- AI सर्वर की भूख मिटा रहे हैं आपके डिवाइस के पुर्जे!
- Apple को भी लगा झटका, Samsung ने डबल रेट कोट किया!
- भू-राजनीतिक तनाव ने बढ़ाई आग में घी!
क्या आप जानते हैं कि जिस AI तकनीक पर आज दुनिया इतनी निर्भर है, वह आपके पसंदीदा गैजेट्स को आपसे दूर कर रही है? ग्लोबल सप्लाई चेन में आई भारी कमी और AI सर्वर की बढ़ती मांग ने कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स के बाजार में भूचाल ला दिया है।
RAM और स्टोरेज की सप्लाई में आई अप्रत्याशित कमी ने दुनिया भर के इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माताओं को मुश्किल में डाल दिया है। यह क्राइसिस लगातार बदतर होता जा रहा है, और इसका सीधा असर आपकी जेब पर पड़ने वाला है।
Apple जैसी दिग्गज कंपनी भी इस समस्या से अछूती नहीं है। हाल ही में iPhone 17 में 128GB स्टोरेज को हटाकर सीधे 256GB का विकल्प देना इसी ओर इशारा करता है। 128GB और 256GB स्टोरेज की कीमत में अब ज्यादा अंतर नहीं रह गया है, और 128GB देना Apple के लिए घाटे का सौदा साबित हो रहा है। MacBook Air में भी अब केवल 512GB स्टोरेज देखने को मिल रही है।
स्थिति इतनी खराब है कि Samsung जैसी कंपनियां, जो खुद RAM का निर्माण करती हैं, अपनी ही मांग को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रही हैं। Galaxy S26 के 50% फोन में Micron की RAM का इस्तेमाल हो रहा है, जबकि Samsung खुद DRAM का सबसे बड़ा सप्लायर है।
AI सर्वर की भूख मिटा रहे हैं आपके डिवाइस के पुर्जे!
यह समस्या सिर्फ RAM तक सीमित नहीं है। AI सर्वर के निर्माण के लिए जरूरी ग्लास फाइबर जैसे महत्वपूर्ण मटेरियल की सप्लाई भी अब सर्वर साइड की ओर मुड़ गई है। इससे पीसीबी (Printed Circuit Board) बनाने के लिए जरूरी इन कंपोनेंट्स की भी कमी होने लगी है।
यही नहीं, फरवरी में चीन में ऑप्टिकल फाइबर की मांग में भी जबरदस्त तेजी देखी गई। अनुमान है कि इसका इस्तेमाल भी AI सर्वर में ही किया जाएगा। सीधे शब्दों में कहें तो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बेकाबू दौड़ कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स की दुनिया को तबाह कर रही है।
बाजार में हर 3 महीने में RAM और NAND स्टोरेज की कीमतें दोगुनी हो रही हैं। यह स्थिति मोबाइल फोन, लैपटॉप, टैबलेट और लगभग हर उस कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस को प्रभावित कर रही है जहां चिप्स का इस्तेमाल होता है।
Apple को भी लगा झटका, Samsung ने डबल रेट कोट किया!
दुनिया की सबसे अमीर कंपनी Apple भी इस संकट से अछूती नहीं है। हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, Apple ने आगामी iPhones के लिए Samsung से RAM की मांग की थी। हैरानी की बात यह है कि Samsung ने Apple को तत्कालीन बाजार दर से दोगुना रेट बताया। इसके बावजूद, Apple इस रेट पर RAM लेने को तैयार हो गया।
यह स्थिति दिखाती है कि चिप्स की कमी कितनी विकट है। Apple जैसी कंपनी, जिसके पास असीमित धन है, भी इस समस्या से जूझ रही है। 2027 तक Apple के लिए भी इस प्रक्रिया को जारी रखना मुश्किल हो जाएगा, जिससे शायद वे भी भविष्य में फोन की कीमतों को नियंत्रित न कर पाएं।
यह स्थिति उन कंपनियों के लिए विनाशकारी है जो बजट सेगमेंट में इलेक्ट्रॉनिक्स बनाती हैं। कुछ कंपनियां तो दिवालिया होने के कगार पर भी पहुंच सकती हैं। इसे एक तरह का "AI टैक्स" कहा जा रहा है, जो हर कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की कीमत बढ़ा रहा है।
भू-राजनीतिक तनाव ने बढ़ाई आग में घी!
