely follow कर रहा हूँ। Behind The Fold (behindthefold.in) का Founder — जहाँ हम headlines के पीछे की असली कहानी लाते हैं।

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