वैश्विक भू-राजनीतिक स्थितियाँ भी इस संकट को और बढ़ा रही हैं। सीआईए ने TSMC जैसी कंपनियों को ताइवान से अपनी प्रोडक्शन शिफ्ट करने की सलाह दी है, क्योंकि ताइवान पर चीन के कब्जे का खतरा मंडरा रहा है। इससे चिप सप्लाई चेन में और बड़ी कमी आ सकती है।
Apple अब अपनी चिप्स अमेरिका में Intel के साथ बनाने की योजना बना रहा है। यह एक अभूतपूर्व कदम है, जो इस संकट की गंभीरता को दर्शाता है।
Nvidia और AI का दबदबा, गेमिंग से दूर होती कंपनियों!
आज के समय में AI हार्डवेयर के लिए सबसे ज्यादा इस्तेमाल Nvidia की ग्राफिक्स चिप्स का हो रहा है। ये चिप्स TSMC में बनती हैं, और अब Nvidia Apple को भी पीछे छोड़ते हुए TSMC का सबसे बड़ा ग्राहक बन गया है। Nvidia ने 2027 तक के लिए 2nm चिप्स और 2029 तक के लिए मेमोरी और स्टोरेज को पहले ही बुक कर लिया है।
Nvidia ने अपने GPU के उत्पादन को भी कम कर दिया है और पूरी तरह से AI पर ध्यान केंद्रित कर रही है। यह बदलाव गेमिंग इंडस्ट्री को भी प्रभावित कर रहा है।
यह एक ऐसा बुलबुला है जो अभी तक मौजूद भी नहीं है, ऐसे भविष्य के लिए चिप्स खरीदे जा रहे हैं। इससे कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री, खासकर बजट सेगमेंट, बुरी तरह प्रभावित हो रही है।
क्या चीन देगा राहत?
कुछ चीनी कंपनियां, जैसे CXT, अपनी खुद की RAM तकनीक विकसित करने की कोशिश कर रही हैं। हालांकि, इसमें 2-3 साल का समय लग सकता है, और चीन पर लगे प्रतिबंधों के कारण उन्हें बाहरी मदद भी नहीं मिल पाएगी।
यहां तक कि Open AI जैसी कंपनियां, जो भारी निवेश कर रही हैं, भी अपनी हार्डवेयर लॉन्चिंग को 2027 तक टाल रही हैं।
यह नया "सामान्य" है - कीमत बढ़ने के लिए तैयार रहें!
स्मार्टफोन बनाने में 8-9 महीने लगते हैं। चिप्स और स्टोरेज ऑर्डर करने के लिए 3 महीने पहले भुगतान करना पड़ता है। जब हर तिमाही कीमतें दोगुनी हो रही हैं, तो नए फोन की कीमत तय करना मुश्किल हो रहा है।
यही कारण है कि 10,000 रुपये के नीचे 5G फोन बनाना अब लगभग असंभव हो गया है। 256GB और 128GB स्टोरेज की कीमतों में अंतर लगभग खत्म हो गया है, और DDR5 के साथ-साथ DDR4 RAM की कीमतें भी बढ़ गई हैं।
कंपनियां आपको उच्च-बैंड वाले उत्पादों की ओर धकेल रही हैं। जो कंपनियां सस्ते फोन पर ध्यान केंद्रित करेंगी, उनका भविष्य अनिश्चित है। ₹30-35,000 अब मिड-रेंज बन गया है, और ₹50,000 के नीचे के फोन बेचना कंपनियों के लिए चुनौती बन गया है।
यह स्मार्टफोन इंडस्ट्री और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री का एक "डार्क फेस" है।
आप क्या करें?
यदि आप कोई नया कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद खरीदने की सोच रहे हैं, तो उसे अभी खरीदें और जब तक वह काम कर रहा है, उसका भरपूर इस्तेमाल करें। भविष्य की सेल्स या ऑफर्स का इंतजार न करें, क्योंकि जो भी ऑफर आएंगे वे पुराने मॉडल्स पर ही होंगे।
EMI का उपयोग करने से बचें, क्योंकि आने वाले समय में अनिश्चितता बढ़ सकती है और EMI का जाल आपको और अधिक नुकसान पहुंचा सकता है। यदि संभव हो, तो एकमुश्त भुगतान करें।